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Home› Khabar Junction› Low Rainfall Raises Sugar Concerns Exports May Be Halted Next Year May Lead To Imports

कम बारिश ने बढ़ाई चीनी की चिंता : अगले साल निर्यात पर लग सकता है ब्रेक... आयात की नौबत

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Mohammad Aamil Updated Mon, 28 Sep 2026 07:22 PM IST
सार

महाराष्ट्र और कर्नाटक में सामान्य से कम बारिश के कारण 2027 की गन्ने की फसल और चीनी उत्पादन को लेकर चिंता बढ़ी है। ISMA के मुताबिक, उत्पादन प्रभावित हुआ तो अगले साल चीनी निर्यात की गुंजाइश कम हो सकती है और घरेलू जरूरत के लिए आयात बढ़ाना पड़ सकता है।

चीनी
चीनी - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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महाराष्ट्र और कर्नाटक में कम बारिश से अगले साल गन्ने की फसल और चीनी उत्पादन को लेकर चिंता बढ़ गई है। चीनी मिलों के संगठन इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ISMA) के महानिदेशक दीपक बल्लानी ने सीएनबीसी टीवी18 को बताया कि अगर उत्पादन प्रभावित हुआ तो अगले साल भारत के पास चीनी निर्यात के लिए बहुत कम गुंजाइश रह सकती है। घरेलू जरूरत पूरी करने के लिए चीनी का आयात भी करना पड़ सकता है। महाराष्ट्र और कर्नाटक देश के प्रमुख चीनी उत्पादक राज्य हैं। इन राज्यों में मानसून की बारिश सामान्य से कम रही है। कई इलाकों में सूखे जैसे हालात भी बताए जा रहे हैं।

अक्टूबर तक साफ होगी फसल की तस्वीर
दीपक बल्लानी ने कहा कि अभी यह बताना जल्दबाजी होगी कि 2027 में देश में कितना चीनी उत्पादन होगा। ISMA की टीम जमीनी स्तर पर फसल की स्थिति का आकलन कर रही है। उनके मुताबिक, अक्टूबर के दूसरे या तीसरे सप्ताह तक अगले सीजन के उत्पादन की तस्वीर ज्यादा साफ हो सकती है। उन्होंने कहा कि अभी उत्पादन का सटीक अनुमान लगाना जल्द है, क्योंकि गन्ने की फसल और बारिश की स्थिति में आगे बदलाव हो सकता है।

अगले साल चीनी निर्यात की संभावना कम
फसल को लेकर चिंता के बीच ISMA को अगले साल चीनी निर्यात की उम्मीद कम है। इसके बजाय घरेलू बाजार में पर्याप्त स्टॉक बनाए रखने के लिए भारत को चीनी आयात करनी पड़ सकती है। सरकार पहले ही 10 लाख टन कच्ची चीनी (Raw Sugar) के आयात की अनुमति दे चुकी है। इसमें से करीब 8 लाख टन के आयात को विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) से मंजूरी मिल चुकी है। बल्लानी के मुताबिक, घरेलू बाजार में चीनी की कीमतें फिलहाल अंतरराष्ट्रीय कीमतों से कम हैं। ऐसे में विदेश से चीनी मंगाना कारोबार के लिहाज से महंगा पड़ रहा है।

अंतरराष्ट्रीय कीमत बढ़ने का इंतजार
बल्लानी ने बताया कि ब्राजील से चीनी लेकर कुछ जहाज भारत पहुंच चुके हैं। हालांकि, उद्योग अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों के बेहतर स्तर पर आने का इंतजार कर रहा है, ताकि आयात आर्थिक रूप से व्यवहारिक हो सके। उनके अनुसार, घरेलू जरूरत पूरी करने के लिए 10 लाख टन आयात करना पड़ सकता है, जबकि अगले साल चीनी निर्यात की संभावना फिलहाल काफी कम दिखाई दे रही है।

इथेनॉल के लिए सी-हैवी शीरे के इस्तेमाल पर जोर
इथेनॉल उत्पादन को लेकर बल्लानी ने कहा कि अगले सीजन में चीनी की जगह एथेनॉल बनाने के लिए गन्ने के रस या बी-हैवी शीरे का इस्तेमाल बढ़ाने की संभावना कम है। उनके मुताबिक, इथेनॉल उत्पादन के लिए मुख्य रूप से सी-हैवी शीरे (C-heavy molasses) का इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे चीनी उत्पादन में ज्यादा कटौती किए बिना इथेनॉल बनाया जा सकेगा। फसल को लेकर अनिश्चितता के बीच यह व्यवस्था घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता बनाए रखने में मदद कर सकती है।

त्योहारों के लिए पर्याप्त चीनी स्टॉक
आने वाले त्योहारों के सीजन को लेकर ISMA ने चीनी की उपलब्धता पर भरोसा जताया है। अक्टूबर में सरकार की ओर से चीनी का रिलीज कोटा करीब 23 से 25 लाख मीट्रिक टन (LMT) रहने की उम्मीद है। बल्लानी के मुताबिक, त्योहारों से पहले थोक खरीदार बड़ी मात्रा में चीनी खरीदते हैं। सरकार ने भी चीनी की पर्याप्त उपलब्धता और कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए कई कदम उठाए हैं। सरकार की ओर से स्टॉक रखने की सीमा (Stock Holding Limit) जैसे उपाय भी किए गए हैं। फिलहाल देश में त्योहारों की मांग पूरी करने के लिए पर्याप्त चीनी स्टॉक होने की बात कही गई है।

त्योहारों में कीमतों में बड़े उतार-चढ़ाव की उम्मीद नहीं
बल्लानी के अनुसार, घरेलू चीनी कीमतें अब सामान्य स्तर के करीब लौट आई हैं। ऐसे में त्योहारों के दौरान चीनी की कीमतों में बड़े उतार-चढ़ाव की संभावना कम है। हालांकि, अगले साल की चीनी फसल के लिए महाराष्ट्र और कर्नाटक में बारिश की स्थिति अहम बनी हुई है। आने वाले हफ्तों में होने वाली बारिश और जमीनी सर्वे से ही यह साफ होगा कि देश में चीनी का उत्पादन कितना रहेगा और घरेलू जरूरत पूरी करने के बाद निर्यात के लिए कितना स्टॉक बचेगा।
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