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Home› Khabar Junction› One Year Of Pm Dhan Dhanya Krishi Yojana How Much Work Has Been Done To Improve Agriculture In 100 Districts

पीएम धन-धान्य कृषि योजना का एक साल: 100 जिलों में खेती सुधारने पर कितना हुआ काम, क्या किसानों की बढ़ी आय? जानिए

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Mohammad Aamil Updated Sat, 10 Oct 2026 05:33 PM IST
सार

प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना का एक साल पूरा हो रहा है। जानें देश के 100 कृषि जिलों में खेती, सिंचाई, भंडारण और किसान उत्पादक संगठनों को बढ़ावा देने के लिए क्या काम हुआ।

पीएम धन-धान्य कृषि योजना का एक साल
पीएम धन-धान्य कृषि योजना का एक साल - फोटो : गांव जंक्शन
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विस्तार
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देश के 100 कृषि जिलों में खेती की पैदावार बढ़ाने, सिंचाई सुविधाएं सुधारने, किसानों को कर्ज उपलब्ध कराने और फसल कटाई के बाद भंडारण की व्यवस्था मजबूत करने के लिए शुरू की गई प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना (PMDDKY) को एक साल पूरा हो रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 11 अक्टूबर 2025 को इस योजना की शुरुआत की थी। इसका उद्देश्य उन जिलों में कृषि विकास को गति देना है, जहां खेती की उत्पादकता कम है और कृषि सुविधाओं की कमी के कारण किसानों को चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।

केंद्र सरकार ने 16 जुलाई 2025 को इस योजना को मंजूरी दी थी। छह साल की यह पहल वित्त वर्ष 2025-26 से शुरू हुई है। इसके तहत चुने गए 100 जिलों में स्थानीय जरूरतों के हिसाब से कृषि विकास की योजनाएं लागू की जा रही हैं। सरकार को उम्मीद है कि इससे खेती और उससे जुड़ी गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा तथा किसानों के लिए बेहतर अवसर तैयार होंगे।

किन जिलों को योजना में शामिल किया गया?
सरकार के मुताबिक, योजना के लिए जिलों का चयन तीन प्रमुख आधारों पर किया गया है। इनमें कृषि उत्पादकता कम होना, एक साल में कम क्षेत्र में फसल उगाया जाना और किसानों को कृषि ऋण कम मिलना शामिल है। इसके अलावा राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में कुल बोए गए क्षेत्र तथा खेती करने वाले किसानों की जोत को भी ध्यान में रखा गया है। हर राज्य और केंद्र शासित प्रदेश से कम से कम एक जिले को इस योजना में शामिल किया गया है।

योजना का उद्देश्य केवल उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि सिंचाई, फसल विविधीकरण, कृषि ऋण, भंडारण और कृषि सेवाओं में भी सुधार करना है। इसके लिए केंद्र सरकार की 11 मंत्रालयों और विभागों की 36 योजनाओं को आपस में जोड़कर लागू किया जा रहा है। इसमें राज्य सरकारों की योजनाओं और निजी क्षेत्र की भागीदारी को भी शामिल किया गया है।

तीन स्तरों पर होगी योजना की निगरानी
योजना को लागू करने और उसकी प्रगति पर नजर रखने के लिए तीन स्तरों पर समितियां बनाई गई हैं।
  1. जिला स्तर पर : जिला कलेक्टर या जिलाधिकारी की अध्यक्षता वाली समिति स्थानीय जरूरतों के आधार पर जिला कार्ययोजना तैयार करती है और उसे लागू कराती है।
  2. राज्य स्तर पर : मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली समिति जिलों की योजनाओं की समीक्षा और निगरानी करती है।
  3. राष्ट्रीय स्तर पर : केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री की अध्यक्षता वाली राष्ट्रीय कार्यकारी समिति और कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के सचिव की अध्यक्षता वाली राष्ट्रीय निगरानी समिति योजना की प्रगति पर नजर रखती हैं।

जिला कार्ययोजनाएं स्थानीय कृषि परिस्थितियों के अध्ययन के आधार पर तैयार की जाती हैं। इनमें उत्पादन बढ़ाने, सिंचाई सुधारने, भंडारण क्षमता बढ़ाने और किसानों को ऋण उपलब्ध कराने जैसे लक्ष्य तय किए जाते हैं। इन योजनाओं को संबंधित राज्य विभागों के साथ जोड़कर बजट और जरूरी मंजूरी की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाती है।

पांच महीने में बढ़ा जिलों का औसत स्कोर
योजना की प्रगति को मापने के लिए 36 योजनाओं से जुड़े 121 संकेतक तय किए गए हैं। इनमें 74 संकेतक कामकाज की प्रगति और 47 संकेतक उससे मिलने वाले परिणामों को मापते हैं। योजना का ऑनलाइन डैशबोर्ड अक्टूबर 2025 के अंतिम सप्ताह में शुरू हुआ था। नवंबर 2025 से जिलों की मासिक रैंकिंग भी शुरू कर दी गई।

केंद्र सरकार के मुताबिक, सभी 100 जिलों ने जिला कार्ययोजनाएं तैयार कर उन्हें लागू करना शुरू कर दिया है। अगस्त 2026 तक सभी जिलों ने कामकाज से जुड़े संकेतकों का आंकड़ा जमा किया। वहीं, वित्त वर्ष 2025-26 के परिणामों से संबंधित आंकड़े भी सभी जिलों ने प्रस्तुत किए। योजना के छह प्रमुख उद्देश्यों पर 100 जिलों का औसत स्कोर अप्रैल 2026 में 18.85 था, जो अगस्त 2026 में बढ़कर 46.89 हो गया। यानी इस अवधि में 28.04 अंकों का सुधार दर्ज किया गया।

अलग-अलग क्षेत्रों में कितना सुधार हुआ?
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल से अगस्त 2026 के बीच योजना के छह उद्देश्यों के औसत स्कोर में सुधार हुआ।
  • कृषि उत्पादकता बढ़ाना : 1.50 से बढ़कर 8.08
  • फसल विविधीकरण और टिकाऊ खेती : 4.08 से बढ़कर 10.18
  • फसल कटाई के बाद भंडारण क्षमता : 2.14 से बढ़कर 5.19
  • सिंचाई सुविधाओं में सुधार : 1.38 से बढ़कर 4.91
  • कृषि ऋण तक पहुंच : 2.40 से बढ़कर 6.53
  • प्रशासन और सेवाओं में सुधार : 7.41 से बढ़कर 12.05

ये आंकड़े योजना के तय संकेतकों पर दर्ज प्रगति को दर्शाते हैं। इन्हें सीधे किसानों की आय या उत्पादन में हुई वृद्धि के आंकड़ों के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

किसान उत्पादक संगठनों को भी मिल रहा बढ़ावा
योजना के पहले साल में किसानों और किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) को अपने अनुभव साझा करने और बाजार के नए अवसर तलाशने के लिए मंच भी उपलब्ध कराया गया। दिसंबर 2025 में आयोजित पीएम-डीडीकेवाई एफपीओ संगम में 15 राज्यों और योजना के 33 जिलों के 72 से अधिक एफपीओ ने भाग लिया।

इस कार्यक्रम में फसल उत्पादन बढ़ाने, बाजार तक पहुंच बनाने और किसानों की आमदनी बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा हुई। प्राकृतिक खेती, तिलहन, मधुमक्खी पालन, संरक्षित खेती, सूक्ष्म सिंचाई, संस्थागत वित्त और डिजिटल कृषि जैसे विषय भी इसमें शामिल रहे।

महाराष्ट्र में धान प्रसंस्करण से बढ़ा कारोबार
महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले में देसाईगंज फार्मर्स प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड के पास 800 किसान सदस्य हैं। इस एफपीओ ने धान प्रसंस्करण इकाई स्थापित की है, जिसकी क्षमता तीन टन प्रति घंटा है। इसके साथ 900 मीट्रिक टन क्षमता वाला गोदाम भी बनाया गया है।

इस सुविधा से एफपीओ को अपनी खास किस्म के जय श्रीराम धान के प्रसंस्करण और भंडारण में मदद मिल रही है। इससे किसानों को अपनी उपज का बेहतर मूल्य दिलाने के अवसर बढ़े हैं। कंपनी ने वित्त वर्ष 2025-26 में 1.24 करोड़ रुपये का कारोबार दर्ज किया।

कर्नाटक में नारियल उत्पाद बेचकर बेहतर दाम
कर्नाटक के तुमकुरु जिले में टिपटूर फार्मर्स प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड से 750 किसान जुड़े हैं। यह एफपीओ बॉल कोपरा यानी सूखे नारियल की गिरी एक फ्रांसीसी बहुराष्ट्रीय कंपनी को उपलब्ध कराता है। इससे किसानों को बड़े खरीदारों तक पहुंच बनाने और बेहतर कीमत पाने का अवसर मिला है।

एफपीओ ने वित्त वर्ष 2025-26 में 1.60 करोड़ रुपये का कारोबार किया। इसके अलावा, 12 सितंबर 2026 तक 138 टन से अधिक कोपरा एकत्र किया गया, जिसका मूल्य 1.9 करोड़ रुपये से ज्यादा बताया गया है।

जैसलमेर में सौर ऊर्जा से सिंचाई
राजस्थान के जैसलमेर जिले में जैसलमेर कृषि फेड प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड से 1,236 किसान जुड़े हैं। यह एफपीओ 2,000 एकड़ क्षेत्र में एकीकृत कीट प्रबंधन (आईपीएम) आधारित जीरे की खेती को बढ़ावा दे रहा है। इसके साथ 500 एकड़ क्षेत्र में सौर ऊर्जा से चलने वाली स्प्रिंकलर सिंचाई व्यवस्था का इस्तेमाल किया जा रहा है।

इस पहल का उद्देश्य पानी का बेहतर उपयोग करना, सिंचाई में सौर ऊर्जा को बढ़ावा देना और खेती की उत्पादकता सुधारना है। कम बारिश वाले क्षेत्रों में पानी का कुशल इस्तेमाल खेती को टिकाऊ बनाने में अहम भूमिका निभा सकता है।

आगे खेती की जरूरतों के हिसाब से होंगे काम
प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना का पहला साल 11 अक्टूबर 2026 को पूरा हो रहा है। इस दौरान 100 जिलों में जिला कार्ययोजनाएं तैयार करने, निगरानी व्यवस्था बनाने और कृषि से जुड़े विभिन्न कार्यक्रमों को जोड़ने पर जोर दिया गया है।

योजना की आगे की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि जिलों में तय किए गए लक्ष्यों का किसानों को कितना लाभ मिलता है। सिंचाई, बेहतर बीज, कृषि ऋण, फसल भंडारण और बाजार तक पहुंच में सुधार होने से किसानों को खेती की चुनौतियों से निपटने और अपनी आमदनी बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
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