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नारियल के रस से चीनी बनाना हुआ सस्ता : वैज्ञानिकों ने तैयार की नई मशीन, पेड़ पर ही गाढ़ा होगा नारियल का रस

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Devesh Saraswat Updated Sat, 10 Oct 2026 04:32 PM IST
सार

  • केरल के वैज्ञानिकों ने नारियल के ताजे रस को पेड़ पर ही गाढ़ा करने वाली मशीन विकसित की है।
  • इस तकनीक से रस को जल्दी खट्टा होने से बचाने और उसे सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी।
  • मशीन रस को 85 से 90 डिग्री सेल्सियस तक गर्म करके उसका पानी भाप के रूप में निकालती है।
  • वैज्ञानिकों के अध्ययन के मुताबिक, नई तकनीक से नारियल चीनी बनाने की लागत करीब 53.4% तक कम हुई है।
  • 30 लीटर नारियल रस से करीब 4.5 किलो चीनी बनाने का ऊर्जा खर्च 632 रुपये से घटकर लगभग 294 रुपये रह गया।
     

नारियल के रस से चीनी उत्पादन हुआ काफी सस्ता।
नारियल के रस से चीनी उत्पादन हुआ काफी सस्ता। - फोटो : सीपीसीआरई वेबसाइट (प्रतीकात्मक)
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विस्तार
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नारियल के ताजा रस (नीरा) को सुरक्षित रखने और उससे बनने वाली नारियल से बनने वाली चीनी की लागत घटाने के लिए कृषि वैज्ञानिकों ने एक नई तकनीक विकसित की है। केरल के कासरगोड स्थित आईसीएआर-केंद्रीय रोपण फसल अनुसंधान संस्थान (सीपीसीआरआई) ने कोच्चि के नारियल विकास बोर्ड के वित्तीय सहयोग से एक ऐसा पोर्टेबल यंत्र तैयार किया है, जो पेड़ की चोटी पर ही नारियल के रस को पूरी स्वच्छता के साथ इकट्ठा कर उसे हल्का गर्म करके गाढ़ा बना देता है।

सीपीसीआरआई और नारियल विकास बोर्ड ने इस तकनीक को संयुक्त रूप से पेटेंट कराया है।

नारियल के रस को तुरंत गर्म करना क्यों जरूरी?
सीपीसीआरआई के निदेशक के.बी. हेब्बार ने 'बिजनेसलाइन' को बताया कि नारियल के फूल से निकलने वाला ताजा रस प्राकृतिक मिठास, खनिजों और पोषक तत्वों से भरपूर एक सेहतमंद पेय है।

लेकिन इसमें मिठास अधिक होने के कारण सामान्य तापमान पर यह बहुत जल्दी खट्टा होकर सड़ने (फर्मेंटेशन) लगता है। इस वजह से रस को पेड़ों से नीचे उतारने, सुरक्षित रखने और फैक्टरी तक पहुंचाने के लिए तुरंत महंगे फ्रिज या कोल्ड स्टोरेज की जरूरत पड़ती थी, जिससे लागत काफी बढ़ जाती थी। नई मशीन इस समस्या को पेड़ के ऊपर ही खत्म कर देती है।

पेड़ की चोटी पर कैसे काम करती है यह मशीन?
वैज्ञानिकों के अनुसार, यह उपकरण हल्का और आसानी से ले जाने योग्य है। पेड़ से निकलने वाला रस एक खास फूड-ग्रेड पाइप के जरिए सीधे हीटिंग चैंबर में पहुंचता है, जिससे बाहर की धूल या गंदगी से रस पूरी तरह सुरक्षित रहता है। मशीन में लगा स्टील हीटर रस को 85 से 90 डिग्री सेल्सियस तक गर्म करता है। इससे रस का पानी भाप बनकर उड़ जाता है और वह पेड़ पर ही गाढ़ा हो जाता है।

यह उपकरण बिजली से चलता है और इसे सोलर पावर सिस्टम से भी जोड़ा जा सकता है। इसमें तापमान और रस का स्तर मापने वाले खास सेंसर और भाप निकलने के रास्ते दिए गए हैं।

नारियल चीनी की उत्पादन लागत 53% तक घटी
वैज्ञानिकों द्वारा किए गए आर्थिक अध्ययन के अनुसार, पेड़ पर ही रस को गाढ़ा करने से नारियल चीनी बनाने का खर्च आधे से भी कम हो जाता है। 30 लीटर नारियल रस से लगभग 4.5 किलो चीनी बनाने में पुराने तरीके से ₹632.02 का ईंधन/बिजली खर्च होता था, जो इस मशीन के इस्तेमाल से घटकर मात्र ₹294.44 रह जाता है।

पहले कोल्ड स्टोरेज पद्धति से नारियल चीनी तैयार करने में ₹140.45 प्रति किलोग्राम की लागत आती थी, जो नई तकनीक से घटकर केवल ₹65.43 प्रति किलोग्राम रह गई है। यानी कुल उत्पादन लागत में लगभग 53.4 प्रतिशत की सीधी कमी आई है।


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