रबी फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में बढ़ोतरी को लेकर संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) ने सरकार पर निशाना साधा है। SKM ने 2027-28 विपणन सीजन के लिए गेहूं के MSP में 25 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी को नाकाफी बताते हुए इसे खाद्यान्न किसानों का अपमान करार दिया है। संगठन ने कहा कि वह सरकार की ओर से घोषित नए MSP को स्वीकार नहीं करता।
SKM ने किसानों और ग्रामीण युवाओं से अपील की है कि वे हर गांव में सरकार के नए MSP आदेश की प्रतियां जलाकर विरोध दर्ज कराएं। संगठन ने कहा कि गेहूं का MSP 25 रुपये बढ़ने का मतलब किसानों को सिर्फ 25 पैसे प्रति किलो की अतिरिक्त कीमत मिलना है।
MSP पर लागत को लेकर उठाए सवाल
SKM ने सरकार के उस दावे पर भी सवाल उठाया है, जिसमें नए MSP को उत्पादन लागत पर 106 फीसदी रिटर्न देने वाला बताया गया है। संगठन के अनुसार, MSP तय करने में A2+FL लागत को आधार बनाया गया है।
A2 में किसान की ओर से बीज, खाद, कीटनाशक, सिंचाई और दूसरे खर्च शामिल होते हैं, जबकि FL में परिवार के सदस्यों की खेती में लगी मेहनत का अनुमानित मूल्य शामिल किया जाता है। SKM का कहना है कि इसमें किसान की अपनी जमीन का किराया और अपनी पूंजी पर ब्याज जैसी लागत शामिल नहीं होती।
संगठन की मांग है कि MSP तय करने के लिए C2 लागत को आधार बनाया जाए। SKM के मुताबिक, CACP के आंकड़ों के आधार पर भी गेहूं पर वास्तविक मार्जिन 106 फीसदी के बजाय करीब 43 फीसदी बैठता है।
C2+50% के हिसाब से 3,418 रुपये MSP की मांग
केंद्र सरकार ने 30 सितंबर को 2027-28 के विपणन सीजन के लिए छह रबी फसलों के MSP को मंजूरी दी थी। इसमें गेहूं का MSP 25 रुपये बढ़ाकर 2,610 रुपये प्रति क्विंटल किया गया है। SKM के अनुसार, उसके हिसाब से गेहूं की C2 लागत 2,279 रुपये प्रति क्विंटल है। इस आधार पर C2+50 फीसदी के अनुसार MSP 3,418 रुपये प्रति क्विंटल होना चाहिए। संगठन का कहना है कि सरकार का तय MSP 2,610 रुपये इस गणना से 134 रुपये कम है।
राज्यों की सिफारिशों को नजरअंदाज करने का आरोप
SKM ने कहा कि कृषि राज्य का विषय है और राज्यों की ओर से सुझाए गए MSP को केंद्र और कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (CACP) ने पर्याप्त महत्व नहीं दिया। संगठन के मुताबिक, पिछले सीजन में महाराष्ट्र ने गेहूं के लिए 4,525 रुपये, गुजरात ने 4,200 रुपये, पश्चिम बंगाल ने 3,450 रुपये और पंजाब ने 3,168 रुपये प्रति क्विंटल MSP की सिफारिश की थी। हरियाणा की सिफारिश भी 2,652 रुपये प्रति क्विंटल थी, जो केंद्र की ओर से तय MSP से ज्यादा है।
डीजल और मजदूरी की बढ़ती लागत का मुद्दा
SKM ने फसल उत्पादन की लागत तय करने के तरीके पर भी सवाल उठाया। संगठन का दावा है कि CACP की गणना में 2011-12 के इंडेक्स का इस्तेमाल किया जा रहा है और किसानों के श्रम का मूल्य सामान्य मजदूरी के आधार पर आंका जाता है।
SKM के मुताबिक, मई में 10 दिनों के भीतर डीजल की कीमत करीब 7.50 रुपये प्रति लीटर बढ़ी। इससे ट्रैक्टर और सिंचाई पंपों का खर्च बढ़ा। संगठन का कहना है कि मजदूरी में ही करीब 2.5 फीसदी की बढ़ोतरी हुई, जबकि सरकार ने अन्य सभी लागतों के लिए केवल 2 फीसदी की बढ़ोतरी मानी।
'खरीद नहीं तो MSP सिर्फ कागज पर'
SKM ने सरकारी खरीद की व्यवस्था पर भी सवाल उठाया। संगठन का दावा है कि 2025-26 सीजन में गेहूं की कुल फसल का करीब एक चौथाई हिस्सा ही सरकारी खरीद में आया। संगठन ने कहा कि अगर MSP पर सरकारी खरीद नहीं होती है तो MSP सिर्फ कागज पर रह जाता है। SKM ने सभी राज्यों में हर फसल की सरकारी खरीद सुनिश्चित करने की मांग की है।
कानूनी गारंटी की मांग
SKM ने MSP के लिए C2+50 फीसदी की कानूनी गारंटी देने की मांग दोहराई है। संगठन ने उत्पादन लागत की निष्पक्ष गणना, MSP में तत्काल संशोधन, राज्यों की सिफारिशों को महत्व देने और राज्यों को किसानों को बोनस देने की पूरी स्वतंत्रता देने की मांग की है। इसके अलावा संगठन ने डीजल की बढ़ी कीमतें वापस लेने और हर राज्य में हर फसल की सरकारी खरीद सुनिश्चित करने की मांग रखी है।
SKM ने 9 दिसंबर 2021 को सरकार की ओर से MSP को लेकर दिए गए लिखित आश्वासन का भी जिक्र किया। संगठन ने कहा कि करीब पांच साल बाद सरकार की ओर से मिला जवाब गेहूं MSP में सिर्फ 25 पैसे प्रति किलो की बढ़ोतरी के रूप में सामने आया है।
SKM ने अपने घटक संगठनों और ग्रामीण युवाओं से नए MSP आदेश को गांवों में पढ़कर सुनाने, उसकी प्रतियां जलाने और जिला मुख्यालयों पर होने वाले विरोध प्रदर्शनों में शामिल होने की अपील की है। संगठन ने कहा कि MSP की C2+50 फीसदी पर कानूनी गारंटी मिलने तक आंदोलन जारी रहेगा।
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