हरियाणा के कुरुक्षेत्र जिले के शाहाबाद में मंगलवार को धान की सरकारी खरीद शुरू न होने से नाराज किसानों ने दिल्ली-चंडीगढ़ नेशनल हाईवे-44 को कुछ समय के लिए जाम कर दिया। किसानों को हटाने के लिए पुलिस ने आंसू गैस और पानी की बौछार का इस्तेमाल किया।
भारतीय किसान यूनियन (चरुनी) ने पहले ही एलान किया था कि अगर 22 सितंबर तक धान की सरकारी खरीद शुरू नहीं हुई तो राष्ट्रीय राजमार्ग जाम किया जाएगा। संगठन के अध्यक्ष गुरनाम सिंह चरुनी ने कहा कि किसानों की उपज मंडियों में पड़ी है और न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर सरकारी खरीद नहीं होने के कारण उन्हें इंतजार करना पड़ रहा है।
पहले 15 सितंबर से खरीद की थी मांग
चरुनी के अनुसार, किसानों ने शुरुआत में 15 सितंबर से धान खरीद शुरू करने की मांग की थी। बाद में 22 सितंबर से खरीद शुरू करने पर सहमति बनी थी। मंगलवार सुबह प्रशासनिक अधिकारियों ने भी चरुनी के साथ बातचीत कर किसानों को समझाने की कोशिश की। हाईवे पर किसानों के प्रदर्शन को देखते हुए इलाके में भारी पुलिस बल तैनात किया गया। स्थानीय प्रशासन और पुलिस के अधिकारी मौके पर पहुंचे। जानकारी के अनुसार, कुरुक्षेत्र और आसपास के इलाकों में वैकल्पिक स्थानीय रास्ते खुले रहे।
केंद्र से खरीद की तारीख आगे बढ़ाने का अनुरोध
हरियाणा सरकार ने 15 सितंबर को केंद्र से धान की सरकारी खरीद 1 अक्टूबर के बजाय 20 सितंबर से शुरू करने का अनुरोध किया था। सरकार ने पत्र में कहा था कि राज्य की विभिन्न मंडियों में धान की आवक शुरू हो गई है और सीजन की शुरुआत में किसानों को अपनी उपज बेचने में परेशानी हो रही है। केंद्र के तय कार्यक्रम के अनुसार, हरियाणा में धान की MSP पर सरकारी खरीद 1 अक्टूबर से 15 नवंबर 2026 तक होनी है।
किसानों का कहना है कि कुछ जल्दी पकने वाली गैर-बासमती धान की किस्में कटाई के लिए तैयार हैं और मंडियों में पहुंचने लगी हैं। उनका कहना है कि सरकारी खरीद नहीं होने पर उन्हें MSP से कम कीमत पर उपज बेचने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है।
धान का MSP और नमी की शर्त
खरीफ विपणन सत्र 2026-27 के लिए सामान्य धान का MSP 2,441 रुपये प्रति क्विंटल और ग्रेड-ए धान का MSP 2,461 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है। अधिकारियों ने खरीद के लिए गुणवत्ता और नमी की निर्धारित शर्तों का हवाला दिया है। उनके अनुसार, धान में अधिकतम 17 प्रतिशत नमी की सीमा है और ताजा कटाई वाली धान में इससे अधिक नमी हो सकती है। किसानों का कहना है कि उनकी मांग केवल उस सूखे धान की खरीद की है, जो पहले ही मंडियों में पहुंच चुका है।
हरियाणा के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्याम सिंह राणा ने कहा है कि सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि किसानों को अपनी उपज बेचने में परेशानी न हो। उन्होंने यह भी कहा कि निजी निर्यातक मंडियों में बासमती चावल की खरीद कर रहे हैं। मंत्री के अनुसार, राज्य सरकार के मेरी फसल मेरा ब्यौरा पोर्टल पर 24 लाख एकड़ धान का पंजीकरण हुआ है। इनमें से 19.34 लाख एकड़ का सैटेलाइट इमेजरी के जरिए सत्यापन किया जा चुका है, जबकि बाकी क्षेत्र का सत्यापन किया जाना है।