सोयाबीन खली संकट से बढ़ी किसानों की चिंता : पशु आहार महंगा होने से पोल्ट्री, डेयरी और मत्स्य पालन पर असर
गांव जंक्शन डेस्क, दिल्ली
Published by: Mohammad Aamil
Updated Fri, 12 Jun 2026 03:49 PM IST
सार
सोयाबीन खली पशु आहार में प्रोटीन का प्रमुख स्रोत है। इसकी कीमत बढ़ने से पोल्ट्री, डेयरी और मत्स्य पालन की लागत बढ़ती है, जिसका असर अंततः किसानों की आय और उपभोक्ताओं तक पहुंचने वाले उत्पादों की कीमतों पर भी पड़ सकता है। ऐसे में इस समस्या का जल्द समाधान निकालना जरूरी माना जा रहा है।
देश में पशु आहार उद्योग से जुड़े संगठनों ने सोयाबीन खली (Soybean Meal) की कमी और उसकी लगातार बढ़ती कीमतों पर चिंता जताई है। कंपाउंड लाइवस्टॉक फीड मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (CLFMA) का कहना है कि सोयाबीन खली की कीमतों में हाल के सप्ताहों में 40 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी हुई है, जिससे पशु आहार तैयार करने की लागत तेजी से बढ़ रही है।
बिजनेस लाइन की रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान में सोयाबीन खली की कीमत 65 से 66 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई है। इसका सीधा असर पोल्ट्री, डेयरी, पशुपालन और मत्स्य पालन से जुड़े किसानों पर पड़ रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, पशु आहार महंगा होने से किसानों की उत्पादन लागत बढ़ेगी और उनकी लाभप्रदता प्रभावित हो सकती है।
मत्स्य पालन क्षेत्र पर सबसे अधिक असर
CLFMA के अनुसार, एक्वाकल्चर (मत्स्य पालन) क्षेत्र में फीड उत्पादन लागत का लगभग 50 से 60 प्रतिशत हिस्सा होता है। ऐसे में सोयाबीन खली की बढ़ती कीमतें मछली पालन उद्योग के लिए बड़ी चुनौती बन सकती हैं। भारत वैश्विक स्तर पर समुद्री खाद्य उत्पादों का बड़ा निर्यातक बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, इसलिए गुणवत्तापूर्ण और किफायती पशु आहार की उपलब्धता बेहद जरूरी है।
खाद्य सुरक्षा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़ा मुद्दा
CLFMA की अध्यक्ष दिव्या कुमार गुलाटी ने कहा कि पोल्ट्री, पशुपालन और मत्स्य पालन क्षेत्र देश की खाद्य सुरक्षा, ग्रामीण रोजगार और निर्यात में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। यदि सोयाबीन खली की कमी और कीमतों में वृद्धि जारी रहती है, तो इसका असर किसानों की आय और पूरे पशु-आधारित कृषि तंत्र पर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि भारत यदि समुद्री खाद्य निर्यात के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व हासिल करना चाहता है, तो पशु आहार के लिए उच्च गुणवत्ता वाले प्रोटीन स्रोतों की पर्याप्त और किफायती उपलब्धता सुनिश्चित करनी होगी।
समुद्री निर्यात बढ़ाने के लक्ष्य पर असर की आशंका
हाल ही में केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा था कि भारत अगले पांच वर्षों में समुद्री खाद्य उत्पादों के निर्यात को बढ़ाकर 30 अरब डॉलर तक पहुंचा सकता है। यह वर्तमान निर्यात स्तर का लगभग ढाई गुना है। हालांकि, इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए मजबूत और स्थिर पशु आहार आपूर्ति व्यवस्था की जरूरत होगी।
CLFMA ने सरकार को दिए सुझाव
सोयाबीन खली की बढ़ती कीमतों से निपटने के लिए CLFMA ने सरकार से कई कदम उठाने की मांग की है। इनमें घरेलू फीड उद्योग के लिए सोयाबीन खली की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करना। सोयाबीन उत्पादकों के हितों की रक्षा करते हुए आपूर्ति संतुलन बनाए रखना। सोयाबीन प्रसंस्करण और मूल्य श्रृंखला ढांचे में निवेश को बढ़ावा देना। नीति निर्माताओं, किसान संगठनों, प्रसंस्करण इकाइयों और फीड निर्माताओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना। देश के लिए दीर्घकालिक प्रोटीन सुरक्षा रोडमैप तैयार करना। सोयाबीन खली की उपलब्धता और कीमतों की नियमित निगरानी के लिए प्रभावी तंत्र विकसित करना शामिल हैं।
किसानों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह मुद्दा?
सोयाबीन खली पशु आहार में प्रोटीन का प्रमुख स्रोत है। इसकी कीमत बढ़ने से पोल्ट्री, डेयरी और मत्स्य पालन की लागत बढ़ती है, जिसका असर अंततः किसानों की आय और उपभोक्ताओं तक पहुंचने वाले उत्पादों की कीमतों पर भी पड़ सकता है। ऐसे में इस समस्या का जल्द समाधान निकालना जरूरी माना जा रहा है।
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