दक्षिण हरियाणा में किसानों को बाजरा बेचने में आ रही दिक्कतों को देखते हुए केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह ने शनिवार को हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से फोन पर बात की। केंद्रीय मंत्री ने मंडियों में सरकारी एजेंसियों द्वारा बाजरा न खरीदे जाने और किसानों को परेशान किए जाने पर गहरी चिंता जताई।
बाजरे में कमियां निकालकर किसानों को परेशान करने का आरोप
केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह ने मुख्यमंत्री से कहा कि राज्य सरकार की एजेंसियां किसानों की बाजरे की उपज में कमियां निकालकर उन्हें परेशान कर रही हैं। उन्होंने इलाके में बाजरा खरीद के लिए किए गए प्रबंधों और किसानों के सामने आ रही समस्याओं पर चर्चा की। साथ ही, उन्होंने मुख्यमंत्री सैनी से सरकार द्वारा तय मूल्य पर बाजरे की खरीद सुनिश्चित करने को कहा।
रेवाड़ी और महेंद्रगढ़ के उपायुक्तों से ली रिपोर्ट
शनिवार को जारी एक आधिकारिक बयान के अनुसार, मुख्यमंत्री से बात करने से पहले केंद्रीय मंत्री ने रेवाड़ी और महेंद्रगढ़ के उपायुक्तों (डीसी) से बाजरा खरीद को लेकर रिपोर्ट ली थी। उन्होंने दोनों जिलों के उपायुक्तों को किसानों की समस्याओं का तुरंत समाधान करने के निर्देश दिए।
बयान के मुताबिक, राव इंद्रजीत सिंह ने मुख्यमंत्री को बताया कि दक्षिण हरियाणा एक प्रमुख बाजरा उत्पादक क्षेत्र है और यहां बड़ी संख्या में किसान इसी फसल पर निर्भर हैं। ऐसे में खरीद प्रक्रिया में किसी भी तरह की रुकावट से किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
किसानों का एक-एक दाना तय सरकारी भाव पर खरीदा जाए
केंद्रीय मंत्री ने जोर देकर कहा कि किसानों की उपज का एक-एक दाना सरकार द्वारा तय कीमत पर खरीदा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि खरीद व्यवस्था इतनी सुचारू और मजबूत होनी चाहिए ताकि किसानों को मजबूरी में अपनी फसल औने-पौने दामों पर निजी खरीदारों को न बेचनी पड़े। बयान के अनुसार, मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने केंद्रीय मंत्री को आश्वासन दिया कि इस मामले में जरूरी और प्रभावी कदम उठाए जाएंगे।
कांग्रेस ने उठाए सवाल
इस बीच, हरियाणा कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह ने भी बाजरा खरीद को लेकर राज्य सरकार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि किसान दिन-रात मेहनत करके फसल उगाते हैं, लेकिन मंडियों में अपनी उपज बेचते समय उन्हें भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। कांग्रेस नेता ने कहा कि सरकार ने भावांतर भरपाई योजना के तहत बाजरे के लिए 2,900 रुपये प्रति क्विंटल भाव सुनिश्चित करने की बात कही थी, लेकिन खरीद में देरी की वजह से किसानों को यह भाव नहीं मिल पा रहा है।
उन्होंने बताया कि किसानों की शिकायत है कि जहां सरकार ने 2,900 रुपये का भाव घोषित किया है, वहीं उन्हें निजी खरीदारों को करीब 2,200 से 2,300 रुपये प्रति क्विंटल के भाव पर बाजरा बेचना पड़ रहा है। उन्होंने मांग की कि सरकार यह साफ करे कि किसानों को घोषित मूल्य कब मिलेगा।
राव नरेंद्र सिंह ने यह भी कहा कि किसान इस समय खाद की किल्लत, फसल के भुगतान और उचित लाभकारी मूल्य न मिलने की समस्याओं से जूझ रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार की यह जिम्मेदारी है कि किसानों को अपनी फसल बेचने के लिए एक मंडी से दूसरी मंडी न भटकना पड़े और उन्हें अपनी उपज का उचित दाम समय पर मिले।