पराली जलाने के मामलों को काबू करने में उत्तर प्रदेश ने अच्छा प्रदर्शन किया है। भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के आंकड़े बताते हैं कि उत्तर भारत के सात राज्यों में यूपी के अंदर पराली जलाने की घटनाओं में 65 प्रतिशत से ज्यादा की भारी गिरावट दर्ज की गई है।
यूपी और हरियाणा में सबसे ज्यादा सुधार
15 सितंबर से 3 नवंबर के बीच सैटेलाइट से लिए गए आंकड़ों के मुताबिक, यूपी में साल 2025 में पराली जलाने के 1,042 मामले सामने आए थे, जो इस साल घटकर मात्र 359 रह गए हैं। हरियाणा में भी 64 प्रतिशत से ज्यादा की कमी आई है; वहां मामले 145 से घटकर 52 हो गए हैं। वहीं, उत्तराखंड में भी यह आंकड़ा 390 से गिरकर 178 पर आ गया है। वहीं, पंजाब में मामले 2,518 से घटकर 2,196 हुए हैं।
एमपी और राजस्थान में बढ़े पराली के मामले
मध्य प्रदेश की बात करें तो सुधार के उलट यहां पराली जलाने के मामले 24 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ गए हैं। एमपी के मामले 570 से बढ़कर 708 हो गए हैं। इसी तरह, राजस्थान में भी लगभग 8 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखी गई है, जहां आंकड़े 778 से बढ़कर 838 तक पहुंच गए हैं। दिल्ली में इस पूरी अवधि के दौरान केवल 2 मामले दर्ज किए गए। कुल मिलाकर, इन सात राज्यों में 15 सितंबर से 3 नवंबर के बीच पराली जलाने की कुल 4,333 घटनाएं उपग्रह द्वारा दर्ज की गई हैं।
3 नवंबर का हाल, आधे से ज्यादा मामले अकेले पंजाब में
आंकड़ों के अनुसार, सिर्फ 3 नवंबर के दिन पंजाब में पराली जलाने के सबसे ज्यादा 584 मामले देखे गए। इसी दिन राजस्थान में 100, मध्य प्रदेश में 94, यूपी में 10, हरियाणा में 8 और उत्तराखंड में 2 मामले सामने आए।
सात में से पांच राज्यों में पराली जलाने के मामलों में कुल मिलाकर कमी आई है, लेकिन इसके बावजूद दिल्ली-एनसीआर की हवा फिर से खराब हो गई है और दिल्ली का एक्यूआई 324 तक पहुंच गया है।