कम मानसूनी बारिश से खरीफ फसलों का उत्पादन घटने की आशंका, लेकिन कम आवक से मंडियों में बढ़े दाम।
सोयाबीन करीब 7,000 रुपये प्रति क्विंटल पर पहुंचा, पिछले साल के मुकाबले 55 प्रतिशत महंगा।
भरतपुर मंडी में सरसों 7,200 रुपये प्रति क्विंटल से ऊपर बिक रही है, जो घोषित एमएसपी से करीब 10 प्रतिशत अधिक है।
अरहर का भाव 10,500 रुपये और चने का भाव 7,400 रुपये प्रति क्विंटल के आसपास पहुंचा।
दिल्ली में गेहूं का भाव पिछले साल से 5 प्रतिशत बढ़कर 2,850 रुपये प्रति क्विंटल हुआ।
कम मानसूनी बारिश की वजह से इस साल खरीफ फसलों की उपज कम होने की संभावना है, दूसरी तरफ रबी फसलों की बुवाई भी काफी सुस्त चल रही है। लेकिन, बाजार में कम आवक के चलते मंडियों में फसलों के भाव में उछाल देखने को मिला है। बाजार में यह तेजी किसानों को उपज का अच्छा भाव दे रही है।
जानकारों का कहना है कि धान, दलहन, तिलहन जैसी खरीफ फसलों बीते सीजन के मुकाबले एमएसपी से ऊपर बिक रही हैं। इन ऊंची कीमतों से किसान आय में सुधार की उम्मीद है। दूसरी तरफ कम बारिश के कारण उपज में गिरावट झेलने वाले किसानों के लिए यह तेजी कुछ भरपाई कर सकती है। इसी मुनाफे को देखते हुए किसान अगले सीजन में बुवाई का रकबा बढ़ा सकते हैं।
सोयाबीन और सरसों के दामों में शानदार उछाल
प्रमुख खरीफ तिलहन फसल सोयाबीन का बाजार भाव इस समय लगभग 7,000 रुपये प्रति क्विंटल चल रहा है। यह पिछले साल के मुकाबले 55 प्रतिशत अधिक है, जबकि इस सीजन के लिए सरकार ने इसका एमएसपी 5,708 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है। सोपा के कार्यकारी निदेशक डी. एन. पाठक ने बताया कि इस सीजन में मिल रहे अच्छे दामों से उत्साहित होकर किसान अगले सीजन में तिलहन की खेती का रकबा बढ़ाएंगे, क्योंकि पिछले कुछ सालों से किसानों को अपनी फसल का सही दाम नहीं मिल पा रहा था। सोपा के पहले अनुमान के मुताबिक, खरीफ 2026 में देश का सोयाबीन उत्पादन पिछले साल से 2.1 प्रतिशत गिरकर 10.79 मिलियन टन रह सकता है।
राजस्थान की प्रमुख मंडी भरतपुर में किसान अपनी पिछले सीजन की सरसों को 7,200 रुपये प्रति क्विंटल से अधिक पर बेच रहे हैं। यह अगले मार्केटिंग सीजन के लिए घोषित 6,613 रुपये प्रति क्विंटल के एमएसपी से 10 प्रतिशत ज्यादा है। इसके अलावा, सरकार ने 2026-27 मार्केटिंग सीजन के लिए भी सरसों का एमएसपी 6,200 रुपये प्रति क्विंटल घोषित किया है और अभी खेतों में बुवाई चल रही है। भरतपुर के एक व्यापारी का कहना है कि भारी मांग और वैश्विक कीमतों में उछाल के कारण पिछले दो सालों से किसानों को सरसों के काफी अच्छे दाम मिल रहे हैं। बता दें कि भारत अपनी कुल खपत का लगभग 56 प्रतिशत खाद्य तेल आयात करता है, क्योंकि भू-राजनीतिक कारणों और बायोफ्यूल बनाने में खाद्य तेलों के इस्तेमाल के चलते कीमतें लगातार ऊंची बनी हुई हैं।
दलहन की कीमतों में भी भारी तेजी
व्यापारिक सूत्रों के अनुसार, दलहन की प्रमुख खरीफ फसल अरहर का मंडी भाव करीब 10,500 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गया है, जो पिछले साल से 50 प्रतिशत ज्यादा है। महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे प्रमुख उत्पादक राज्यों में बारिश की कमी से इसकी पैदावार पर बुरा असर पड़ा है। लातूर (महाराष्ट्र) की 'कलंत्री फूड प्रोडक्ट्स' के सीईओ नितिन कलंत्री ने बताया कि मंडियों में फसल की आवक अपने चरम पर है और आने वाले हफ्तों में भी किसानों को ऐसे ही ऊंचे दाम मिलते रहेंगे।
देश के कुल दलहन उत्पादन में 50 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाले चने का बाजार भाव भी इस समय 7,400 रुपये प्रति क्विंटल के आसपास है, जो पिछले साल से 14 प्रतिशत अधिक है। वहीं, राजस्थान के जयपुर बाजार में चने की कीमत एमएसपी से करीब 26 प्रतिशत ऊपर चल रही है। 'मयूर ग्लोबल कॉर्पोरेशन' की प्रमुख हर्षा राय के मुताबिक, चने का एमएसपी से ऊपर बिकना किसानों के लिए एक अच्छी खबर है। इससे उन्हें बढ़िया मुनाफा मिल रहा है और रबी सीजन में चने की बुवाई के लिए प्रोत्साहन भी मिलेगा। उन्होंने बताया कि इस साल कई इलाकों में नमी की कमी है, इसलिए कम पानी चाहने वाली चने की फसल किसानों को काफी आकर्षित कर रही है।
गेहूं का भाव और महंगाई पर विशेषज्ञों की राय
दिल्ली के बाजार में गेहूं का मौजूदा भाव 2,850 रुपये प्रति क्विंटल के आसपास है, जो पिछले साल से 5 प्रतिशत ज्यादा है। इसके बावजूद सरकार के पास 45 मिलियन टन से अधिक का भारी सरप्लस अनाज का स्टॉक मौजूद है।