अक्तूबर के आगमन के साथ भारत में नए गन्ना पेराई सीजन का शुभारंभ हो चुका है। दूसरी ओर मिलों का चीनी भंडारण गिरकर 37.5 लाख टन रह गया है। जानकारों का कहना है कि मौजूदा चीनी भंडारण एक दशक का सबसे निचला स्तर है। साल 2025 के अक्तूबर महीने में चीनी मिलों के पास 50 लाख टन चीनी का भंडार था।
चीनी निर्यात पर फिर रोक लगने के आसार
गन्ना पेराई सीजन शुरू होने से पहले घरेलू जरूरत को पूरा करने के लिए यह स्टॉक काफी अहम होता है। नए सीजन के शुरुआती स्टॉक में आई इस बड़ी गिरावट को देखते हुए नए पेराई सीजन में भी चीनी निर्यात पर रोक लगने की संभावना है। ध्यान रहे कि सरकार ने 30 सितंबर तक ही चीनी निर्यात पर रोक लगाई थी। अब उद्योग की नजरें सरकार के आगामी कदम पर हैं।
चीनी की खपत बढ़ी, उत्पादन रह गया पीछे
आंकड़ों के अनुसार, 2021-22 में चीनी का उत्पादन 3.58 करोड़ टन था, जो 2025-26 सीजन में 27 प्रतिशत घटकर लगभग 2.81 करोड़ टन रह गया। दूसरी ओर, उद्योग के अनुमानों के मुताबिक पिछले पांच सीजन में चीनी की खपत 2.73 करोड़ टन से मामूली रूप से बढ़कर 2.87 करोड़ टन हो गई है।
चीनी की कीमतों में आई तेजी से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने 10 लाख टन कच्ची चीनी के आायत को मंजूरी दी थी। वहीं, जमाखोरी रोकने के लिए एक अभियान भई लॉन्च किया और बड़े उद्योगों के लिए चीनी के लिए भंडारण सीमा लागू कर दी।
खुदर भाव में 20 प्रतिशत तेजी, नरमी भी दिखी
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, बुधवार को चीनी का औसत खुदरा भआव 56.02 रुपये प्रति किलो रहा, जो पिछली सीजन के मुकाबले 20 प्रतिशथ ज्यादा है। दूसरी ओर बीते महीने की तुलना में खुदरा रेट में 12 प्रतिशत की नरमी देखने को मिली है।
सरकार के अनुसार, चीनी की कीमतों में आए तेज उछाल के कई कारण हैं। इनमें खराब मौसम के कारण घरेलू उत्पादन में कमी, त्योहारी सीजन से पहले मांग में वृद्धि, वैश्विक स्तर पर ऊंची कीमतें और कुछ उत्पादकों द्वारा की गई जमाखोरी शामिल हैं। वहीं, चीनी उद्योग का कहना है कि दामों में यह उछाल व्यापारियों की सट्टेबाजी और उत्पादन कम होने के कारण आया है। हालांकि, उद्योग ने स्पष्ट किया है कि देश में चीनी की कोई कमी नहीं है।
खबरों के अनुसार, प्रमुख गन्ना उत्पादक राज्यों में कम बारिश-लाल सड़न रोग के प्रकोप जैसी समस्याओं को देखते हुए इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ने चीनी उत्पादन अनुमान को 3.45 करोड़ टन से घटाकर 3.09 करोड़ टन कर दिया है।
इथेनॉल को लेकर सरकार ने स्थिति की साफ
सरकार ने चीनी की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी के लिए इथेनॉल उत्पादन को जिम्मेदार मानने से साफ इनकार किया है। एक सरकारी नोट के अनुसार, इथेनॉल बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाली चीनी का हिस्सा 2022-23 के लगभग 12 प्रतिशत से घटकर 2025-26 में लगभग 9 प्रतिशत रह गया है। इसके अलावा, देश में तैयार होने वाले कुल इथेनॉल का लगभग तीन-चौथाई हिस्सा अब मक्का जैसे अनाजों से आ रहा है।