अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्ची चीनी की कीमतों में लगातार तेजी देखने को मिल रही है। ICE मार्च 2027 शुगर फ्यूचर 2 अक्टूबर को 19.93 सेंट प्रति पाउंड पर बंद हुआ। पिछले कारोबारी सत्र के मुकाबले इसमें 0.99 सेंट यानी 5.23 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। इससे पहले 1 अक्टूबर को भी कीमत 7.43 फीसदी चढ़ी थी।
25 सितंबर को 17.50 सेंट प्रति पाउंड के स्तर से देखें तो चीनी की कीमत करीब 13.9 फीसदी बढ़ चुकी है। 2 अक्टूबर को कारोबार के दौरान कीमत 19.96 सेंट तक पहुंची, जो पिछले 52 हफ्तों का सबसे ऊंचा स्तर है।
दुनिया में चीनी की कमी का अनुमान
चीनी की कीमतों में तेजी की एक बड़ी वजह आने वाले समय में वैश्विक आपूर्ति कम होने की आशंका है। हालांकि, बाजार में कीमतें अभी पक्के उत्पादन आंकड़ों से कुछ आगे निकल गई हैं। MIER Commodities के प्रबंध निदेशक राहिल शेख के अनुसार, मौसम से जुड़ी चिंताओं ने चीनी की कीमतों को सहारा दिया है। लेकिन अभी यह देखना जरूरी है कि उत्पादन में वास्तविक नुकसान कितना होता है।
अंतरराष्ट्रीय चीनी संगठन (ISO) ने 2026-27 के लिए शुरुआती अनुमान में करीब 2 लाख टन वैश्विक चीनी घाटे की संभावना जताई है। संगठन ने यह भी कहा है कि उत्पादन में और गिरावट आने पर यह कमी काफी बढ़ सकती है।
ब्राजील में बारिश से गन्ने की कटाई प्रभावित
दुनिया के बड़े चीनी उत्पादक ब्राजील में लगातार बारिश ने गन्ने की कटाई और मिलों में पेराई को प्रभावित किया है। इससे गन्ने से चीनी की रिकवरी और कुल उत्पादन पर असर पड़ने की आशंका है। ब्राजील के मध्य-दक्षिण क्षेत्र में सितंबर के पहले पखवाड़े में चीनी उत्पादन पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 41.6 फीसदी घटकर 21.2 लाख टन रह गया। इस दौरान गन्ने की पेराई भी 34.2 फीसदी घटकर 3.016 करोड़ टन रही।
2026-27 सीजन में 15 सितंबर तक ब्राजील का कुल चीनी उत्पादन 14.4 फीसदी घटकर 2.607 करोड़ टन रहा। वहीं गन्ने की कुल पेराई 1.5 फीसदी घटकर 44.371 करोड़ टन रही। ब्राजील में मौजूदा गन्ना पेराई सीजन 1 अप्रैल से शुरू हुआ था।
लगातार बारिश से गन्ने में चीनी की मात्रा भी कम हो रही है और मिलों का काम प्रभावित हो रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, डेटाग्रो का अनुमान है कि बारिश के कारण ब्राजील के मध्य-दक्षिण क्षेत्र में 3.5 करोड़ टन से अधिक गन्ना खेतों में बिना कटे रह सकता है। ऐसे में इसका कुछ हिस्सा अगले सीजन में जा सकता है।
भारत में भी गन्ने की उपज पर नजर
भारत में कमजोर मानसून ने अगले चीनी उत्पादन सीजन को लेकर चिंता बढ़ाई है। कम बारिश से गन्ने की उपज और चीनी रिकवरी प्रभावित हो सकती है। इसका वास्तविक असर अक्टूबर-नवंबर में पेराई शुरू होने के बाद ज्यादा साफ होगा।
देश के प्रमुख गन्ना उत्पादक राज्य महाराष्ट्र में भी चीनी उत्पादन घटने का अनुमान है। वेस्ट इंडिया शुगर मिल्स एसोसिएशन (WISMA) के अनुसार, 2026-27 में महाराष्ट्र का चीनी उत्पादन करीब 20 फीसदी घटकर 80 लाख टन रह सकता है। पिछले सीजन में यह करीब 99 लाख टन था।
WISMA के अध्यक्ष बीबी थोंबरे के मुताबिक, कम बारिश, गन्ने की कम उपज और चीनी रिकवरी में गिरावट इसका प्रमुख कारण हो सकते हैं। उन्होंने इस सीजन में प्रति एकड़ गन्ने की उपज 30-40 फीसदी तक घटने की आशंका भी जताई है।
एक सर्वे में 11 कारोबारियों, विश्लेषकों और मिल मालिकों ने भारत का 2026-27 का चीनी उत्पादन 2.9 से 3.1 करोड़ टन रहने का अनुमान लगाया है। वहीं इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ISMA) ने मौजूदा सीजन के लिए करीब 3.1 करोड़ टन उत्पादन का अनुमान दिया है। ISMA को अक्टूबर के दूसरे या तीसरे सप्ताह तक फसल की तस्वीर ज्यादा साफ होने की उम्मीद है।
थाईलैंड की फसल भी अहम
वैश्विक चीनी बाजार के लिए थाईलैंड भी महत्वपूर्ण है। हाल में वहां बारिश से फसल की स्थिति में कुछ सुधार हुआ है। हालांकि, आने वाले दिनों में वहां का वास्तविक उत्पादन भी कीमतों की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगा।
विशेषज्ञों के मुताबिक, चीनी की कीमतों में तेजी आगे भी जारी रहने के लिए ब्राजील का उत्पादन और गिरना, भारत में गन्ने की उपज व रिकवरी का उम्मीद से कमजोर रहना और थाईलैंड का उत्पादन अनुमान से कम होना जरूरी होगा। राहिल शेख के अनुसार, “अब कीमतों में अगली बड़ी तेजी के लिए उत्पादन के आंकड़ों में इसका असर दिखना जरूरी है।”
उत्पादन आंकड़े तय करेंगे बाजार की अगली दिशा
अगर ब्राजील में गन्ने की पेराई तेजी से सुधरती है, भारत का उत्पादन उम्मीद से बेहतर रहता है या थाईलैंड में अच्छी फसल होती है तो चीनी की कीमतों में गिरावट आ सकती है। इसी तरह, अगर निवेशक अपनी सट्टेबाजी वाली पोजिशन बेचते हैं और वास्तविक आपूर्ति में कमी नहीं आती है, तो भी कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि चीनी बाजार अब अधिशेष की कहानी से निकलकर मौसम के जोखिम पर कारोबार कर रहा है। यानी आगे कीमतों की दिशा इस बात पर निर्भर करेगी कि मौसम से फसल को वास्तव में कितना नुकसान हुआ है।
तेजी से कारोबारियों पर भी बढ़ा दबाव
चीनी के वायदा बाजार में अचानक आई तेजी ने उन कारोबारियों पर भी दबाव बढ़ाया है, जिन्होंने कीमतों में गिरावट की उम्मीद में शॉर्ट हेजिंग की थी। बड़ी कंपनियां बैंकिंग सुविधाओं और मजबूत वित्तीय स्थिति के जरिए बढ़ी मार्जिन जरूरतों को संभाल सकती हैं, लेकिन छोटे कारोबारियों के लिए तुरंत नकदी जुटाना मुश्किल हो सकता है।
वायदा कारोबार में मार्जिन की रकम तुरंत जमा करनी पड़ती है, जबकि वास्तविक चीनी की बिक्री से पैसा बाद में मिलता है। इससे कारोबारियों पर नकदी का दबाव बढ़ रहा है। राहिल शेख के मुताबिक, जब बाजार बहुत तेजी से 100-200 अंक ऊपर-नीचे होता है तो कारोबार में केवल बाजार की समझ ही नहीं, बल्कि मजबूत वित्तीय क्षमता भी उतनी ही महत्वपूर्ण हो जाती है।
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