रबी सीजन के आगमन के साथ भारत में उर्वरकों का शुरुआती स्टॉक 170.1 लाख टन है। कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, यह पिछले साल की इसी अवधि के 123 लाख टन के शुरुआती स्टॉक से 38 प्रतिशत अधिक है।
यूरिया और अन्य खादों के भंडार में उछाल
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, भारतीय खेती में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले और सर्वाधिक सब्सिडी वाले यूरिया के भंडार में सालाना आधार पर 54.26 प्रतिशत की सबसे बड़ी वृद्धि हुई है। इसके साथ यूरिया का स्टॉक 83.3 लाख टन हो गया है। वहीं, DAP का स्टॉक करीब 9 प्रतिशत बढ़कर 30.3 लाख टन और एनपीके (NPK) व एनपीकेएस (NPKS) कॉम्प्लेक्स खादों का कुल स्टॉक 36 प्रतिशत बढ़कर 56.5 लाख टन पर पहुंच गया है।
रबी सीजन के लिए 381 लाख टन खाद की आवश्यकता
केंद्रीय मंत्री शिवराज चौहान ने हाल ही में इस रबी सीजन के लिए कुल 381 लाख टन खाद की आवश्यकता का अनुमान जताया है। उनके अनुसार, इस कुल मांग में 199 लाख टन यूरिया, 55 लाख टन डीएपी (DAP), 79 लाख टन एनपीके (NPK), 31 लाख टन सिंगल सुपर फॉस्फेट (SSP) और 16 लाख टन म्यूरेट ऑफ पोटाश (MOP) शामिल है।
खरीफ में कम बिक्री से बना मजबूत बफर स्टॉक
रबी के लिए खाद का अधिक शुरुआती स्टॉक इसलिए भी बना क्योंकि खरीफ सीजन में खाद की बिक्री सरकार के अनुमान से कम रही। सरकार के अनुसार, डिजिटल बिक्री प्रणाली की सख्त निगरानी के चलते कुल खाद बिक्री में पिछले साल से करीब 27 प्रतिशत और सीमावर्ती जिलों में 37.56 प्रतिशत की गिरावट आई।
प्रमाणित बीजों की अतिरिक्त उपलब्धता
खाद के अलावा सरकार ने रबी फसलों के लिए प्रमाणित बीजों के अधिशेष (सरप्लस) होने की जानकारी दी है। मंत्रालय के मुताबिक, 307 लाख क्विंटल बीजों की मांग के मुकाबले करीब 49 लाख क्विंटल अतिरिक्त प्रमाणित और गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध हैं। सरकार ने बताया कि अनाज, आलू, दलहन और तिलहन सहित सभी मुख्य फसलों के लिए पर्याप्त बीज मौजूद हैं। राज्यों और संबंधित एजेंसियों को निर्देश दिया गया है कि वे आपसी तालमेल से इन्हें समय पर किसानों तक पहुंचाना सुनिश्चित करें।
कच्चे माल के लिए आयात पर निर्भरता और समझौते
खाद के जरूरी कच्चे माल के लिए भारत अब भी बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है। देश रॉक फॉस्फेट के लिए करीब 86 प्रतिशत, म्यूरेट ऑफ पोटाश (MOP) के लिए 100 प्रतिशत और यूरिया निर्माण में लगने वाले अमोनिया व प्राकृतिक गैस के लिए 75 से 78 प्रतिशत तक आयात पर निर्भर है।
इस आपूर्ति को सुनिश्चित करने के लिए देश ने दीर्घकालिक समझौते किए हैं। इसके तहत रॉक फॉस्फेट के लिए जॉर्डन, मोरक्को, टोगो और मॉरिटानिया से; फॉस्फोरिक एसिड के लिए मोरक्को, ट्यूनीशिया और सेनेगल से; तथा अमोनिया के लिए सऊदी अरब, ओमान, जापान और मलेशिया के साथ समझौते किए गए हैं।