आवेदन की नई ऑनलाइन प्रक्रिया और तय की गई फीस
नई व्यवस्था के तहत उपखंड अधिकारी को अधिकृत अधिकारी बनाया गया है। अब जमीन के उपयोग से जुड़े बदलावों के आवेदन एक ऑनलाइन पोर्टल पर जमा कराने होंगे। आवेदन पूरा होने के बाद अनुमति का आदेश अपने आप जारी हो जाएगा। इसके लिए जमीन के आवसीय उपयोग में लाने के लिए दो हजार और दूसरे सभी उपयोगों के लिए 20 हजार रुपये का शुल्क तय किया गया है।
कन्वर्जन प्रीमियम की दरें और सरकार से मिलने वाली छूट
बदलाव के लिए प्रीमियम को खासतौर से जमीन की सरकारी दर (DLC) से जोड़ गया है। इसके तहत आवासीय, सार्वजनिक उपयोग और औद्योगिक कार्यों के लिए प्रीमियम दर 5 प्रतिशत तय की गई है। वहीं, कमर्शियल, संस्थागत, चिकित्सा और आवासीय प्रोजेक्ट्स के लिए यह 10 प्रतिशत रखी गई है। इसके अलावा, फूड-प्रोसेसिंग इकाइयों के लिए 2.5 प्रतिशत और नवीकरणीय ऊर्जा प्रोजेक्ट्स के लिए 0.5 प्रतिशत प्रीमियम देना होगा।
इन कामों के लिए नहीं देना होगा प्रीमियम
हालांकि खेती-बाड़ी की जमीन में पर्यटन इकाइयों, स्टेडियम, खेल के मैदानों, स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स और कुछ सरकारी या स्थानीय निकाय के प्रोजेक्ट्स को प्रीमियम के भुगतान में 100 प्रतिशत की छूट मिलेगी। हालांकि, होटल, रिसॉर्ट और अन्य कमर्शियल इकाइयों को डीएलसी दर का 10 प्रतिशत प्रीमियम चुकाना होगा। अनुसूचित जाति एवं जनजाति से आने वाले किसानों को जमीन पर लगने वाले नवीकरणीय ऊर्जा प्रोजेक्ट, कुछ खास ग्रीन और वाइट श्रेणी के उद्योगों समेत आईटी पार्कों को भी नियमों के तहत छूट दी जाएगी।
भूमि उपयोग के नए नियम और कुछ जमीनों पर पाबंदी
नए नियमों में जमीन के इस्तेमाल के लिए भी साफ दिशा-निर्देश तय किए गए हैं। सरकार के अनुसार, नई आवासीय कॉलोनियों में 40 प्रतिशत जमीन सड़कों और सार्वजनिक सुविधाओं के लिए आरक्षित करनी होगी, जबकि अधिकतम 5 प्रतिशत जमीन का उपयोग कमर्शियल और संस्थागत कार्यों के लिए किया जा सकेगा। इसी तरह, औद्योगिक क्षेत्रों में 70 प्रतिशत जमीन उद्योग लगाने के लिए और 30 प्रतिशत हिस्सा बुनियादी ढांचे, खुली जगहों और दूसरी सहायक सुविधाओं के लिए छोड़ना अनिवार्य होगा।
प्रदेश सरकार के अनुसार, कुछ खास श्रेणियों की जमीनों के उपयोग में बदलाव पर पाबंदी बरकरार रखी गई है। इनमें अधिग्रहण के दायरे में आने वाली जमीन, संरक्षित और इको-सेंसिटिव जोन, जल स्रोत और कैचमेंट एरिया, हेरिटेज कानूनों से जुड़ी जमीन, तय किए गए सड़क व रेलवे कॉरिडोर और रक्षा, पेट्रोलियम तथा अन्य संवेदनशील प्रतिष्ठानों के आसपास की जमीन शामिल है।