हरियाणा में प्राकृतिक और जैविक खेती करने वाले किसानों के लिए राज्य सरकार ने प्रोत्साहन योजना तैयार की है। इसका उद्देश्य किसानों को रासायनिक खेती पर निर्भरता कम करने और प्राकृतिक व जैविक खेती अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने बजट में राज्य में प्राकृतिक खेती का दायरा बढ़ाने की घोषणा की थी। इसी के तहत सरकार अब किसानों को आर्थिक सहायता देने के साथ खेती से लेकर उपज की बिक्री तक की व्यवस्था तैयार कर रही है।
इस योजना के तहत प्राकृतिक या जैविक खेती अपनाने वाले किसानों को पांच साल तक हर साल प्रति एकड़ 10 हजार रुपये की सब्सिडी मिलेगी। इसके अलावा 'मेरी फसल मेरा ब्योरा' पोर्टल पर पंजीकृत किसानों को जैविक खाद खरीदने पर 80 फीसदी तक सब्सिडी दी जाएगी।
जैविक खाद पर 80 फीसदी तक सब्सिडी, छोटे पैक बेचने के नियमों में छूट
राज्य सरकार जैविक खाद की उपलब्धता बढ़ाने के लिए भी कदम उठा रही है। इसके तहत पांच किलोग्राम तक के जैविक खाद के पैकेट बेचने वाले विक्रेताओं के लिए लाइसेंस संबंधी नियमों में छूट दी गई है। इससे किसानों को कम मात्रा में भी जैविक खाद खरीदने की सुविधा मिल सकेगी।
प्राकृतिक और जैविक खेती पर सब्सिडी का लाभ लेने के लिए किसानों के लिए प्रमाणन जरूरी होगा। हालांकि, प्रमाणन की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए सरकार हरियाणा राज्य बीज प्रमाणन एजेंसी (HSSCA) को राज्य में ही प्रमाणन का काम सौंपने की योजना बना रही है। इससे किसानों को प्रमाणन के लिए दूसरी एजेंसियों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।
खेती के लिए किसानों को दी जाएगी 800 एकड़ सरकारी जमीन
हरियाणा सरकार कृषि विभाग की करीब 800 एकड़ जमीन प्राकृतिक और जैविक खेती के लिए निर्धारित करने की योजना बना रही है। यह जमीन ऐसे किसानों को कम से कम 10 साल के लिए पट्टे पर दी जाएगी, जो प्राकृतिक या जैविक खेती करने के इच्छुक हैं। सरकार का उद्देश्य किसानों को लंबे समय तक खेती के लिए जमीन उपलब्ध कराना है, ताकि वे प्राकृतिक और जैविक खेती को जारी रख सकें।
हल्दी, लाल मिर्च और अदरक समेत पांच फसलों की होगी पहचान
प्राकृतिक और जैविक खेती को बढ़ाने के लिए मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी अलग-अलग विभागों के साथ बैठक कर रहे हैं। उन्होंने अधिकारियों को कम से कम पांच ऐसी फसलों की पहचान करने के निर्देश दिए हैं, जिनकी खेती की अच्छी संभावनाएं हों और बाजार में मांग भी उपलब्ध हो। इन फसलों के उत्पादन, प्रमाणन, सरकारी खरीद और बिक्री के लिए एक पूरी कार्ययोजना तैयार की जाएगी। फिलहाल हल्दी, लाल मिर्च और अदरक को संभावित फसलों में शामिल किया गया है।
एक अधिकारी के अनुसार, प्राकृतिक और जैविक खेती कर रहे किसानों का जिलेवार आंकड़ा भी तैयार किया जा रहा है। इसमें खेती का रकबा, प्रमाणन की स्थिति और बाजार में बिक्री के लिए उपलब्ध उपज की जानकारी जुटाई जा रही है। इससे ऐसे क्षेत्रों की पहचान की जा सकेगी, जहां किसान समूहों के माध्यम से उत्पादन और बिक्री की व्यवस्था बनाई जा सकती है।
10 जिलों की मंडियों में जैविक उपज बेचने के लिए मिलेगी अलग जगह
जैविक खेती करने वाले किसानों को अपनी उपज बेचने में परेशानी न हो, इसके लिए सरकार मंडियों में अलग जगह उपलब्ध कराने की तैयारी कर रही है। इसके तहत पंचकूला, यमुनानगर, करनाल, सोनीपत, रोहतक, गुरुग्राम, फरीदाबाद, हिसार, चरखी दादरी और नारनौल के किसानों को मंडियों में जैविक और प्राकृतिक उपज बेचने के लिए अलग स्थान दिया जाएगा।
इन मंडियों में आधुनिक जांच प्रयोगशालाएं भी स्थापित की जाएंगी। इनके जरिए उपज की गुणवत्ता की जांच और प्रमाणन की सुविधा उपलब्ध कराने की योजना है। इससे उपभोक्ताओं का जैविक उत्पादों पर भरोसा बढ़ाने में मदद मिलेगी।
HAFED संभालेगा खरीद और बिक्री की व्यवस्था
किसानों को उनकी जैविक उपज का बेहतर दाम दिलाने के लिए हरियाणा राज्य सहकारी आपूर्ति एवं विपणन महासंघ लिमिटेड (HAFED) को खरीद और मार्केटिंग की संभावनाएं तलाशने की जिम्मेदारी दी गई है। इसके अलावा, सरकार कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) से जांच और प्रमाणन के लिए मान्यता हासिल करने की दिशा में भी काम कर रही है। इससे हरियाणा के जैविक उत्पादों को देश के दूसरे बाजारों के साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने में मदद मिल सकती है।
हर जिले में बनाई जाएंगी 'प्रकृति श्री अन्न प्रेरक किसान समितियां'
प्राकृतिक खेती के बारे में किसानों को जागरूक करने के लिए सरकार हर जिले में 'प्रकृति श्री अन्न प्रेरक किसान समितियां' बनाएगी। ये समितियां सीधे किसानों के संपर्क में रहकर उन्हें प्राकृतिक खेती के तरीकों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करेंगी। सरकार की इस योजना में खेती, प्रमाणन, खरीद और बाजार तक पहुंच को एक साथ जोड़ने की तैयारी है। इसके जरिए प्राकृतिक और जैविक खेती करने वाले किसानों को आर्थिक सहायता देने के साथ उनकी उपज की बिक्री के लिए भी व्यवस्था तैयार की जाएगी।