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Home› Khabar Junction› Kharif Season 12 Deficit In Monsoon Rainfall With 309 Districts Receiving Scanty Rain Likely Impact On Pad

Kharif Season: मानसूनी बारिश में 12% की कमी, 309 जिलों में कम बारिश; धान-दलहन-तिलहन की उपज पर असर के आसार

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Devesh Saraswat Updated Mon, 28 Sep 2026 10:46 AM IST
सार

  • चालू मानसून सीजन में बारिश की कमी अब तक 11.9 प्रतिशत दर्ज की गई है।
  • महाराष्ट्र के 265 और कर्नाटक के 124 तालुक सूखा प्रभावित घोषित
  • धान, अरहर, सोयाबीन और तिलहन की पैदावार पर असर की आशंका
  • महाराष्ट्र और कर्नाटक के कई हिस्सों में फसलों का मिजाज खराब।
  • देश के 309 जिलों में कम या बहुत कम बारिश दर्ज की गई

कम बारिश से खरीफ फसलों पर संकट के बादल।
कम बारिश से खरीफ फसलों पर संकट के बादल। - फोटो : AI
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विस्तार
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मानसून की विदाई के समय भारत में कुल बारिश लंबे समय के औसत के 90 प्रतिशत से भी कम रह सकती है। जानकारों का कहन है कि कई क्षेत्रों में बारिश की भारी कमी दर्ज की गई है, जिससे धान, दलहन और तिलहन जैसी प्रमुख फसलों की पैदावार पर खराब असर पड़ सकता है। जानकारी के अनुसार, रविवार तक मानसूनी बारिश का घाटा सामान्य से 11.9 प्रतिशत दर्ज किया गया है।

फसलों की स्थिति और उत्पादन को लेकर चिंताएं
सरकारी आंकड़े बताते हैं कि चालू सीजन में 109.49 मिलियन हेक्टेयर रकबे में खरीफ फसलों की बुवाई हुई है, जो पिछले खरीफ से 1.2 प्रतिशत कम है। गोर करने वाली बात यह है कि बीते साल अच्छी बारिश की वजह से खरीफ उत्पादन 176 मिलियन टन के रिकॉर्ड पर पहुंचा था। लेकिन, इस बार अरहर, सोयाबीन, मक्का और धान जैसी फसलें अपने विकास के चरण में है, ऐसे में कम बारिश ने फसल उत्पादन को लेकर चिंताएं खड़ी की हैं।

महाराष्ट्र और कर्नाटक में सूखे की मार
अरहर और सोयाबीन के प्रमुख उत्पादक राज्य महाराष्ट्र और कर्नाटक में स्थिति ज्यादा गंभीर है। महाराष्ट्र में 18 प्रतिशत और कर्नाटक में 30 प्रतिशत बारिश की कमी दर्ज की गई है। इसके चलते महाराष्ट्र सरकार ने अपने 358 तालुकों में से 265 में सूखा घोषित कर दिया है।

सूखे के चलते सोयाबीन से धान तक को नुकसान
महाराष्ट्र के कृषि मंत्री दत्तात्रेय भरणे के अनुसार, प्रभावित इलाकों में किसानों को सोयाबीन, कपास, मक्का, ज्वार, बाजरा, धान, अरहर, मूंग और उड़द की फसल में भारी नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। सरकार के अनुसार, जिला प्रशासन को प्रभावित खेतों में फसल नुकसान का सर्वेक्षण और पंचनामा शुरू करने के निर्देश दे दिए गए हैं।

कर्नाटक सरकार ने भी वैज्ञानिक आकलन के आधार पर खरीफ 2026 सीजन के लिए 23 और तालुकों को सूखा प्रभावित घोषित किया है, जिससे राज्य में सूखाग्रस्त तालुकों की कुल संख्या 124 हो गई है। दक्षिण भारत के कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में बारिश 23 प्रतिशत कम रही है। यहां बारिश की कमी और जलाशयों में पानी का स्तर घटने से खेती पर भारी दबाव पड़ा है। इन राज्यों में गन्ने की पैदावार भी प्रभावित होने की आशंका है।

12 प्रतिशत गिरावट का अनुमान
जानकारों का कहना  है कि मानसून 2026 में बारिश का घाटा 12 प्रतिशत कम रह सकता है। इस  गिरावट का सबसे प्रमुख कारण अल नीनो का असर है।

309 जिलों में अच्छी बारिश नहीं हुई 
आंकड़ों की बात करें तो मध्य भारत में सामान्य बारिश हुई है, जबकि उत्तर-पश्चिम भारत में 6.3 प्रतिशत, पूर्व और पूर्वोत्तर भारत में 24.5 प्रतिशत तथा दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत में 23.4 प्रतिशत कम बारिश हुई है। देश के लगभग 740 जिलों में से 309 जिलों में कम या बहुत कम बारिश हुई है, जबकि 424 जिलों (57 प्रतिशत) में सामान्य या उससे अधिक बारिश दर्ज की गई है।

जून सबसे खराब महीना, अगस्त ने भी बिगाड़ा खेल
बारिश के नजरिये से जून में मानसूनी बारिश की 36 प्रतिशत कमी दर्ज की गई थी, जो जुलाई में सुधरकर सामान्य से एक प्रतिशत अधिक पर आई। दूसरी ओर अगस्त में एक बार फिर कम बारिश ने इस बढ़त को सामान्य से 16.3 प्रतिशत पर लाने का काम किया। सितंबर में इस कमी में कोई बड़े बदलाव के आसार नहीं है, क्योंकि IMD ने चालू महीने में सामान्य से कम बारिश का अनुमान जताया है।


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