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Spice Sector: जलवायु परिवर्तन की मार झेल रहे मसाला किसान, जयपुर में मंथन के लिए जुटे दिग्गज

गांव जंक्शन डेस्क, जयपुर Published by: Umashankar Mishra Updated Tue, 22 Sep 2026 07:53 PM IST
सार

पांचवें राष्ट्रीय मसाला सम्मेलन 2026 के दौरान किसानों की आय, खाद्य सुरक्षा, स्थिरता और बाजार पहुंच पर चर्चा हुई। जलवायु परिवर्तन, मिट्टी की घटती उर्वरता और कीट-रोगों की बढ़ती समस्या से निपटने के लिए किसानों, एफपीओ, उद्योग, नियामकों और खरीदारों के बीच बेहतर तालमेल पर जोर दिया गया।
 

सम्मेलन में एफपीओ, प्रोसेसर्स, रिटेल ब्रांड्स, व्यापारी, निर्यातक, टेक्नोलॉजी कंपनियां और सेवा प्रदाता एक मंच पर आए।
सम्मेलन में एफपीओ, प्रोसेसर्स, रिटेल ब्रांड्स, व्यापारी, निर्यातक, टेक्नोलॉजी कंपनियां और सेवा प्रदाता एक मंच पर आए। - फोटो : AI Image
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विस्तार
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राजस्थान की राजधानी जयपुर में आयोजित दो दिवसीय सम्मेलन में किसानों की आय, खाद्य सुरक्षा, जिम्मेदार सोर्सिंग, स्थिरता, नवाचार और बाजार पहुंच पर विशेष चर्चा हुई। वर्ल्ड स्पाइस ऑर्गेनाइजेशन (डब्ल्यूएसओ) द्वारा आयोजित इस सम्मेलन के प्रतिभागियों के अनुसार, एक सुरक्षित, टिकाऊ और लाभकारी मसाला मूल्य श्रृंखला बनाने के लिए किसानों, किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ), उद्योग, नियामकों और खरीदारों के बीच नजदीकी सहयोग एक प्रमुख प्राथमिकता बनकर उभरा है।

सशक्त किसान और उपभोक्ताओं की सुरक्षा 
ऑल-इंडिया स्पाइसेज एक्सपोर्टर्स फोरम (एआईएसईएफ) के गैर-लाभकारी तकनीकी साझेदार डब्ल्यूएसओ द्वारा आयोजित यह सम्मेलन 'एम्पावरिंग फार्मर्स, प्रोटेक्टिंग कंज्यूमर्स' थीम के तहत संपन्न हुआ। डब्ल्यूएसओ के चेयरमैन रामकुमार मेनन ने बताया कि इस सम्मेलन में एफपीओ, प्रोसेसर्स, रिटेल ब्रांड्स, व्यापारी, निर्यातक, टेक्नोलॉजी कंपनियां और सेवा प्रदाता एक साथ आए, ताकि मसाला मूल्य श्रृंखला की चुनौतियों पर विचार-विमर्श किया जा सके, जिसमें किसान सशक्तिकरण, खाद्य सुरक्षा और उपभोक्ता संरक्षण पर विशेष जोर दिया गया।

बारिश की कमी से जूझ रहे मसाला किसान
देश के अलग-अलग हिस्सों के मसाला किसानों के बीच हुई एक पैनल चर्चा में मिर्च, जीरा, धनिया, हल्दी और काली मिर्च उगाने वाले किसानों की उन चुनौतियों पर बात हुई, जो बारिश की कमी और अल नीनो की स्थितियों के चलते सामने आ रही हैं। इस चर्चा में बदलते मौसम के पैटर्न का फसल उत्पादन पर पड़ने वाले असर पर भी चर्चा केंद्रित रही। सम्मेलन में जलवायु परिवर्तन, मिट्टी की घटती उर्वरता और कीट-रोगों की बढ़ती घटनाओं से उपजी चुनौतियों से निपटने के लिए सभी हितधारकों के बीच बेहतर तालमेल की जरूरत पर बल दिया गया।

डिजिटल ट्रेसेबिलिटी और भंडारण तकनीक
सम्मेलन में डिजिटल ट्रेसेबिलिटी, फसल कटाई के बाद के बुनियादी ढांचे, खेत स्तर की तकनीकों, टेस्टिंग और प्रसंस्करण, वेयरहाउसिंग और वित्तपोषण से जुड़े नए समाधानों पर भी चर्चा हुई।
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