विज्ञापन
Home› Khabar Junction› Birc 2026 New Foreign Markets Open For Indian Rice Buyers From Over 150 Countries Gather In Delhi

BIRC 2026: भारतीय चावल के लिए खुलेंगे नए विदेशी बाजार, दिल्ली में जुटेंगे 150 से अधिक देशों के खरीदार

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Mohammad Aamil Updated Wed, 21 Oct 2026 09:06 AM IST
सार

  • 150 से अधिक देशों की भागीदारी: भारत अंतरराष्ट्रीय चावल सम्मेलन के लिए 4,649 खरीदारों ने पंजीकरण कराया।

  • 2,038 कारोबारी बैठकों की तैयारी: भारतीय निर्यातकों और विदेशी खरीदारों को जोड़ने की योजना।

  • 180 से अधिक कंपनियां लेंगी हिस्सा: भारत मंडपम में लगातार दूसरे साल प्रदर्शनी की जगह पूरी तरह बुक।

चावल
चावल - फोटो : सोशल मीडिया
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

भारत के चावल कारोबार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ावा देने के लिए 23 से 25 अक्टूबर तक नई दिल्ली के भारत मंडपम में भारत अंतरराष्ट्रीय चावल सम्मेलन (BIRC 2026) आयोजित किया जाएगा। सम्मेलन शुरू होने से पहले ही भारतीय चावल निर्यातकों और विदेशी खरीदारों के बीच 2,038 कारोबारी बैठकों का कार्यक्रम तय किया गया है। आयोजकों के मुताबिक, 150 से अधिक देशों के खरीदारों ने सम्मेलन के लिए 4,649 पंजीकरण कराए हैं। इसका उद्देश्य भारतीय चावल के लिए नए बाजार तलाशना और निर्यात के अवसर बढ़ाना है।

भारतीय चावल निर्यातक महासंघ (IREF) की ओर से आयोजित इस तीन दिवसीय सम्मेलन में 180 से अधिक कंपनियां हिस्सा लेंगी। आयोजन स्थल के हॉल नंबर 4 और 5 में प्रदर्शनी के लिए उपलब्ध जगह लगातार दूसरे साल पूरी तरह बुक हो चुकी है। कुवैत, दक्षिण अफ्रीका, बेनिन, नाइजीरिया, संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब समेत कई देशों के खरीदार इसमें शामिल होंगे।

यूपी समेत देश के प्रमुख चावल उत्पादक राज्यों की भागीदारी
सम्मेलन में महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, गुजरात, तमिलनाडु, पंजाब, हरियाणा, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक समेत देश के प्रमुख चावल उत्पादक और व्यापारिक राज्यों की भागीदारी रहेगी। IREF के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष देव गर्ग के मुताबिक, सम्मेलन के राज्यवार आंकड़ों में करीब 91 फीसदी पंजीकरण दिल्ली के बाहर से हुए हैं। महाराष्ट्र की हिस्सेदारी 13.1 फीसदी, दिल्ली की 9.2 फीसदी, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल की 8.4-8.4 फीसदी और गुजरात की 8.2 फीसदी है। तमिलनाडु की हिस्सेदारी 6.2 फीसदी, मध्य प्रदेश की 5.2 फीसदी और कर्नाटक की 5.1 फीसदी है।

गर्ग ने कहा कि देशभर से मिल रही भागीदारी और विदेशी खरीदारों की बढ़ती दिलचस्पी भारतीय चावल उद्योग के लिए उत्साहजनक है। सम्मेलन के जरिए देश के चावल कारोबारियों को दुनिया भर के खरीदारों से जोड़ने और नए कारोबारी अवसर तैयार करने की कोशिश की जा रही है।

चावल निर्यात और अंतरराष्ट्रीय बाजार पर होंगे सत्र
सम्मेलन में 23 और 24 अक्टूबर को नौ ज्ञान सत्र आयोजित किए जाएंगे। इनमें दुनिया में चावल की मांग और आपूर्ति, निर्यात के अवसर, माल ढुलाई की लागत, भुगतान से जुड़े जोखिम, गुणवत्ता मानकों और सरकारी नीतियों पर चर्चा होगी।

पहले सत्र में वर्ष 2027 के लिए वैश्विक चावल बाजार की स्थिति पर विचार किया जाएगा। इसका विषय है- 'वैश्विक चावल मांग और आपूर्ति का अनुमान 2027: कीमतों में गिरावट या तेजी का नया दौर?' इसमें S&P Global, BigMint, EY और IREF के विशेषज्ञ बाजार के रुझानों और कीमतों में संभावित बदलावों पर चर्चा करेंगे।

सम्मेलन में '2027 में नजर रखने लायक चावल के शीर्ष 10 बाजारों' की सूची भी जारी की जाएगी। इसमें बासमती और गैर-बासमती चावल के लिए संभावित विदेशी बाजारों का आकलन किया जाएगा। इसके लिए मांग, प्रतिस्पर्धा, कीमत, बाजार तक पहुंच और भुगतान संबंधी जोखिमों को आधार बनाया जाएगा।

अन्य सत्रों में निर्यात भुगतान, बीमा, प्रमाणन, टिकाऊ उत्पादन, चावल मिलों की कमाई और मूल्यवर्धित उत्पादों पर चर्चा होगी। इनका उद्देश्य निर्यातकों और प्रसंस्करण इकाइयों को कारोबार और निवेश से जुड़े फैसले लेने में मदद करना है।

200 किस्मों का चावल संग्रह और 50 देशों के व्यंजन
सम्मेलन में 'ग्लोबल राइस आर्काइव' भी प्रदर्शित किया जाएगा। इसमें भारत और दूसरे देशों की करीब 200 चावल किस्में दिखाई जाएंगी। इससे चावल की विविधता और अलग-अलग किस्मों की विशेषताओं को सामने लाने का अवसर मिलेगा।

25 अक्टूबर को चावल महोत्सव आयोजित होगा। इसमें 50 से अधिक देशों के व्यंजन, बिरयानी की 25 से अधिक किस्में, शेफ प्रतियोगिताएं, सांस्कृतिक कार्यक्रम और परिवारों के लिए गतिविधियां होंगी। कार्यक्रम में खास किस्म के चावल और उनसे बनने वाले मूल्यवर्धित उत्पादों की कारोबारी संभावनाओं को भी दिखाया जाएगा।

पिछले सम्मेलन में 33,453 करोड़ रुपये के कारोबारी समझौते
आयोजकों के अनुसार, वर्ष 2025 में आयोजित पहले भारत अंतरराष्ट्रीय चावल सम्मेलन में 90 से अधिक देशों के 1,083 अंतरराष्ट्रीय खरीदारों समेत कुल 10,854 लोगों ने हिस्सा लिया था। EY के सम्मेलन के बाद किए गए आकलन के मुताबिक, पिछले आयोजन में 33,453 करोड़ रुपये के कारोबारी समझौते और प्रतिबद्धताएं सामने आई थीं। ये करीब 86.3 लाख टन चावल से संबंधित थीं।

इस बार आयोजकों को अधिक विदेशी खरीदारों और 2,000 से ज्यादा कारोबारी बैठकों के जरिए पिछले सम्मेलन की उपलब्धियों को आगे बढ़ाने की उम्मीद है। हालांकि, वर्ष 2026 के लिए संभावित कारोबारी समझौतों की कोई तुलनीय अनुमानित राशि जारी नहीं की गई है। सम्मेलन की ज्ञान संबंधी चर्चाओं का सीधा प्रसारण भी किया जाएगा, जिससे आयोजन में प्रत्यक्ष रूप से शामिल नहीं हो पाने वाले लोग भी इन चर्चाओं से जुड़ सकेंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन