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गन्ना पेराई शुरू होने वाली है : कम बारिश से फसल पर चिंता; चीनी निर्यात के आसार कम, आयात की नौबत आने की संभावना

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Devesh Saraswat Updated Mon, 28 Sep 2026 05:22 PM IST
सार

  • प्रमुख गन्ना उत्पादक राज्यों में कम बारिश ने आगामी पेराई सीजन में चीनी उत्पादन की संभावना को कमजोर किया है
  • ISMA ने घरेलू खपत को पूरा करने के लिए एक बार फिर चीनी आयात की जरूरत की बात कही है
  • उत्पादन की स्थिति अक्तूबर के दूसरे या तीसरे हफ्ते तक ज्यादा साफ होने की उम्मीद है।
  • गन्ने की अगली फसल को देखते हुए इथेनॉल के लिए गन्ने का इस्तेमाल सीमित हो सकता है।

घरेलू खपत को पूरा करने के लिए एक बार फिर चीनी आयात की संभावना खड़ी हो सकती है।
घरेलू खपत को पूरा करने के लिए एक बार फिर चीनी आयात की संभावना खड़ी हो सकती है। - फोटो : AI Image
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विस्तार
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अक्तूबर महीने से शुरू होने वाले नए गन्ना पेराई सीजन में भारत से चीनी निर्यात (Sugar Export) की संभावना काफी सीमित हो सकती है। यह बात  इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के महानिदेशक दीपक बलानी के हवाले से सामने आई है। दीपक बलानी के अनुसार, प्रमुख गन्ना उत्पादक राज्यों में  कम बारिश के चलते गन्ने की फसल को लेकर चिंता बढ़ गई है।

गन्ना उत्पादक राज्यों में सूखे की मार
उत्तर प्रदेश (UP) के बाद गन्ना उत्पादन के मामले में महाराष्ट्र और कर्नाटक सबसे बड़े राज्य है। इन दोनों राज्यों के कई इलाकों में सूखे का एलान किया जा चुका है। दीपक बलानी के अनुसार, आगामी सीजन के लिए चीनी उत्पादन का अनुमान लगाना अभी थोड़ी जल्दबाजी होगी। उन्होंने कहा कि अक्तूबर के दूसरे या तीसरे हफ्ते तक स्थिति ज्यादा साफ होने की उम्मीद है।

विदेश से चीनी आयात की संभावना
गन्ना उत्पादन को लेकर खड़ी हुई चिंताओं के बीच बलानी ने घरेलू खपत को पूरा करने के लिए चीनी आयात (Sugar Export) की संभावना जताई है। बता दें कि केंद्र सरकार ने चालू सीजन के लिए पहले ही 10 लाख टन कच्ची चीनी के आयात को मंजूरी दी है।

क्या व्यावसायिक नजरिए से चीनी आयात फायदे का सौदा?
बलानी के अनुसार, चीनी का आयात करना व्यावसायिक रूप से सही होगा या नहीं, यह वैश्विक बाजार की कीमतों पर निर्भर करेगा। वर्तमान में घरेलू बाजार में चीनी की कीमतें अंतरराष्ट्रीय स्तर से कम हैं, जिसके कारण फिलहाल आयात करना ज्यादा आकर्षक नहीं लग रहा है। हालांकि, ब्राजील से चीनी लेकर कुछ जहाज भारत पहुंच चुके हैं और उद्योग जगत अंतरराष्ट्रीय कीमतों के अनुकूल होने का इंतजार कर रहा है। बलानी ने स्पष्ट किया, "हमें देश में चीनी की पर्याप्त उपलब्धता के लिए मुख्य रूप से इस 10 लाख टन का आयात करना होगा, लेकिन मुझे लगता है कि निर्यात की कोई संभावना नहीं है।"

इथेनॉल में गन्ने का उपयोग सीमित हो सकता है
हाल ही में खबर सामने आई थी कि सरकार आगामी पेराई सीजन के दौरान इथेनॉल (Ethanol) उत्पादन में गन्ने के इस्तेमाल को सीमित कर सकती है। बलानी के अनुसार, इथेनॉल बनाने में गन्ने का उपयोग मुख्य रूप से सी-हैवी शीरे पर रह सकता है। उन्होंने साफ किया कि इथेनॉल बनाने के लिए गन्ने के रस या बी-हैवी शीरे का उपयोग नहीं किया जाएगा। गन्ने की अगली फसल को लेकर अनिश्चितता के कारण यह रणनीति अपनाई जा रही है, ताकि एथेनॉल का उत्पादन भी हो सके और चीनी के कुल उत्पादन पर ज्यादा असर न पड़े।

त्योहारी सीजन के लिए पर्याप्त चीनी का स्टॉक
इस्मा ने अक्तूबर में चीनी का मासिक रिलीज कोटा लगभग 23 से 25 लाख टन के बीच रहने की संभावना जताई है।  इस्मा के अनुसार, घरेलू बाजार में चीनी की कीमतें अब सामान्य स्तर के करीब आ गई हैं और त्योहारी सीजन के दौरान कीमतों में किसी बड़े उतार-चढ़ाव की आशंका नहीं है। इस्मा के अनुसार, त्योहारी मांग को पूरा करने के लिए देश के पास चीनी का मौजूदा स्टॉक पूरी तरह से पर्याप्त है।


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