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किसानों का आरोप: धान में नमी बताकर सरकारी केंद्र ने लौटाया, प्रति एकड़ 10 हजार रुपये तक का नुकसान

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Mohammad Aamil Updated Wed, 21 Oct 2026 11:46 AM IST
सार

  • किसानों का दावा है कि सरकारी खरीद केंद्र पर उनकी उपज नहीं खरीदी गई।
  • प्रति एकड़ 10 हजार रुपये तक नुकसान: कम कीमत पर खुले बाजार में धान बेचने के कारण किसानों को आर्थिक नुकसान।

  • सरकारी और निजी भाव में अंतर: सरकारी केंद्र पर 26 रुपये प्रति किलो के मुकाबले निजी मिल में 20 रुपये कम भाव मिलने का दावा।

सांकेतिक तस्वीर
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : गांव जंक्शन
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विस्तार
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तमिलनाडु के कन्याकुमारी जिले में धान किसानों को सरकारी खरीद केंद्र पर उपज बेचने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। किसानों का आरोप है कि धान में नमी ज्यादा होने और दूसरी शर्तों का हवाला देकर प्रत्यक्ष धान खरीद केंद्र (DPC) ने उनकी उपज खरीदने से इनकार कर दिया। मजबूरी में उन्हें खुले बाजार में व्यापारियों को कम कीमत पर धान बेचना पड़ा। इससे किसानों को प्रति एकड़ करीब 10,000 रुपये तक का नुकसान हुआ है।

यह मामला कन्याकुमारी जिले के तोवलई तालुक के चेनबगरामनपुथूर और आसपास के इलाकों का है। यहां चेनबगरामनपुथूर, कन्ननपुथूर, चोलापुरम, लायम, शन्मुगापुरम, अनंतपद्मनाभपुरम, पुलियानविलई और तोवलई के किसान आमतौर पर अपनी धान की फसल चेनबगरामनपुथूर स्थित सरकारी खरीद केंद्र पर बेचते थे।

1,500 एकड़ में होती है धान की खेती
चेनबगरामनपुथूर किसान संघ के अध्यक्ष एन. रक्किसमुथु के मुताबिक, इन इलाकों में करीब 1,500 एकड़ में धान की खेती होती है। इस महीने की शुरुआत में जब फसल की कटाई शुरू हुई, तब रुक-रुककर बारिश हुई। इससे धान में नमी बढ़ गई और किसानों को सरकारी खरीद केंद्र पर उपज बेचने में दिक्कत हुई।

रक्किसमुथु का दावा है कि 90 फीसदी से ज्यादा किसान अपनी कटी हुई फसल सरकारी खरीद केंद्र पर नहीं बेच पाए। उन्हें खुले बाजार में व्यापारियों को कम कीमत पर धान बेचना पड़ा। इससे प्रति एकड़ करीब 10,000 रुपये का नुकसान हुआ।

सरकारी केंद्र के मुकाबले 20 रुपये कम मिला भाव
कन्ननपुथूर के किसान वी. तिरुवल्लुवन ने बताया कि खरीद केंद्र की कई शर्तों के कारण किसानों को धान बोरियों में भरकर केंद्र पर जमा करना पड़ा। मजदूरों की कमी से धान की ढुलाई और उसे संभालने में भी परेशानी हुई। उन्होंने कहा कि नमी के कारण धान की तौल में कई दिन लग गए। खरीद केंद्र पर नमी के आधार पर वजन में भी कटौती की गई। इसके बाद बचा हुआ धान निजी मिल में बेचना पड़ा।

तिरुवल्लुवन के मुताबिक, सरकारी खरीद केंद्र पर धान की कीमत 26 रुपये प्रति किलोग्राम थी, जबकि निजी मिल में उन्हें 20 रुपये प्रति किलोग्राम कम भाव मिला। इससे किसानों की आमदनी पर सीधा असर पड़ा।

17 फीसदी से ज्यादा नमी पर खरीद नहीं
एक अन्य किसान जे. जॉर्ज मिकेलसन ने बताया कि पिछले सीजन में उन्होंने सरकारी खरीद केंद्र पर धान बेचा था। लेकिन इस बार धान में नमी 17 फीसदी से अधिक होने के कारण उन्हें निजी व्यापारियों को उपज बेचनी पड़ी। इससे उन्हें प्रति कोट्टई (87 किलोग्राम) पर 500 रुपये से अधिक का नुकसान हुआ।

किसान संघ के अध्यक्ष रक्किसमुथु ने कहा कि सरकारी खरीद केंद्र की शर्तों से खासकर छोटे और सीमांत किसान प्रभावित हो रहे हैं। किसानों के पास दूसरी व्यवस्था नहीं होने के कारण उन्हें व्यापारियों की तय कीमत पर धान बेचना पड़ता है। उन्होंने मांग की कि सरकारी खरीद केंद्रों को किसानों के हित में काम करना चाहिए।

खरीद निगम ने क्या कहा?
तमिलनाडु नागरिक आपूर्ति निगम के अधिकारियों के मुताबिक, चेनबगरामनपुथूर का सरकारी खरीद केंद्र किसानों से रोजाना 600 से 850 बोरियां धान खरीद रहा है। हालांकि, केंद्र पर केवल वही धान खरीदा जा सकता है, जिसमें नमी की मात्रा 17 फीसदी से कम हो।

इस तरह, एक ओर किसान नमी और खरीद की शर्तों के कारण कम कीमत पर धान बेचने को मजबूर होने की बात कह रहे हैं, वहीं अधिकारियों का कहना है कि खरीद केंद्र निर्धारित नमी मानक के अनुसार ही धान खरीद रहा है।
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