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राजस्थान में घट रही सरसों की उपज : क्या है पैदावार बढ़ाने का फॉर्मूला, कैसे बढ़ेगी किसानों की कमाई? जानें

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Mohammad Aamil Updated Sat, 10 Oct 2026 05:11 PM IST
सार

  • राजस्थान में सरसों की औसत पैदावार वर्ष 2021-22 के 1,716 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर से घटकर 2025-26 में 1,552 किलोग्राम रह गई।

  • बेहतर बीजों का चयन, समय पर बुवाई और वैज्ञानिक खेती से उत्पादन बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

  • खबर में दिए गए अध्ययन के अनुसार, उन्नत कृषि तकनीकों से किसानों की आमदनी में औसतन 12.9% तक बढ़ोतरी दर्ज की गई।

सरसों की फसल
सरसों की फसल - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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सरसों की खेती में बेहतर बीजों का चयन, समय पर बुवाई और वैज्ञानिक तरीके अपनाकर किसान अपनी पैदावार और आमदनी बढ़ा सकते हैं। एक अध्ययन के अनुसार, उन्नत कृषि तकनीकों को अपनाने से किसानों की आमदनी में औसतन 12.9 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हुई, जबकि फसल के नुकसान में 23 प्रतिशत तक कमी दर्ज की गई। ऐसे में सरसों की पैदावार बढ़ाने के लिए केवल खेती का रकबा बढ़ाना काफी नहीं है। प्रति हेक्टेयर उत्पादन बढ़ाने पर भी ध्यान देना जरूरी है।

राजस्थान में घट रही सरसों की पैदावार
आंकड़ों के मुताबिक, राजस्थान में पिछले पांच वर्षों के दौरान सरसों की औसत पैदावार में गिरावट आई है। वर्ष 2021-22 में राज्य में सरसों की औसत उपज 1,716 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर थी, जो वर्ष 2025-26 में घटकर 1,552 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर रह गई।

सरसों की बुवाई का समय नजदीक आने के साथ किसानों के सामने सही बीज चुनने और उत्पादन बढ़ाने की चुनौती है। इसके लिए किसानों को अपने क्षेत्र की जलवायु और खेत की परिस्थितियों के अनुकूल किस्म का चुनाव करना चाहिए। समय पर बुवाई और फसल की वैज्ञानिक तरीके से देखभाल करने से भी बेहतर उत्पादन हासिल करने में मदद मिल सकती है।

उन्नत बीजों से बढ़ सकती है उपज
अच्छी गुणवत्ता वाले बीजों का चयन सरसों की पैदावार बढ़ाने में अहम भूमिका निभाता है। खबर में दिए गए उदाहरणों के अनुसार, डूंगरी गांव के एक किसान ने पिछले साल हाइब्रिड बीजों का इस्तेमाल करके आठ से 10 क्विंटल अतिरिक्त उपज हासिल की।

इसी तरह कंवरपुरा गांव के एक किसान को 40 बीघा खेत में प्रति बीघा 80 किलोग्राम अतिरिक्त उत्पादन मिला। इन उदाहरणों से पता चलता है कि बेहतर बीज और वैज्ञानिक खेती के तरीके अपनाने से उत्पादन बढ़ाने की संभावना है। हालांकि, वास्तविक उपज खेत की मिट्टी, मौसम, सिंचाई और फसल प्रबंधन पर भी निर्भर करती है।

सर्वे में सामने आए बीजों के इस्तेमाल के आंकड़े
अलवर, श्रीगंगानगर और हरियाणा के रेवाड़ी जिले के 100 किसानों पर किए गए एक सर्वेक्षण में हाइब्रिड बीजों के इस्तेमाल को लेकर अलग-अलग आंकड़े सामने आए। सर्वे के अनुसार, श्रीगंगानगर में करीब 48 से 50 प्रतिशत किसान हाइब्रिड बीजों का इस्तेमाल कर रहे हैं। अलवर में यह आंकड़ा 65 से 70 प्रतिशत और रेवाड़ी में 75 से 80 प्रतिशत रहा।

अध्ययन में उन्नत तकनीक और बेहतर कृषि पद्धतियां अपनाने वाले किसानों की आमदनी में औसतन 12.9 प्रतिशत बढ़ोतरी दर्ज की गई। इससे साफ है कि सरसों की खेती में सही बीज के साथ वैज्ञानिक तरीकों को अपनाना किसानों के लिए फायदेमंद हो सकता है।
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