नेपाल में आई भीषण बाढ़ की आपदा के बाद यूपी के आलू किसानों के लिए निर्यात के नए अवसर सामने आए हैं। नेपाल में भारतीय आलू, खासतौर से सादाबाद क्षेत्र की 3797 प्रजाति के आलू की मांग में बड़ा उछाल आया है। इसके साथ ही श्रीलंका और खाड़ी देशों से भी ऑर्डर बढ़ गए हैं, जिसके चलते स्थानीय कोल्ड स्टोरेज से आलू का निर्यात काफी तेज हो गया है।
आलू कारोबारियों के अनुसार, मांग बढ़ने से सादाबाद क्षेत्र का 3797 प्रजाति का आलू इन दिनों 'चिप्सोना' जैसी लोकप्रिय किस्मों को भी भाव के मामले में पछाड़ रहा है। इसी वजह से व्यापारी सीधे किसानों से इसे 1050 रुपये से लेकर 1100 रुपये प्रति क्विंटल तक के भाव पर खरीद रहे हैं। इसके अलावा बहरीन ने भी इस किस्म में अपनी दिलचस्पी दिखाई है, जिसके बाद उद्यान विभाग ने इस आलू का एक सैंपल बहरीन भेजा है।
नेपाल, श्रीलंका और खाड़ी देशों को आपूर्ति
स्थानीय किसान विपिन चौधरी और आलू व्यापारी रामवीर सिंह ने बताया कि नेपाल में स्थानीय आलू की मांग काफी बढ़ी है। वर्तमान में नेपाल से लगी तीन सीमाएं बंद हैं, लेकिन महाराजगंज (सोनौली) सीमा के जरिए आलू की लगातार आपूर्ति की जा रही है।
वहीं, श्रीलंका भेजे जाने वाले आलू को पहले ट्रकों में भरकर मदुरै (तमिलनाडु) भेजा जाता है और वहां से समुद्री मार्ग के जरिए इसे श्रीलंका पहुंचाया जा रहा है। पूर्व में सादाबाद से रूस और खाड़ी देशों में भी आलू निर्यात होता रहा है। बीच में अमेरिका-ईरान तनाव के कारण यह निर्यात प्रभावित हुआ था, लेकिन अब स्थिति पूरी तरह सामान्य हो चुकी है और खाड़ी देशों में निर्यात सुचारू है।
अगले चार माह में 18 हजार मीट्रिक टन निर्यात का लक्ष्य
निर्यातकों के अनुसार, सितंबर से जनवरी तक के अगले चार महीनों में सप्लायरों को लगभग 18,000 मीट्रिक टन आलू निर्यात करने के ऑर्डर मिले हैं। हवाई मार्ग से आलू महज पांच घंटे में अपनी मंजिल तक पहुंच जाता है, लेकिन इसमें लागत अधिक आती है। लागत को कम करने के लिए मुंबई बंदरगाह से समुद्री मार्ग का उपयोग किया जाएगा। एक कार्गो जहाज के जरिए लगभग 3,000 मीट्रिक टन आलू भेजा जा सकता है। हालांकि, समुद्री मार्ग से खेप को पहुंचने में करीब चार सप्ताह का समय लगता है।
आने वाले दिनों में दाम में आ सकती है और तेजी
किसानों के मुताबिक, आने वाले दिनों में तीन प्रमुख कारणों से आलू के दाम में और तेजी देखने को मिल सकती है। आगामी त्योहारी सीजन और वैवाहिक आयोजनों के कारण घरेलू स्तर पर आलू की खपत बढ़ेगी।
पंजाब के ऊना-होशियारपुर क्षेत्र में इस बार अगेती आलू की बोआई समय पर नहीं हो सकी है। आमतौर पर दिवाली के आसपास नया आलू मंडी में आ जाता था, जिससे कोल्ड स्टोरेज के पुराने आलू के भाव गिर जाते थे। इस बार अगेती फसल में देरी होने से किसानों को अपना पुराना आलू बेचने के लिए करीब तीन महीने का अतिरिक्त समय मिलेगा। विदेशों से मिल रहे लगातार ऑर्डर का सीधा फायदा स्थानीय भाव पर पड़ रहा है।
एफपीओ के जरिए सीधे निर्यात की तैयारी
जिला उद्यान अधिकारी सुनील कुमार के अनुसार, किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) के माध्यम से भी आलू निर्यात की तैयारी चल रही है। उन्होंने कहा, "एफपीओ के जरिए सीधे किसानों को अंतरराष्ट्रीय व्यापार से जोड़ने की दिशा में तेजी से काम किया जा रहा है, जिससे उन्हें अपनी फसल का बेहतर मूल्य मिल सके। नेपाल सहित अन्य खाड़ी देशों में लगातार आलू भेजा जा रहा है।"
आंकड़ों के अनुसार, जिले में आलू का रकबा हजारों हेक्टेयर में था और शीतगृहों में लाखों मीट्रिक टन आलू जमा है, जिसे अब अच्छे भाव पर निर्यात किया जा रहा है।