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Home› Khabar Junction› Rabi Season Demand For Fertilizer To Rise Requirement Estimated At 350 Lakh Tonnes What Is The Stock Status

Rabi Season: रबी में खाद की बढ़ेगी मांग, 350 लाख टन खाद की मांग का अनुमान, यूरिया-डीएपी का कितना स्टॉक?

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Devesh Saraswat Updated Mon, 28 Sep 2026 08:43 AM IST
सार

  • रबी सीजन के लिए करीब 350 लाख टन उर्वरक की मांग का अनुमान
  • 199.27 लाख टन यूरिया और 55.07 लाख टन डीएपी की जरूरत का अनुमान
  • 18 सितंबर तक देश में 141.69 लाख टन खाद का क्लोजिंग स्टॉक
  • सितंबर में अनुमानित मांग के मुकाबले 40% से भी कम खाद की बिक्री
  • 28-29 सितंबर को राष्ट्रीय रबी सम्मेलन में खाद की उपलब्धता और संतुलित उपयोग पर चर्चा

आगामी रबी में
आगामी रबी में - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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केंद्र सरकार 1 अक्टूबर से शुरू होने वाले आगामी रबी सीजन के लिए लगभग 350 लाख टन उर्वरकों की मांग का अनुमान लगाने जा रही है। जानकारों के मुताबिक, यह मांग पिछले वर्ष के स्तर से 2 लाख टन अधिक है। यह बढ़ोतरी ऐसे समय में होने जा रही है जब कर्नाटक और महाराष्ट्र की कई तहसीलों में सूखा घोषित होने के कारण खरीफ सीजन में उर्वरकों की बिक्री उम्मीद से काफी कम रही थी।

यूरिया और डीएपी की मांग के साथ स्टॉक की स्थिति
जानकारों के अनुसार, 28 सितंबर से शुरू हो रहे दो दिवसीय राष्ट्रीय रबी सम्मेलन में राज्यों के साथ विचार-विमर्श के बाद उर्वरक की इस मांग को अंतिम रूप दिए जाने की संभावना है। राज्यों से मिले सुझावों के आधार पर अक्टूबर 2026 से मार्च 2027 के दौरान सब्सिडी वाले इन खादों की महीने-वार जरूरत का एक प्रारंभिक अनुमान तैयार कर लिया गया है। इस प्रारंभिक अनुमान के अनुसार, रबी सीजन के लिए 199.27 लाख टन यूरिया, 55.07 लाख टन डीएपी, 16.4 लाख टन एमओपी और 79.12 लाख टन कॉम्प्लेक्स खाद की मांग आंकी गई है।

वहीं, इसके मुकाबले देश में 18 सितंबर तक उर्वरकों का क्लोजिंग स्टॉक कुल 141.69 लाख टन उपलब्ध था। इस स्टॉक में 64.91 लाख टन यूरिया, 22.83 लाख टन डीएपी, 9.38 लाख टन एमओपी और 44.57 लाख टन कॉम्प्लेक्स खाद मौजूद है।

बारिश का असर और खाद की बिक्री के आंकड़े
उर्वरकों की मांग मुख्य रूप से वर्षा-आधारित क्षेत्रों और कुछ हद तक नहरी सिंचाई वाली जमीनों में बारिश पर निर्भर करती है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 1 से 23 सितंबर के दौरान सामान्य से 20 प्रतिशत कम बारिश होने के चलते उर्वरकों की बिक्री में गिरावट दर्ज की गई। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि इसके बाद बने कम दबाव और गहरे डिप्रेशन के कारण हुई भारी बारिश से उन इलाकों में खाद की मांग बढ़ सकती है, जहाँ अच्छी वर्षा हुई है।

पूरे सितंबर महीने के लिए उर्वरकों की कुल मांग 54.48 लाख टन अनुमानित थी, जिसमें 26.77 लाख टन यूरिया, 10.2 लाख टन डीएपी, 2.87 लाख टन एमओपी और 14.64 लाख टन कॉम्प्लेक्स खाद शामिल है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 4 से 18 सितंबर के बीच केवल 21.6 लाख टन यानी 40 प्रतिशत से भी कम खाद की बिक्री हो सकी। इन 15 दिनों की अवधि में 13.15 लाख टन यूरिया, 4.39 लाख टन डीएपी, 0.81 लाख टन एमओपी और 3.25 लाख टन कॉम्प्लेक्स खाद बेची गई।

रबी सम्मेलन में कई अहम मुद्दों पर होगा मंथन
कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के अनुसार, इस वार्षिक रबी सम्मेलन में राज्यों के कृषि मंत्री, केंद्र व राज्य सरकारों के वरिष्ठ अधिकारी, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद और अन्य हितधारक शामिल होंगे। सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य केंद्र और राज्यों के बीच तालमेल को मजबूत करना और कृषि उत्पादन, उत्पादकता, स्थिरता तथा किसानों की आय बढ़ाने के लिए एक साझा रणनीति तैयार करना है। सरकार के अनुसार, 29 सितंबर को उर्वरक की उपलब्धता और इसके संतुलित उपयोग पर विशेष चर्चा की जाएगी।

इसके अलावा, सम्मेलन में कई अन्य प्रमुख मुद्दों पर भी विस्तार से विचार-विमर्श किया जाएगा। इन मुद्दों में दलहन, तिलहन और ऑयल पाम में आत्मनिर्भरता मिशन, बागवानी, कपास, बीज की उपलब्धता व बीज मूल्य श्रृंखला में सुधार के विषय शामिल हैं। साथ ही प्राकृतिक खेती, मिट्टी का स्वास्थ्य, कृषि यंत्रीकरण, एफपीओ वित्तपोषण और बुनियादी ढांचा, विपणन सुधार, पीएम धन-धान्य कृषि योजना, किसान क्रेडिट कार्ड का दायरा बढ़ाने, डिजिटल कृषि, पीएम फसल बीमा योजना, पौध संरक्षण और कृषि सांख्यिकी जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी व्यापक चर्चा होगी।


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