पंजाब में धान की कटाई के बाद पराली जलाने के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (PPCB) के आंकड़ों के मुताबिक, 15 सितंबर से 6 नवंबर 2026 तक राज्य में पराली जलाने की कुल 3,144 घटनाएं दर्ज की गई हैं। इनमें सबसे ज्यादा मामले तरनतारन, फिरोजपुर और संगरूर जिलों में सामने आए हैं।
5 और 6 नवंबर के बीच राज्य में पराली जलाने की 357 नई घटनाएं दर्ज की गईं। इससे पहले तक यह आंकड़ा 2,787 था, जो बढ़कर 3,144 हो गया।
तरनतारन में सबसे ज्यादा पराली जलाने के मामले
पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार, तरनतारन जिले में पराली जलाने की सबसे ज्यादा 611 घटनाएं दर्ज की गई हैं। इसके बाद फिरोजपुर में 410, संगरूर में 281, बठिंडा में 262 और अमृतसर में 231 मामले सामने आए हैं।
पराली जलाने के मामलों में किसानों पर कार्रवाई भी की गई है। अधिकारियों ने 1,077 मामलों में कुल 54.55 लाख रुपये का पर्यावरण मुआवजा लगाया है। इसमें से 30.05 लाख रुपये की वसूली की जा चुकी है।
795 FIR दर्ज, 931 किसानों की जमीन पर रेड एंट्री
पराली जलाने वाले किसानों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए 6 नवंबर तक कुल 795 FIR दर्ज की गई हैं। ये FIR भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 223 के तहत दर्ज हुई हैं। यह धारा किसी लोक सेवक की ओर से जारी आदेश का पालन नहीं करने से जुड़ी है।
इसके अलावा, पराली जलाने वाले किसानों की जमीन के राजस्व रिकॉर्ड में 931 रेड एंट्री की गई हैं। इनमें अकेले तरनतारन जिले में 301 और फिरोजपुर में 98 रेड एंट्री दर्ज की गईं। रेड एंट्री होने पर किसान अपनी कृषि भूमि को गिरवी रखकर बैंक से कर्ज नहीं ले सकते और न ही उस जमीन को बेच सकते हैं।
गेहूं की बुवाई के लिए कम समय मिलने से बढ़ती है पराली जलाने की समस्या
पंजाब और हरियाणा में पराली जलाने की घटनाओं को अक्सर दिल्ली-NCR में बढ़ते वायु प्रदूषण से जोड़कर देखा जाता है। धान की कटाई के बाद किसानों के पास रबी सीजन की गेहूं की फसल की बुवाई के लिए कम समय होता है। अक्टूबर और नवंबर में धान की कटाई के बाद खेत तैयार करने की जल्दी में कुछ किसान फसल अवशेषों को जला देते हैं, ताकि खेत जल्दी खाली हो सकें।
पिछले तीन साल में पराली जलाने के मामले
पंजाब में पिछले कुछ वर्षों के दौरान पराली जलाने की घटनाओं में उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2023 में राज्य में पराली जलाने की 36,663 घटनाएं दर्ज की गई थीं। वर्ष 2024 में यह संख्या घटकर 10,909 और 2025 के धान कटाई सीजन में 5,114 रह गई थी। वहीं, इस साल 6 नवंबर तक पराली जलाने के 3,144 मामले दर्ज किए जा चुके हैं।