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महंगी हो सकती है बीकानेरी भुजिया : बारिश की कमी से मोठ की फसल चौपट, दाम हुए दोगुने

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Mohammad Aamil Updated Sat, 10 Oct 2026 05:05 PM IST
सार

  • मोठ के दाम दोगुने, अब महंगी हो सकती है बीकानेरी भुजिया

  • बारिश की कमी से मोठ की फसल चौपट, बीकानेरी भुजिया उद्योग पर संकट

  • मोठ 9,300 रुपये क्विंटल तक पहुंची, भुजिया कारोबार की बढ़ी चिंता

  • खेतों में मोठ कम, मंडियों में भाव दोगुने; बीकानेरी भुजिया पर महंगाई की मार

बारिश की कमी से मोठ की फसल चौपट
बारिश की कमी से मोठ की फसल चौपट - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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पश्चिमी राजस्थान में कम बारिश के कारण मोठ की फसल को भारी नुकसान हुआ है। उत्पादन घटने से मंडियों में मोठ की आवक कम हो गई है और इसके दाम पिछले साल के मुकाबले लगभग दोगुने हो गए हैं। पिछले साल मोठ 4,200 से 5,200 रुपये प्रति क्विंटल बिक रही थी, जबकि इस बार इसका भाव बढ़कर 8,800 से 9,300 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गया है। मोठ के महंगा होने से बीकानेरी भुजिया उद्योग की लागत बढ़ने लगी है। इसका असर आगे चलकर भुजिया और मोठ से बनने वाले दूसरे खाद्य उत्पादों की कीमतों पर भी पड़ सकता है।

महंगे कच्चे माल से बढ़ेगी उत्पादन लागत
बीकानेरी भुजिया में मोठ का इस्तेमाल प्रमुख सामग्री के रूप में होता है। बीकानेर की भुजिया देश के साथ विदेशों में भी मशहूर है। ऐसे में मोठ की कीमतों में भारी बढ़ोतरी से भुजिया निर्माताओं की लागत बढ़ने की आशंका है।

मोठ का इस्तेमाल दाल और कई अन्य खाद्य उत्पाद बनाने में भी किया जाता है। यदि इसके दाम ऊंचे बने रहते हैं, तो कारोबारियों को तैयार उत्पादों की कीमतें बढ़ानी पड़ सकती हैं। इससे उपभोक्ताओं की जेब पर भी असर पड़ सकता है।

उत्पादन घटने से मंडियों में आवक कम
बीकानेर अनाज मंडी संघ के अनुसार, पश्चिमी राजस्थान में कम बारिश के कारण मोठ की पैदावार में भारी गिरावट आई है। यह फसल मुख्य रूप से बारिश पर निर्भर रहती है। इस बार मानसून से पर्याप्त पानी नहीं मिलने के कारण किसानों को नुकसान उठाना पड़ा है।

पिछले साल राज्य में मोठ का उत्पादन करीब 50 लाख बोरी हुआ था। इस सीजन में उत्पादन 20 लाख बोरी से भी कम रहने का अनुमान है। इससे मंडियों में मोठ की उपलब्धता घट गई है और कीमतों में तेजी आई है।

बीकानेर और चूरू में होता है सबसे ज्यादा उत्पादन
राजस्थान में मोठ की खेती मुख्य रूप से बीकानेर, चूरू, बाड़मेर और जैसलमेर जिलों में होती है। राज्य के कुल मोठ उत्पादन में बीकानेर और चूरू की हिस्सेदारी करीब 60 प्रतिशत बताई जाती है। बाकी 40 प्रतिशत उत्पादन बाड़मेर, जैसलमेर और अन्य क्षेत्रों से आता है।

प्रदेश में मोठ की बुवाई का कुल क्षेत्र करीब 10 लाख हेक्टेयर रहता है। इस बार कम बारिश के कारण खासकर उन किसानों को ज्यादा नुकसान हुआ, जिन्होंने मानसून की उम्मीद में देर से बुवाई की थी। फसल कम होने से किसानों की आमदनी प्रभावित हुई है। वहीं, कच्चे माल की कमी और बढ़ती कीमतों ने भुजिया सहित दूसरे खाद्य कारोबारों की चिंता बढ़ा दी है।
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