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हरियाणा में जैविक खेती का बढ़ेगा रकबा : 5 फसलों का चयन करेगी सरकार, उत्पादन से सरकारी खरीद तक की रूपरेखा तैयार

गांव जंक्शन डेस्क, लखनऊ Published by: Devesh Saraswat Updated Sat, 07 Nov 2026 06:35 PM IST
सार

  • हरियाणा में प्राकृतिक और जैविक खेती का दायरा बढ़ाने की तैयारी।
  • सरकार कम से कम पांच संभावित फसलों की पहचान करेगी।
  • हल्दी, लाल मिर्च और अदरक की खेती पर जोर।
  • किसानों का जिलेवार आंकड़ा और खेती का रकबा जुटाया जाएगा।
  • फसल प्रमाणन, सरकारी खरीद और बाजार की व्यवस्था पर फोकस।

जैविक खेती को बढ़ावा देने की तैयारी में सरकार।
जैविक खेती को बढ़ावा देने की तैयारी में सरकार। - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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हरियाणा में किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए प्राकृतिक और जैविक खेती को बढ़ावा देने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं। इसके लिए राज्य सरकार ऐसी फसलों की पहचान करेगी, जिनकी खेती की संभावना और बाजार में मांग दोनों अच्छी हों। फिलहाल हल्दी, लाल मिर्च और अदरक को संभावित फसलों के रूप में सुझाया गया है।

शुक्रवार को हरियाणा सिविल सचिवालय में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने संबंधित विभागों को कम से कम पांच अधिक संभावना वाली फसलों की पहचान करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इन फसलों की खेती के लिए उपयुक्त क्षेत्रों की पहचान करने के साथ उत्पादन का लक्ष्य भी तय किया जाए।

हल्दी, लाल मिर्च और अदरक की खेती की संभावनाओं पर विचार
मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि फसलों की खेती की संभावनाओं और बाजार में उनकी मांग को ध्यान में रखकर योजना तैयार की जाए। इसके तहत हल्दी, लाल मिर्च और अदरक को संभावित फसलों के रूप में सुझाया गया है।

योजना में किसानों को खेती के लिए तैयार करने, उन्हें एकजुट करने और उनकी उपज के लिए बाजार उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया है। सरकार का उद्देश्य ऐसी व्यवस्था तैयार करना है, जिससे किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए सुनिश्चित बाजार मिल सके और उनकी आमदनी में सुधार हो।

जिलेवार जुटाया जाएगा जैविक खेती करने वाले किसानों का आंकड़ा
कृषि और बागवानी विभागों को प्राकृतिक और जैविक खेती करने वाले किसानों और किसान समूहों का प्रमाणित आंकड़ा तैयार करने के लिए कहा गया है। यह जानकारी जिले और फसल के हिसाब से जुटाई जाएगी।

इस आंकड़े में खेती का कुल रकबा, फसल का प्रमाणन, अनुमानित उत्पादन और बाजार में बेचने के लिए उपलब्ध उपज की मात्रा शामिल होगी। इससे उन क्षेत्रों की पहचान करने में मदद मिलेगी, जहां प्राकृतिक और जैविक खेती के बड़े समूह तैयार किए जा सकते हैं।

किसानों के पंजीकरण से लेकर प्रमाणन तक पर जोर
मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने अधिकारियों को किसानों के पंजीकरण, प्रशिक्षण, उन्हें खेती के लिए प्रोत्साहित करने और फसलों के प्रमाणन की प्रक्रिया सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

इस काम में राष्ट्रीय जैविक एवं प्राकृतिक खेती केंद्र के प्रतिनिधियों और अन्य मान्यता प्राप्त संस्थाओं से तकनीकी सहयोग लिया जाएगा। सरकार की प्रस्तावित योजना में फसल उत्पादन के साथ उसके प्रमाणन, सरकारी खरीद और बाजार तक पहुंच बनाने को भी शामिल किया गया है।


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