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Soyabean: सालाना 100 टन से कम सोयाबीन उगाने वाले नाइजर से भारत ने मंगाया 3.8 लाख टन, कस्टम ने शुरू की जांच

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Devesh Saraswat Updated Sat, 10 Oct 2026 04:28 PM IST
सार

  • साल 2026 के पहले सात महीनों में भारत ने नाइजर से 3,80,868 टन सोयाबीन का आयात किया।
  • रॉयटर्स के मुताबिक, नाइजर में सोयाबीन का सालाना उत्पादन 100 टन से भी कम है।
  • कस्टम विभाग को संदेह है कि 45 प्रतिशत आयात शुल्क से बचने के लिए सोयाबीन के मूल देश की गलत जानकारी दी गई हो सकती है।
  • जांच के तहत आयातकों से माल के वास्तविक स्रोत और परिवहन से जुड़े दस्तावेज मांगे गए हैं।
  • नाइजर से खरीद रुकने पर भारत टोगो और बेनिन जैसे देशों से सोयाबीन का आयात बढ़ा सकता है।

सालाना 100 टन से कम सोयाबीन उगाने वाले नाइजर से भारत ने मंगाया 3.8 लाख टन
सालाना 100 टन से कम सोयाबीन उगाने वाले नाइजर से भारत ने मंगाया 3.8 लाख टन - फोटो : प्रतीकात्मक
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विस्तार
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साल 2026 के पहले सात महीनों में पश्चिमी अफ्रीकी देश नाइजर भारत का सबसे बड़ा घोषित सोयाबीन आपूर्तिकर्ता बनकर उभरा है। रॉयटर्स द्वारा उद्योग जगत के आकलनों के हवाले से दी गई जानकारी के मुताबिक, यह स्थिति तब है जब नाइजर में सालाना 100 टन से भी कम सोयाबीन का उत्पादन होता है। इसके बावजूद इस अवधि के दौरान भारत में नाइजर से 3,80,868 टन सोयाबीन का आयात दर्ज किया गया है। उत्पादन क्षमता से कई गुना अधिक आयात सामने आने के बाद भारतीय सीमा शुल्क (कस्टम) विभाग ने इसकी जांच शुरू कर दी है।

आयात में भारी उछाल और शुल्क छूट का पेंच
आंकड़ों के अनुसार, पिछले साल यानी 2025 की समान अवधि में नाइजर से भारत का सोयाबीन आयात शून्य था। वहीं, 2026 के शुरुआती सात महीनों में भारत का कुल सोयाबीन आयात बढ़कर रिकॉर्ड 9,09,606 टन पहुंच गया, जो 2025 की इसी अवधि में महज 1,996 टन था।

कस्टम विभाग के अनुसार, नाइजर को भारत की 'ड्यूटी-फ्री टैरिफ प्रेफरेंस' (अल्प-विकसित देशों के लिए शुल्क-मुक्त योजना) के तहत कम या शून्य आयात शुल्क की छूट प्राप्त है, जो उसे 2017 में दी गई थी। इसके उलट, पड़ोसी देश नाइजीरिया से सोयाबीन मंगाने पर 45 प्रतिशत का भारी आयात शुल्क लगता है।

संदेह जताया जा रहा है कि 45 प्रतिशत शुल्क से बचने के लिए माल नाइजर के नाम पर भेजा गया हो सकता है। विश्व बैंक और यूएन कॉमट्रेड के आंकड़ों के अनुसार, नाइजीरिया में सोयाबीन का बड़ा उत्पादन होता है और उसने 2024 में करीब 11.8 करोड़ डॉलर मूल्य का 4,72,000 टन सोयाबीन निर्यात किया था।

कस्टम विभाग का नोटिस और आयातकों की दलील
सीमा शुल्क विभाग ने आयातकों को नोटिस भेजकर कहा है कि नाइजर में सोयाबीन का उत्पादन बहुत कम है, इसलिए यह आयात उसकी सामान्य क्षमता से कहीं अधिक प्रतीत होता है। विभाग ने आयातकों से यह साबित करने को कहा है कि यह खेप वास्तव में शून्य-शुल्क छूट के योग्य है। साथ ही, चारों तरफ जमीन से घिरे (लैंडलॉक्ड) नाइजर से माल बंदरगाहों तक कैसे पहुंचा, इसका पूरा परिवहन रिकॉर्ड भी मांगा गया है।

दूसरी तरफ, भारतीय आयातकों का कहना है कि उन्होंने विदेशी विक्रेताओं द्वारा दिए गए कागजात के आधार पर ही माल मंगवाया था। एक आयातक ने बताया कि उनके लिए खुद अफ्रीका जाकर स्रोत की पुष्टि करना संभव नहीं है। हालांकि, जांच शुरू होने के बाद आयातकों ने फिलहाल नाइजर से सोयाबीन की खरीद रोक दी है।

45% शुल्क का जोखिम और टोगो-बेनिन को संभावित फायदा
कस्टम विभाग के नियमों के अनुसार, यदि जांच में यह पाया गया कि सोयाबीन के मूल देश की गलत जानकारी दी गई थी, तो आयातकों से पूरा 45 प्रतिशत आयात शुल्क वसूला जा सकता है।

नाइजर से आपूर्ति में आई इस रुकावट का फायदा टोगो और बेनिन जैसे देशों को मिल सकता है। ये दोनों देश भी भारत की शुल्क-मुक्त योजना में शामिल हैं और भारत के पुराने सप्लायर हैं। आंकड़ों के मुताबिक, 2024 में भारत ने टोगो से 2,21,619 टन और बेनिन से 92,756 टन सोयाबीन का आयात किया था। नाइजर से खरीद रुकने पर भारत की मांग इन देशों की तरफ मुड़ सकती है।


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