विज्ञापन
Home› Khabar Junction› Skm Terms 25 Hike In Wheat Msp An Insult To Farmers Dismisses Government S Claim Of 106 Profit As A Mere J

गेहूं की MSP में ₹25 की बढ़ोतरी को SKM ने बताया किसान का अपमान : 106% मुनाफे के सरकारी दावे को जुमला करार दिया

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Devesh Saraswat Updated Sun, 04 Oct 2026 11:11 AM IST
सार

  • संयुक्त किसान मोर्चा ने रबी फसलों की नई MSP को नामंजूर किया
  • गेहूं की MSP में 25 रुपये बढ़ोतरी को किसान संगठन ने नाकाफी बताया
  • SKM ने गेहूं के लिए 3,418 रुपये प्रति क्विंटल MSP की मांग रखी
  • C2+50% फॉर्मूले और सरकार के 106% मुनाफे के दावे पर सवाल
  • MSP की कानूनी गारंटी के लिए गांवों में विरोध प्रदर्शन का आह्वान

MSP तय करने के सरकारी गणित पर संयुक्त किसान मोर्चा ने उठाया बड़ा सवाल।
MSP तय करने के सरकारी गणित पर संयुक्त किसान मोर्चा ने उठाया बड़ा सवाल। - फोटो : गांव जंक्शन
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

संयुक्त किसान मोर्चा ने केंद्र सरकार द्वारा घोषित रबी फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य को नामंजूर कर दिया है। किसान संगठन ने गेहूं की एमएसपी में 25 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी को अन्नदाताओं का अपमान करार दिया है। विरोध दर्ज कराने के लिए किसान संगठन ने हर गांव में इस सरकारी आदेश की प्रतियां जलाने का आह्वान किया है।

25 पैसे प्रति किलो की बढ़ोतरी, 106% मुनाफे के दावे पर सवाल
संयुक्त किसान मोर्चा ने कहा कि गेहूं के समर्थन मूल्य में की गई यह बढ़ोतरी असल में केवल 25 पैसे प्रति किलो बैठती है। संगठन ने सरकार के उस दावे पर सवाल उठाया जिसमें कहा गया है कि नई एमएसपी से किसानों को लागत पर 106 प्रतिशत का मुनाफा मिलेगा।

एसकेएम ने इसे 106 प्रतिशत का जुमला बताते हुए कहा कि किसी भी रबी फसल को C2+50 प्रतिशथ के अनुसार भाव नहीं मिल रहा है। मोर्चे के अनुसार, सरकार की गणना A2+FL फॉर्मूले पर आधारित है, जिसमें बीज, खाद, कीटनाशक और पारिवारिक श्रम जैसी सीधी लागतें तो शामिल हैं, लेकिन किसान की अपनी जमीन का किराया और उसकी पूंजी पर लगने वाला ब्याज छोड़ दिया जाता है। संगठन का दावा है कि कृषि लागत और मूल्य आयोग के अपने आंकड़ों के हिसाब से भी गेहूं पर मुनाफा 106 प्रतिशत नहीं, बल्कि मात्र 43 प्रतिशत बनता है।

गेहूं के लिए ₹3,418 प्रति क्विंटल एमएसपी की मांग
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 30 सितंबर को 2027-28 सीजन के लिए छह रबी फसलों की एमएसपी को मंजूरी दी थी, जिसके तहत गेहूं का भाव 25 रुपये बढ़ाकर 2,610 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है। एसकेएम के अनुसार, सरकार द्वारा घोषित 2,610 रुपये का भाव CACP के C2+50% फॉर्मूले (2,744 रुपये) से भी 134 रुपये कम है। संगठन ने कहा कि गेहूं की सही C2 लागत 2,279 रुपये बैठती है, इसलिए C2+50% के फॉर्मूले के आधार पर गेहूं का समर्थन मूल्य 3,418 रुपये प्रति क्विंटल होना चाहिए।

राज्यों की सिफारिशों को नजरअंदाज करने का आरोप
एसकेएम ने कहा कि कृषि राज्य का विषय है, लेकिन केंद्र सरकार और CACP ने राज्य सरकारों की मूल्य सिफारिशों की अनदेखी की है। संगठन के अनुसार, पिछले सीजन में महाराष्ट्र ने गेहूं के लिए 4,525 रुपये, गुजरात ने 4,200 रुपये, पश्चिम बंगाल ने 3,450 रुपये और पंजाब ने 3,168 रुपये प्रति क्विंटल एमएसपी की मांग की थी। यहां तक कि हरियाणा सरकार की 2,652 रुपये की सिफारिश भी केंद्र द्वारा तय मूल्य से अधिक थी।

लागत तय करने के तरीके पर उठाए सवाल
मोर्चे ने खेती की लागत निकालने की पद्धति पर सवाल उठाते हुए कहा कि CACP की गणना 2011-12 के पुराने सूचकांक पर आधारित है और किसान के श्रम को सिर्फ एक दिहाड़ी मजदूर की तरह आंका जाता है। संगठन ने कहा कि ट्रैक्टर और पंप सेट के प्रमुख ईंधन डीजल के दाम मई महीने में मात्र 10 दिनों के भीतर चार बार में करीब 7.50 रुपये प्रति लीटर बढ़े, जबकि सिर्फ मजदूरी बढ़ने से लागत में करीब 2.5 प्रतिशत का इजाफा हुआ। इसके विपरीत, सरकार ने अन्य सभी लागतों के लिए केवल 2 प्रतिशत की ही अनुमति दी।

सरकारी खरीद के बिना एमएसपी सिर्फ कागजी भाव
फसल खरीद की धीमी रफ्तार पर चिंता जताते हुए किसान संगठन ने कहा कि 2025-26 सीजन के दौरान गेहूं की कुल फसल का लगभग एक-चौथाई हिस्सा ही खरीदा गया था। संगठन ने कहा कि बिना खरीद के एमएसपी केवल कागजों पर तय एक भाव बनकर रह जाती है।

संगठन ने मांग रखी कि ईमानदारी से आंकी गई लागत के आधार पर C2+50% फॉर्मूले पर एमएसपी की कानूनी गारंटी दी जाए। फसलों के समर्थन मूल्य में तुरंत संशोधन कर उसे मांग के अनुसार बढ़ाया जाए। राज्यों की सिफारिशों का सम्मान हो और राज्यों को बोनस देने की पूरी आजादी मिले और डीजल की कीमतों में की गई बढ़ोतरी वापस ली जाए और हर राज्य में हर फसल की सरकारी खरीद सुनिश्चित हो।

कानूनी गारंटी मिलने तक जारी रहेगा आंदोलन
एसकेएम ने 9 दिसंबर 2021 को सरकार द्वारा एमएसपी पर दिए गए लिखित आश्वासन की याद दिलाते हुए कहा कि करीब पांच साल बाद केंद्र सरकार का जवाब केवल 25 पैसे प्रति किलो के रूप में सामने आया है। संगठन ने याद दिलाया कि पहले भी किसानों ने गांवों में तीनों कृषि कानूनों की प्रतियां जलाई थीं, जिसके बाद सरकार को वे कानून वापस लेने पड़े थे।

मोर्चे ने अपने घटक संगठनों और ग्रामीण युवाओं से नए एमएसपी आदेश को पढ़कर सुनाने, उसकी प्रतियां जलाने और जिला मुख्यालयों पर विरोध प्रदर्शन में शामिल होने का आह्वान किया है। एसकेएम ने स्पष्ट किया कि जब तक C2+50% पर एमएसपी की कानूनी गारंटी नहीं मिल जाती, तब तक यह आंदोलन जारी रहेगा।


विज्ञापन
विज्ञापन