भारत को कृषि उत्पादों का निर्यात करने वाले देशों पर फैक्ट्री या यूनिट के हिसाब से विशेष मंजूरी के नियम लागू लागू करने की मांग कुछ चावल निर्यातकों ने उठाई है। इस नियम के तहत तय किया जा सकता है कि निर्यातक देश में से किस फार्म, मिल से कृषि उत्पाद भारत आएंगे। भारत कनाडा से दालों का आयात करता है, उदाहरण के लिए अगर भारत चाहे तो इस नियम के माध्यम से तय कर सकता है कि निर्यात होने वाली चना दाल एंडर्सन मिल की होनी चाहिए या केवल जॉनसन निर्यात कंपनी ही भारत को दाल भेजेगी।
यह मांग ऐसे समय में उठी है, जब चीन ने भारतीय चावल की कई खेपों को जीएम होने का हवाला देते हुए खारिज किया था। अब चीन और सऊदी अरब जैसे देश भारत से चावल का आयात करने के लिए चावल मिलों के लिए अलग से खास मंजरी की शर्त रख रहे है और सूची बना रहे हैं।
भारत भी अपने आयात नियम सख्त करने चाहिए
भारतीय निर्यातों का कहना है कि जाब भारत से आयात करने वाले देश इतने सख्त नियम बना रहे हैं, तो भारत को भी आपने यहां माल भेजने वाले देशों के साथ वैसा ही बर्ताव करना चाहिए। निर्यातों के अनुसार अगर चीन कथित जीएमओ के आरोप में किसी भारतीय कंपनी को निलंबित कर सकता है, तो भारत को भी किसी विदेशी उत्पाद के खारिज होने पर उस देश की निर्यातक कंपनी के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।
सऊदी अरब ने आयात के लिए 778 भारतीय चावल निर्यातकों और मिलों की सूची भेजी
गौरतलब है कि हाल ही में कृषि निर्यात से जुड़ी एक सरकारी संस्था ने सऊदी अरब द्वारा मंजूर किए गए 778 चावल निर्यातकों और मिलों की सूची साझा की थी। दूसरी तरफ, पिछले कुछ महीनों में चीन ने कई भारतीय कंपनियों को चावल निर्यात करने वाली अपनी मंजूर सूची से बाहर कर दिया है।
FSSAI द्वारा विदेशी उत्पादों को खारिज करने के आंकड़े
भारत का भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण भी उन उत्पादों की खेप को नियमित रूप से खारिज करता है, जो भारतीय मानकों पर खरे नहीं उतरते या जिनमें हानिकारक तत्व पाए जाते हैं। हालांकि, अभी यह साफ नहीं है कि उत्पाद खारिज होने के बाद उन विदेशी कंपनियों का परमिट रद्द किया गया या नहीं।
FSSAI के फूड इम्पोर्ट रिजेक्शन अलर्ट पोर्टल के आंकड़ों के अनुसार साल 2022-23 में भारत ने लैब टेस्टिंग के बाद 57 देशों के 619 उत्पादों को खारिज किया था। साल 2023-24 में यह संख्या घटकर 46 देशों के 277 उत्पादों की रही। 2023-24 में सबसे ज्यादा चीन की 28 खेपों को खारिज किया गया। इनमें टॉफी-कैंडी, सूखा पपीता, सूखा बेर, डिब्बाबंद मशरूम, अंगूर, फ्लेवर्ड ड्रिंक्स, जैम और सुशी जैसी खाने की चीजें शामिल थीं। इसी साल तुर्की के 27 (सूखे अंजीर और ताजे सेब), ब्रिटेन के 19 और अमेरिका के 12 उत्पादों की खेप को भी अस्वीकार किया गया।
जोखिम को आधार बनाकर विदेशी कंपनियों के लिए पंजीकरण का सुझाव
द राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन' (छत्तीसगढ़) ने सरकार को कृषि और खाद्य उत्पाद भेजने वाली विदेशी कंपनियों एक लिए एक पारदर्शी और जोखिम आधारित पंजीकरण व्यवस्था शुरू करनेे का सुझाव दिया है। वहीं, खाद्य नीति विशेषज्ञ एस. चंद्रशेखरन का मानना है कि इन व्यापारिक अड़चनों का पक्का समाधान नई तकनीक को अपनाना है। उन्होंने कहा, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वैज्ञानिक तरीकों और सही सोच ने व्यापार की रुकावटों को दूर करने में मदद की है। भारत तकनीक के मामले में एक बहुत मजबूत देश है और खाद्य व्यापार में इसका इस्तेमाल फायदेमंद हो सकता है।