तेलंगाना के पहले कृषि जीआई टैग उत्पाद तांदूर तूर दाल के सामने पैदावार में कमी और आपूर्ति का संकट खड़ा हो गया है। विकराबाद जिले में अल-नीनो के कारण बने सूखे के हालातों ने फसल को भारी नुकसान पहुंचाया है। यदि उत्पादन में गिरावट आती है और विदेशी बाजारों से मांग बढ़ती है, तो घरेलू स्तर पर इसकी उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ सकती है।
ऑस्ट्रेलिया भेजी गई 2.5 मीट्रिक टन की पहली खेप
कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा - APEDA) के सहयोग से 28 अक्टूबर को जीआई-टैग वाली तांदूर अरहर की 2.5 मीट्रिक टन की पहली खेप ऑस्ट्रेलिया के लिए रवाना की गई है। यह खेप ऐसे समय में भेजी गई है जब स्थानीय खेतों से सूखे के कारण फसल खराब होने की लगातार खबरें आ रही हैं। स्थानीय उत्पादन में भारी गिरावट से बाजार में आपूर्ति घट सकती है, जिससे खुदरा कीमतें बढ़ने की आशंका है।
विकराबाद में 1.11 लाख एकड़ में बोई गई थी फसल
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, विकराबाद जिले में साल 2025-26 के दौरान 1.67 लाख क्विंटल अरहर की पैदावार हुई थी। इस साल जिले में करीब 1.11 लाख एकड़ क्षेत्र में अरहर की खेती की गई थी। लेकिन लंबे समय से बारिश न होने और बिजली की अनियमित आपूर्ति के कारण किसानों के खेत पूरी तरह सूख गए हैं।
खड़ी फसल उखाड़कर चने की बुवाई को मजबूर किसान
फसल को सबसे ज्यादा नुकसान विकराबाद, कोडंगल और परगी क्षेत्रों में हुआ है। यहां तक कि सरपनपल्ली परियोजना से महज एक किलोमीटर की दूरी पर स्थित खेतों की फसल भी सूख गई है। पानी और बिजली की कमी के कारण आसपास के कई किसानों की अरहर की फसल पूरी तरह नष्ट हो चुकी है। इस नुकसान के बाद किसान खड़ी फसल को उखाड़कर कम समय में तैयार होने वाली फसलें, जैसे चना बोने के लिए मजबूर हो गए हैं।
एक हफ्ते में पानी नहीं मिला तो सूख जाएगी पूरी फसल
कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को सलाह दी है कि फसल को बचाने के लिए जहां भी पानी का साधन हो, वहां एक या दो बार हल्की सिंचाई जरूर करें। वहीं, किसानों का कहना है कि यदि एक हफ्ते के भीतर बारिश नहीं हुई या सिंचाई के लिए जरूरी पानी की व्यवस्था नहीं की गई, तो बची हुई खड़ी फसल भी खेतों में ही सूख जाएगी।
फर्जी बिक्री रोकने के लिए डिजिटल व्यवस्था
तांदूर अरहर को अपनी अनूठी गुणवत्ता के लिए दिसंबर 2022 में जीआई (भौगोलिक संकेत) टैग का दर्जा मिला था। तांदूर के नाम पर दूसरी दालों की बिक्री और मिलावट को रोकने के लिए कृषि विभाग ने एक डिजिटल ट्रेसबिलिटी प्रणाली शुरू की है। इसमें किसानों, उनकी जमीन, फसल और पैदावार का पूरा रिकॉर्ड दर्ज किया जा रहा है और अब तक लगभग 65,000 किसान इस व्यवस्था में पंजीकृत हैं।
अंतिम पैदावार पर निर्भर करेगा बाजार का असर
दूसरी ओर, कृषि अधिकारियों का मानना है कि इस स्थिति से घरेलू बाजार पर केवल मामूली असर पड़ने की संभावना है। अधिकारियों के अनुसार, देश के भीतर संभावित कमी कितनी होगी, यह अंतिम फसल कटाई के कुल आंकड़ों और आने वाले समय में मिलने वाले निर्यात आर्डरों के आकार पर ही निर्भर करेगा।