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जैसी करनी वैसी भरनी : भारत के चावल पर GMO का आरोप लगाने वाले चीन की खेपों में मिला GMO, EU ने पकड़ी गड़बड़ी...

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Devesh Saraswat Updated Tue, 22 Sep 2026 06:01 PM IST
सार

  • बीते मार्च महीने में चीन ने भारतीय चावल की खेपों में कथित जीएम अंश मिलने का दावा किया था, जबकि भारत में जीएम धान की खेती ही नहीं होती
  • अब यूरोपीय संघ ने चीन की चावल आधारित खाद्य उत्पादों की कम से कम पांच खेपों में जीएम अंश मिलने की बात कही है
  • चीन अपने यहां भी जीएम धान की खेती से इनकार करता है
  • चीन ने जनवरी-जून 2026 के दौरान GMO के आरोप में 146 खाद्य खेपें खारिज कीं।
  • 2025 में चीन ने GMO के आधार पर 38 खेपें खारिज की थीं।
  • इसी बीच चीन ने भारत से भेजी गई चावल की खेपों को भी कथित GMO की मौजूदगी के आधार पर खारिज किया है।

चीन के चावल आधारित उत्पादों में मिले जीएमओ अंश।
चीन के चावल आधारित उत्पादों में मिले जीएमओ अंश। - फोटो : AI
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विस्तार
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जैसी करनी वैसी भरनी, यह कहावत इस खबर पर काफी सटीक बैठती है। दरअसल खबर यह है कि इस साल अब तक चीन से यूरोपीय संघ को भेजी गईं चावल आधारित खाद्य उत्पादों की कम से कम पांच खेपों में जीएमओ अंश पाए गए हैं। यह खबर ऐसे समय में आई है, जब चीन ने मार्च में जीएमओ की मौजूदगी का हवाला देते हुए भारत की गैर बासमती चावल की खेपों को खारिज कर दिया था।  चीन ने कजाकिस्तान, रूस, यूक्रेन, बेलारूस और जापान से भेजी गई कुछ खेपों को भी खारिज किया है। इन देशों से भेजे गए रेपसीड तेल और गेहूं के आटे की खेपों में जीएमओ होने का आरोप लगाया गया था। 

EU को चीनी चावल उत्पादों में मिला GMO
चीन से भेजे गए  इन चावल आधारित उत्पादों में राइस स्टिक्स, राइस क्रैकर्स, नूडल्स और हाइड्रोलाइज्ड राइस फ्लोर शामिल है, जिसमें GMO की मौजूदगी पाई गई। इसके अलावा चीन से भेजे गए मिसो पेस्ट में भी GMO पाया गया। मिसो जापान का पारंपरिक खाद्य पदार्थ है, जिसे किण्वित सोयाबीन, नमक और कोजी नामक फंगस से बनाया जाता है। 

भारत में धान की जीएम किस्में नहीं है
भारत की चावल की खेप में जीएमओ अंश मिलने का चीनी दावा काफी हैरान करने वाला है, क्योंकि अभी तक भारत के किसानों तक धान की जीएम किस्म नहीं पहुंची है। ऐसे में चावल में जीएओ अंश कैसे मिल सकते हैं? कुछ जानकारों ने चीन के इस कदम को भारती खाद्य उत्पादों की साख को गिराने की कोशिश से भी जोड़ा है।

सबसे हालिया मामले में इटली के अधिकारियों ने राइस स्टिक्स में *अनधिकृत GMO 35 S terminator पाए जाने की सूचना दी। S terminator एक खास DNA sequence है, जिसका इस्तेमाल आनुवंशिक रूप से संशोधित जीवों में जीन ट्रांसक्रिप्शन के अंत का संकेत देने के लिए किया जाता है। 3 अगस्त को इटली ने चीन के राइस क्रैकर्स में GMO पाए जाने की सूचना दी थी। वहीं, 6 जुलाई को नीदरलैंड्स ने चीन से आई हाइड्रोलाइज्ड राइस फ्लोर की खेपों में GMO की मौजूदगी का पता लगाया।

चीन ने जनवरी-जून में 146 खेपें खारिज कीं
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, चीन ने इस साल जनवरी से जून के बीच 146 खेपों को खारिज किय*, जो 2025 में खारिज की गई 38 खेपों की तुलना में करीब चार गुना है।

चीन से जुड़े खाद्य निर्यात में GMO संबंधी मामलों का इतिहास भी रहा है। आंकड़ों के अनुसार, 2002 से 2025 के बीच EU की ओर से चीनी खाद्य निर्यात के खिलाफ 275 से अधिक GMO अधिसुचना जारी की गईं। इनमें अकेले चीनी चावल आधारित उत्पादों से जुड़े 125 से अधिक अलर्ट नोटिफिकेशन 2006 से 2025 के बीच जारी हुए। इसके मुकाबले, भारत से खाद्य निर्यात में GMO की मौजूदगी को लेकर केवल एक अधिसुचना दर्ज किया गया है। इसी बीच, चीन ने इस साल भारत से भेजे गए चावल में GMO होने का आरोप लगाया है।

चीनी चावल में किन GMO का जिक्र
GMO के एक मामले में नीदरलैंड्स के अधिकारियों ने चीन के मिसो पेस्ट में Cry1AB/AC GMO पाया। 12 मार्च को भी नीदरलैंड्स ने चीन से आई राइस नूडल्स की खेप में इसी Cry1AB/AC की मौजूदगी की सूचना दी थी। वैज्ञानिकों के अनुसार, Cry1Ab/Ac या Cry1Ab-Cry1Ac एक बीटी जीन है, जिसका उपयोग पहले कपास और बाद में धान और जूट जैसी दूसरी फसलों की किस्म तैयार करने में किया गया।  जानकारी के अनुसार, चीन में आनुवंशिक इंजीनियरिंग आधारित पौधों में इसी जीन का इस्तेमाल किया गया है। 2009-11 के दौरान चीन में बीटी या जीएम धान को व्यावसायिक स्तर पर लाने की दिशा में काम हुआ था, हालांकि बड़े स्तर पर व्यावसायिक खेती को नियामकीय और नीतिगत देरी का सामना करना पड़ा।

चीनी चावल में पहले भी सामने आए मामले
चीन खुद से जीएओ धान की खेती से इनकार करता है, लेकिन जानकार अतीत के मामलों का जिक्र करते हैं, जिनमें सेवानिवृत्त USDA अर्थशास्त्री Fred Gale भी शामिल हैं। उनके अनुसार, चीनी चावल आधारित उत्पादों में अनधिकृत GM सामग्री का पता चला है और इसे परीक्षण के लिए इस्तेमाल की जा रही सामग्री के बाजार में पहुंचने से जोड़ा गया है। RASFF के अलर्ट में चीन के चावल नूडल्स, सेंवई और चावल के आटे में अनधिकृत जीएम अवशेषों का जिक्र किया गया है। जानकारी के अनुसार, Bt-63 या Bt Shanyou 63 चीन में विकसित एक GM धान की किस्म है, जिसे कीट प्रतिरोधी बनाया गया था। वहीं, KeMingDao एक दूसरी GM धान किस्म है, जिसमें Bt से लिया गया एक जीन मौजूद है। इसका उद्देश्य भी तना छेदक जैसे कीटों की समस्या से निपटना था।

Fred Gale के अनुसार, भारत समेत व्यापारिक साझेदारों से GMO के आधार पर चीन की ओर से बढ़ती अस्वीकृतियों का संबंध EU द्वारा चीनी चावल के आटे में GMO पाए जाने के कारण की गई अस्वीकृतियों से हो सकता है। यह उनके द्वारा व्यक्त किया गया संभावित संबंध है।
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