पंजाब में पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है। राज्य सरकार के दावों के अनुसार, करोड़ों रुपये खर्च करके किसानों को पराली प्रबंधन की मशीनें दी गई हैं, जिससे खेत में आग लगाने के मामलों में भारी कमी आई है। दूसरी तरफ पराली जलाने की रोकथाम से जुड़े नियमों को सख्ती से लागू न करने के आरोप में पांच वरिष्ठ अधिकारियों को नोटिस भी थमाया गया है।
मशीनों पर 1,325 करोड़ का खर्च, मामलों में आई 90% की कमी
सरकार की तरफ से दी गई जानकारी के अनुसार, पंजाब सरकार ने पिछले चार सालों में फसल अवशेष प्रबंधन मशीनों पर 1,325.35 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। इस दौरान किसानों को कुल 94,456 मशीनें बांटी गई हैं। सरकार का दावा है कि इन प्रयासों से पराली जलाने के मामलों में लगभग 90 प्रतिशत की बड़ी गिरावट आई है। आंकड़ों के मुताबिक, जहां साल 2022 में पराली जलाने की 49,922 घटनाएं सामने आई थीं, वहीं 2025 में यह आंकड़ा घटकर मात्र 5,114 रह गया है।
इस साल मशीनों की खरीद में 73 प्रतिशत का उछाल
पंजाब के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां ने बुधवार को बताया कि 2026-27 के नए सीजन के लिए किसानों ने पहले ही 22,763 पराली प्रबंधन मशीनें खरीद ली हैं। इन मशीनों की खरीद पर सरकार की ओर से लगभग 201 करोड़ रुपये की सब्सिडी (छूट) दी गई है। कृषि मंत्री के अनुसार, यह आंकड़ा पिछले पूरे साल में दी गई 13,147 मशीनों के मुकाबले 73 प्रतिशत अधिक है।
निगरानी में कमी पर पांच अधिकारियों को नोटिस
एक तरफ सरकार मामलों में कमी का दावा कर रही है, वहीं दूसरी तरफ वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने पंजाब के पांच वरिष्ठ अधिकारियों को नया नोटिस जारी कर दिया है। यह कार्रवाई पराली जलाने से रोकने के उपायों को सख्ती से लागू करने में हुई लापरवाही के आरोप में की गई है।
आयोग द्वारा की गई जिलेवार समीक्षा में यह बात सामने आई है कि जमीनी स्तर पर खेतों की निगरानी करने और पराली जलाने की घटनाओं की प्रत्यक्ष (फिजिकल) जांच करने में काफी कमियां छोड़ी गई हैं।
10 नवंबर तक मांगा गया जवाब
आयोग ने 4 नवंबर को यह नोटिस बठिंडा, फरीदकोट, फाजिल्का और जालंधर के उपायुक्तों (डीसी) के साथ-साथ बरनाला के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) को जारी किया है। इन सभी अधिकारियों से 10 नवंबर तक इस मामले में स्पष्टीकरण (जवाब) देने को कहा गया है।