अक्तूबर महीने के आगमन के साथ आधिकारिक नजरिए से मानसून सीजन समाप्त हो चुका है। एक दशक से भी अधिक का इतिहास पर नजर डालें, तो 2026 का यह सीजन सबसे कमजोर साबित हुआ है। पूरे सीजन में मात्र 759 मिलीमीटर मिलीमीटर बारिश हुई, जबकि औसत मानक 868 मिलीमीटर है।
साल 2015 के बाद की सबसे बड़ी कमी
IMD के आंकड़े बताते हैं कि एक जून से 30 सितंबर तक हुई कुल बारिश लबी अवधि के औसत से 12.6 प्रतिशत कम रही है। इसी वजह से IMD ने मानसून 2026 को बारिश की कमी वाली श्रेणी में रखा है। इतिहास देखे तो साल 2015 में मानसून की सबसे बड़ी कमी देखने को मिली थी, इस दौरान बारिश की कमी का आंकड़ा 12.7 प्रतिशत था। इससे पहले 2002 में 20.9 प्रतिशत, 2009 में 18.3 प्रतिशत, 2015 में 12.7 प्रतिशत और 2014 में 10.15 प्रतिशत बारिश की कमी दर्ज की गई थी।
जानकारी के अनुसार, देश में सालाना होने वाली कुल बारिश का 70 प्रतिशत से अधिक हिस्सा मानसून से आता है। इस समय मानसून की वापसी का दौर जारी है, जिसके समापन में लगभग दो हफ्ते का समय लगेगा।
उत्तर-पूर्व भारत में सबसे ज्यादा बारिश की कमी
देश के अलग-अलग क्षेत्रों की बात करें, तो मध्य भारत में सामान्य श्रेणी में बारिश दर्ज की गई है। इसके उलट, उत्तर-पश्चिम भारत में सामान्य से 5.8% कम, पूर्व और उत्तर-पूर्व भारत में 25.6% कम और दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत में सामान्य से 24.4% कम बारिश रिकॉर्ड की गई।
IMD ने बताया कि देश के कुल 36 मौसम उप-मंडलों में से 18 उप-मंडलों (कुल क्षेत्रफल का 53%) में सामान्य बारिश हुई, जबकि 17 उप-मंडलों (कुल क्षेत्रफल का 42%) में कम बारिश दर्ज की गई। अगर महीनों के हिसाब से देखें, तो जून की शुरुआत बहुत कमजोर रही और इस महीने में सामान्य से 36% कम बारिश हुई। इसके बाद जुलाई में मानसून थोड़ा मजबूत हुआ और सामान्य से 1% अधिक बारिश दर्ज की गई। लेकिन अगस्त में फिर से 14% और सितंबर में 8% की कमी दर्ज की गई।
अल नीनो का प्रभाव और आगामी मौसम का अनुमान
IMD के महानिदेशक मृत्युंजय महापात्र ने एक ब्रीफिंग में बताया कि इस साल अल नीनो के प्रभाव के बावजूद, मानसून सीजन के दौरान कम दबाव के क्षेत्र (लो प्रेशर सिस्टम) वाले कुल 77 दिन रहे, जो कि सामान्य औसत 57 दिनों से अधिक है।
IMD ने आगामी उत्तर-पूर्वी मानसून (अक्टूबर से दिसंबर) के लिए राहत की बात कही है। विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, उत्तर-पूर्वी मानसून के सामान्य रहने की उम्मीद है, जो कि मानक का 88% से 112% के बीच हो सकता है। इससे पहले मई के महीने में मौसम विभाग ने जून-सितंबर की बारिश के अपने अनुमान को घटाकर 90% कर दिया था, जिसे अप्रैल के पूर्वानुमान में 92% रहने का अनुमान लगाया गया था।
IMD के अनुसार, 96% से 104% के बीच की बारिश को सामान्य माना जाता है। वहीं 90% से 95% के बीच की बारिश 'सामान्य से कम', 90% से कम की बारिश को कमी और 105% से 110% के बीच की बारिश को सामान्य से अधिक श्रेणी में रखा जाता है।