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Women Farmers: महिला किसानों की कमाई बढ़ाने के लिए 4 बड़े सुझाव, बेहतर दाम से लेकर सीधे भुगतान तक पर जोर

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Mohammad Aamil Updated Wed, 21 Oct 2026 09:13 AM IST
सार

  • 4 प्रमुख उपाय सुझाए: महिला किसानों को बाजार, उचित कीमत और आर्थिक फैसलों में अधिक भागीदारी दिलाने पर जोर।

  • सीधी खरीद को बढ़ावा: कंपनियों के लिए महिला किसानों से कृषि उपज खरीदने के लक्ष्य तय करने का सुझाव।

  • उपज का बेहतर दाम: महिला किसानों को विशेष कीमत या अतिरिक्त प्रोत्साहन देने की व्यवस्था तलाशने की सिफारिश।

  • सीधे खाते में भुगतान: महिलाओं की आर्थिक स्वतंत्रता बढ़ाने के लिए भुगतान व्यवस्था मजबूत करने पर जोर।

महिला किसान
महिला किसान - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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महिला किसान खेती में अहम भूमिका निभाती हैं, लेकिन उन्हें अपनी उपज बेचने के लिए संगठित बाजारों तक पहुंच, उचित कीमत और आर्थिक फैसले लेने की आजादी जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। इन समस्याओं को दूर करने के लिए सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (SEA) और सॉलिडैरिडाड ने चार अहम उपाय सुझाए हैं। इनका उद्देश्य महिला किसानों को सीधे बाजार से जोड़ना, उनकी उपज का बेहतर दाम दिलाना और उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाना है।

ये सुझाव भोपाल में आयोजित एक बहु-पक्षीय चर्चा और विचार-विमर्श के दौरान सामने आए। बैठक का विषय था- 'वनस्पति तेल की मूल्य शृंखला को मजबूत बनाने में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए नीतिगत रूपरेखा'। इसमें इस बात पर जोर दिया गया कि खेती में महिलाओं के योगदान को पहचान देने के साथ उन्हें कमाई पर अधिक नियंत्रण और कारोबार से जुड़ी व्यवस्थाओं में बराबर भागीदारी मिलनी चाहिए।

महिला किसानों को फायदा पहुंचाने के लिए 4 प्रमुख सुझाव

1. महिला किसानों से उपज खरीदने का लक्ष्य तय हो
पहले सुझाव के तहत कंपनियों और संबंधित संस्थाओं के लिए महिला किसानों से सीधे कृषि उपज खरीदने के लक्ष्य तय करने की बात कही गई है। इससे महिलाओं को संगठित बाजारों, कंपनियों के खरीद नेटवर्क और औपचारिक आपूर्ति व्यवस्था से जुड़ने के ज्यादा अवसर मिल सकते हैं।

2. उपज के बेहतर दाम और प्रोत्साहन मिले
दूसरे सुझाव में महिला किसानों की उपज के लिए विशेष कीमत या अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि देने की व्यवस्था तलाशने पर जोर दिया गया है। इससे टिकाऊ खेती और प्राकृतिक संसाधनों को बचाने वाली कृषि पद्धतियों को अपनाने वाली महिलाओं को फायदा मिल सकता है। साथ ही, उन्हें ऐसी खेती के लिए प्रोत्साहित किया जा सकेगा।

3. भुगतान की व्यवस्था महिलाओं के अनुकूल बने
तीसरे सुझाव के तहत ऐसी भुगतान व्यवस्था विकसित करने की बात कही गई है, जिससे महिला किसानों को उनकी उपज का पैसा सीधे मिल सके और कमाई पर उनका नियंत्रण बढ़े। जरूरत के अनुसार, खाताधारकों की पूरी सहमति से संयुक्त बैंक खाते की व्यवस्था को भी बढ़ावा दिया जा सकता है। इसका उद्देश्य महिलाओं की आर्थिक स्वतंत्रता और बैंकिंग सेवाओं तक पहुंच मजबूत करना है।

4. CSR बजट का कम से कम 10 फीसदी महिलाओं पर खर्च हो
चौथे सुझाव में कंपनियों से अपने कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) बजट का कम से कम 10 फीसदी हिस्सा महिला किसानों को आपूर्ति शृंखला से जोड़ने के लिए निर्धारित करने की बात कही गई है। यह खर्च लागू कानूनों के अधीन होगा। इस राशि का इस्तेमाल महिलाओं को प्रशिक्षण देने, टिकाऊ खेती को बढ़ावा देने, बाजार से जोड़ने और नई तकनीक तक उनकी पहुंच बढ़ाने में किया जा सकता है।

महिला किसानों के योगदान के अनुरूप मिले पहचान और उचित दाम
SEA के कार्यकारी निदेशक बीवी मेहता ने कहा कि महिला किसान भारत की कृषि और वनस्पति तेल से जुड़ी मूल्य शृंखला का अहम हिस्सा हैं। वे फसल उत्पादन, प्रसंस्करण और ग्रामीण आजीविका में महत्वपूर्ण योगदान देती हैं। इसके बावजूद बाजार व्यवस्था में उनके योगदान के अनुरूप अवसर, उचित कीमत और आर्थिक फैसले लेने की भागीदारी सुनिश्चित करने की जरूरत है।

मेहता के मुताबिक, SEA और सॉलिडैरिडाड मिलकर उद्योग जगत को महिला किसानों से सीधे उपज खरीदने, उचित कीमत देने और उनकी जरूरतों के अनुरूप भुगतान व्यवस्था अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि आपूर्ति शृंखला में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना केवल समानता का सवाल नहीं है, बल्कि इससे वनस्पति तेल क्षेत्र को अधिक मजबूत, टिकाऊ और संकटों का सामना करने में सक्षम बनाया जा सकता है।

प्रशिक्षण के साथ बाजार तक पहुंच भी जरूरी
सॉलिडैरिडाड के महाप्रबंधक सुरेश मोटवानी ने कहा कि महिला किसानों को सशक्त बनाने के लिए केवल प्रशिक्षण और जागरूकता कार्यक्रम पर्याप्त नहीं हैं। उनकी आर्थिक भागीदारी में बाधा बनने वाली व्यवस्थागत समस्याओं को दूर करना भी जरूरी है।

उन्होंने कहा कि महिलाओं को बाजार तक समान पहुंच, उपज का उचित दाम, आर्थिक स्वतंत्रता और अपनी आजीविका से जुड़े फैसलों में भागीदारी के अवसर मिलने चाहिए। इसके लिए उद्योग जगत, नीति निर्माताओं, किसान संगठनों और सामाजिक संस्थाओं को मिलकर काम करना होगा।

सॉलिडैरिडाड की सहायक महाप्रबंधक नेहा ने कहा कि महिलाओं को जमीन का मालिकाना हक न होने के बावजूद किसान के रूप में पहचान मिलनी चाहिए। इससे उन्हें संस्थागत सहायता प्राप्त करने, आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने और कृषि मूल्य शृंखला में अपनी भागीदारी मजबूत करने में मदद मिल सकती है।
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