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गन्ने के रस से बने इथेनॉल की खरीद बंद : महाराष्ट्र की चीनी मिलों की कमाई पर बड़ा संकट

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Mohammad Aamil Updated Wed, 21 Oct 2026 12:14 PM IST
सार

  • केंद्र के नए खरीद नियमों से महाराष्ट्र की चीनी मिलों को 7,000 करोड़ रुपये से अधिक के नुकसान की आशंका।

  • गन्ने के रस, सिरप और बी-हेवी शीरे से बने इथेनॉल की खरीद चालू वर्ष में नहीं करेंगी तेल विपणन कंपनियां।

  • महाराष्ट्र में चीनी उत्पादन करीब 18 लाख टन घटने की आशंका।

  • चीनी मिलों ने चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य 31 से बढ़ाकर 45 रुपये प्रति किलो करने की मांग की।

गन्ने की खेती
गन्ने की खेती - फोटो : गांव जंक्शन
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विस्तार
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केंद्र सरकार के इथेनॉल खरीद से जुड़े नए फैसले से महाराष्ट्र के चीनी उद्योग को बड़ा वित्तीय झटका लगने की आशंका है। तेल विपणन कंपनियां (OMCs) चालू वर्ष में गन्ने के रस, सिरप और बी-हेवी शीरे से बने इथेनॉल की खरीद नहीं करेंगी। इससे राज्य की चीनी मिलों को करीब 7,000 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हो सकता है। चीनी उत्पादन घटने की आशंका के बीच इस फैसले से मिलों की आर्थिक स्थिति और बिगड़ सकती है। इसका असर गन्ना किसानों को समय पर भुगतान करने की क्षमता पर भी पड़ने की आशंका है।

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्र सरकार ने घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ाने और त्योहारों के मौसम में कीमतों में तेजी को रोकने के लिए यह कदम उठाया है। हालांकि, इथेनॉल उत्पादन के लिए गन्ने के रस, सिरप और बी-हेवी शीरे के इस्तेमाल पर रोक से चीनी मिलों की कमाई का एक अहम स्रोत प्रभावित होगा।

महाराष्ट्र में 18 लाख टन तक घट सकता है चीनी उत्पादन
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के सामने रखे गए अनुमान के मुताबिक, पेराई सत्र 2026-27 में राज्य में करीब 9.9 करोड़ टन गन्ना उपलब्ध होने की उम्मीद थी। इथेनॉल उत्पादन के लिए 15 लाख टन चीनी का इस्तेमाल करने के बाद राज्य में 96 लाख टन चीनी उत्पादन का अनुमान लगाया गया था।

हालांकि, पेराई सत्र जल्दी शुरू होने और गन्ने की पैदावार कम रहने के कारण चीनी उत्पादन में करीब 18 लाख टन की कमी आने की आशंका है। ऐसे में चीनी मिलों की आमदनी पर इथेनॉल खरीद से जुड़े फैसले का असर और बढ़ सकता है।

चीनी मिलों ने सूखे से प्रभावित किसानों और कारखानों के लिए आर्थिक सहायता देने की मांग की है। इसके अलावा, चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य (MSP) मौजूदा 31 रुपये प्रति किलो से बढ़ाकर 45 रुपये प्रति किलो करने की मांग भी की गई है। किसानों को 1,000 रुपये प्रति टन और चीनी मिलों को 500 रुपये प्रति टन की सहायता देने का प्रस्ताव भी रखा गया है।

टेंडर की शर्तों से रुकी तीन स्रोतों से बने इथेनॉल की खरीद
केंद्र सरकार ने सीधे प्रतिबंध लगाने के बजाय तेल विपणन कंपनियों के टेंडर में खरीद संबंधी शर्तें लागू की हैं। इनके तहत कंपनियां गन्ने के रस, सिरप और बी-हेवी शीरे से बने इथेनॉल की खरीद नहीं करेंगी। हालांकि, दूसरी फसलों और सी-हेवी शीरे से बने इथेनॉल की खरीद जारी रह सकेगी।

महाराष्ट्र राज्य सहकारी चीनी कारखाना महासंघ के मुताबिक, राज्य की चीनी मिलों में इथेनॉल उत्पादन की कुल स्थापित क्षमता करीब 375 करोड़ लीटर है। पेराई सत्र 2025-26 में मिलों ने 125 करोड़ लीटर इथेनॉल की आपूर्ति की थी। यानी उनकी कुल उत्पादन क्षमता का करीब 30 फीसदी ही इस्तेमाल हुआ।

चीनी उद्योग के एक विशेषज्ञ के अनुसार, इथेनॉल की औसत कीमत 60 रुपये प्रति लीटर मानें तो पिछले सत्र में इसकी बिक्री से करीब 7,500 करोड़ रुपये का राजस्व मिला था। विशेषज्ञ ने आशंका जताई कि गन्ने के रस, सिरप और बी-हेवी शीरे से बने इथेनॉल की खरीद रुकने से महाराष्ट्र की चीनी मिलों को इस साल 7,000 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हो सकता है।

किसानों के भुगतान पर पड़ सकता है असर
किसान नेता राजू शेट्टी ने कहा कि इस फैसले से चीनी मिलों के पास नकदी की उपलब्धता प्रभावित होगी। मिलें इथेनॉल से होने वाली कमाई का इस्तेमाल गन्ना किसानों को भुगतान करने में भी करती हैं।उन्होंने कहा कि नुकसान कम करने के लिए सी-हेवी शीरे से बने इथेनॉल की कीमत बढ़ाकर 70 रुपये प्रति लीटर की जानी चाहिए।

नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज (NFCSF) के अध्यक्ष हर्षवर्धन पाटिल ने बताया कि केंद्र की इथेनॉल मिश्रण नीति को ध्यान में रखते हुए महाराष्ट्र की चीनी मिलों ने इथेनॉल संयंत्रों में 35,000 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया है। उन्होंने कहा कि इथेनॉल से पेट्रोल में मिश्रण बढ़ाने से भारत को ईंधन आयात पर खर्च होने वाली विदेशी मुद्रा बचाने में मदद मिली है। साथ ही, यह चीनी मिलों और किसानों के लिए कमाई का एक महत्वपूर्ण स्रोत भी बना है।

पाटिल के मुताबिक, सी-हेवी शीरे से इथेनॉल का उत्पादन कुल उत्पादन का केवल करीब 4 फीसदी है। ऐसे में केवल इसी स्रोत से बने इथेनॉल की खरीद जारी रहने पर उद्योग की बड़ी उत्पादन क्षमता का इस्तेमाल नहीं हो पाएगा। उन्होंने सुझाव दिया कि केंद्र को गन्ने के रस, सिरप और बी-हेवी शीरे से इथेनॉल बनाने की अनुमति पूरी तरह रोकने के बजाय इसकी मात्रा सीमित करनी चाहिए थी। वहीं, NFCSF के प्रबंध निदेशक प्रकाश नाइकनवारे ने कहा कि यह प्रतिबंध केवल चालू वर्ष के लिए है। उन्होंने उम्मीद जताई कि 2027 में इस नीति में बदलाव हो सकता है।
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