हरियाणा में पराली प्रबंधन का काम 200 करोड़ रुपये का कारोबार बन चुका है। इस तरह पर्यावरण और मिट्टी की सेहत को सहारा मिलने के साथ रोजगार के नए अवसर पैदा हो रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश में इस समय लगभग 200 लोग पराली एक जगह जुटाने में लगे हुए हैं। वहीं, ट्रैक्टर-ट्रॉली और बेलर मशीनों से जुड़े करीब 1000 लोग, ट्रांसपोर्टर और हजारों मजदूर इस कारोबार से रोजी-रोटी कमा रहे हैं।
बायोफ्यूल और चारे के रूप में पराली की भारी मांग
सिरसा के रहने वाले एग्रीगेटर कृष्ण बताते हैं कि खेतों में पराली की 25 किलो की गांठें बनाकर उन्हें गैस, बिजली और बायोफ्यूल बनाने वाले प्लांट तक पहुंचाया जा रहा है। इन प्लांट्स में पराली 180 रुपये प्रति क्विंटल के भाव से बिक रही है।
वहीं, रोहतक के संदीप के मुताबिक, सर्दियों के मौसम में पराली का सबसे ज्यादा इस्तेमाल पशुओं के चारे के रूप में होता है। चारे के रूप में इसकी कीमत 350 से 400 रुपये प्रति क्विंटल तक मिल रही है। हरियाणा के मेवात व गुरुग्राम के साथ-साथ दिल्ली, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के बिजनौर तक इसकी भारी मांग है। इन क्षेत्रों की गोशालाओं में पराली भेजी जा रही है। चारे से जुड़े इस काम में ही करीब 800 लोग मशीनों और ट्रैक्टर-ट्रॉली के साथ काम कर रहे हैं।
किसानों के बचे पैसे, मुफ्त में खाली हो रहे खेत
पराली की इस बढ़ती मांग का सीधा फायदा आम किसानों को हो रहा है। कुरुक्षेत्र के बजगामा गांव के किसान अमीर सिंह ने बताया कि पिछले साल तक अगली फसल बोने के लिए खेत जल्दी खाली कराने के एवज में गांठ बनाने वाली मशीन के संचालक 500 रुपये प्रति एकड़ का शुल्क लेते थे। लेकिन अब पराली की मांग इतनी बढ़ गई है कि यह काम बिना किसी शुल्क के बिल्कुल मुफ्त किया जा रहा है।
कृषि विभाग के सेवानिवृत्त अभियंता (इंजीनियर) महेंद्र शर्मा का कहना है कि पहले पराली को ठिकाने लगाना किसानों के लिए बहुत मेहनत और खर्चीला काम था, लेकिन अब गैस, बिजली संयंत्रों और पड़ोसी राज्यों में चारे की मांग ने इसे भविष्य का सुनहरा सोना बना दिया है।
यमुनानगर में पराली जलाने पर हुई कार्रवाई
जहां एक तरफ पराली आय का साधन बन रही है, वहीं इसे जलाने के मामले भी सामने आ रहे हैं। यमुनानगर जिले में इस सीजन का पराली जलाने का पहला मामला दर्ज किया गया है। थाना छप्पर क्षेत्र के मंधार गांव में खेत में पराली जलाने के आरोप में पुलिस ने तीन सगे भाइयों— हरजीत सिंह, ओंकार सिंह और अवतार सिंह के खिलाफ एफआईआर (प्राथमिकी) दर्ज की है।