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Himachal: एक लाख टन से सीधे 10 हजार टन पर आई MIS के तहत सेब खरीद, कम उत्पादन और ऑनलाइन प्रणाली जिम्मेदार?

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Devesh Saraswat Updated Thu, 01 Oct 2026 03:13 PM IST
सार

  • हिमाचल में MIS के तहत C ग्रेड सेब की खरीद में एक दशक की सबसे बड़ी गिरावट 
  • इस साल खरीद प्रणाली हुई डिजिटल, पिछले साल एक लाख मीट्रिक टन की हुई रिकॉर्ड खरीद
  • इस बार आंकड़ा 10 हजार टन पर सिमटा, प्रदेश में तुड़ाई का सीजन खत्म
  • कम उत्पादन और किसानों का खुले बाजार की ओर रुख भी इस गिरावट के कारण बताए जा रहे हैं

हिमाचल में सेब की खरीद एक दशक के निचले स्तर पर।
हिमाचल में सेब की खरीद एक दशक के निचले स्तर पर। - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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हिमाचल में इस सीजन मार्केट इंटरवेंशन स्कीम के तहत C ग्रेड के सेबों की खरीद में भारी गिरावट देखने को मिली है। आंकड़ों के अनुसार, बीते साल करीब 1 लाख मीट्रिक सेबों की रिकॉर्ड खरीद हुई थी, जबकि अब तक मात्र 10 हजार मीट्रिक टन सेब की खरीद हुई है। जानकारी के अनुसार, इस खरीद के आंकड़े में कोई बड़े उछाल की उम्मीद नहीं है, क्योंकि प्रदेश में तुड़ाई का सीजन खत्म हो चुका है। बीते 10 सालों में  MIS योजना के तहत प्रदेश में हुई यह सबसे कम सेब की खरीद है।

सेब उत्पादन लुढ़का, किसानों ने चुना खुला बाजार 
सेब की खरीद में आई इस बड़ी गिरावट के पीछे उत्पादन में गिरावट और किसानों का खुले बाजार की ओर रुख, प्रमुख कारण बताए जा रहे हैं। सरकारी आंकड़ो ंके अनुसार, बीते सीजन में प्रदेश में लगभग 3.5 करोड़ सेब की पेटियों का उत्पादन हुआ था, जो इस बार 2 करोड़ पेटियों के अनुमान से पीछे रह सकता है।  ध्यान रहे कि यह कुल सेब उत्पादन के आंकड़े हैं। MIS के तहत छोटे सी ग्रेड के सेबों की खरीद होती है। 

सेब किसानों की मानें तो इस बार कई बागवानों ने MIS के बजाय बाजार में सेब बेचना सही समझा। उन्होंने इसके पीछे बाजार भाव में स्थिरता का हवाला दिया।

बागवानों के पंजीकरण में बड़ी गिरावट 
सेबों की खरीद करने वाले हिमाचल प्रदेश हॉर्टिकल्चरल प्रोड्यूस मार्केटिंग एंड प्रोसेसिंग कॉर्पोरेशन और हिमफेड के आंकड़े बताते हैं कि इस बार MIS के तहत सेब बेचने के लिए 18 हजार किसानों का पंजीकरण कराया था, जबकि पिछले साल यह आंकड़े 45 हजार था। 
पंजीकरण में आई इस गिरावट के पीछे इसी सीजन से लागू हुई ऑनलाइन खरीद प्रणाली को भी जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। बते दें कि पिछले साल तक पंजीकरण आदि की पूरी प्रक्रिया कागजों तक सीमित थी। हालांकि इस व्यवस्था में खरीद के आंकड़ों की सच्चाई पर सवाल उठते थे। बीते साल हुई रिकॉर्ड एक लाख मीट्रिक सेबों की खरीद से इन सवालों को और हवा मिली थी।

अधिकारियों का कहना है कि ऑनलाइन सिस्टम लागू होने से खरीद में किसी धांधली की संभावना बहुत कम हो गई है। आगामी एक-दो सीजन के बाद नई व्यवस्था के असली असर का बेहतर आकल हो पाएगा।


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