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FoPL SC के सवाल : पैकेज्ड फूड पर लेबलिंग में देरी से सुप्रीम कोर्ट नाराज, FSSAI से पूछा- 4 साल में क्या किया?

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Mohammad Aamil Updated Mon, 28 Sep 2026 05:52 PM IST
सार

पैकेज्ड फूड पर फ्रंट-ऑफ-पैकेज लेबलिंग लागू करने में देरी पर सुप्रीम कोर्ट ने FSSAI से सवाल किए। कोर्ट ने पूछा कि जब मामला नागरिकों के स्वास्थ्य से जुड़ा है तो नियम लागू करने में इतना समय क्यों लग रहा है।

सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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पैकेज्ड फूड पर फ्रंट-ऑफ-पैकेज लेबलिंग (FoPL) लागू करने में हो रही देरी पर सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) से सवाल किए हैं। कोर्ट ने पूछा कि जब मामला लोगों की सेहत से जुड़ा है तो नियम लागू करने में इतना समय क्यों लग रहा है।

जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस के विनोद चंद्रन की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि नागरिकों के स्वास्थ्य से जुड़े मामले में FSSAI इतना समय क्यों ले रहा है। पीठ ने FSSAI की ओर से अब तक किए गए काम की सराहना की, लेकिन कहा कि इस पूरी कवायद का उद्देश्य हासिल करने के लिए अभी काफी कुछ किया जाना बाकी है।

एक साल की स्वैच्छिक व्यवस्था पर भी सवाल
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी पूछा कि FoPL लागू करने से पहले एक साल तक स्वैच्छिक अनुपालन की जरूरत क्यों है। कोर्ट ने दोबारा सुनवाई और आपत्तियां मांगने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाया। पीठ ने पूछा, “आपने 2022 में शुरुआत की थी, पिछले चार साल में आपने क्या किया?” FSSAI की ओर से पेश वकील ने बताया कि वर्ष 2022 में शुरू की गई प्रक्रिया इंडियन न्यूट्रिशन रेटिंग (INR) स्टार-रेटिंग सिस्टम से जुड़ी थी। उस समय इस्तेमाल किया गया पैमाना मौजूदा प्रस्ताव से पूरी तरह अलग था। सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद मामले में अपना आदेश सुरक्षित रख लिया।

क्या है फ्रंट-ऑफ-पैकेज लेबलिंग?
फ्रंट-ऑफ-पैकेज लेबलिंग (FoPL) के तहत पैकेज्ड फूड के सामने ही उसके पोषण से जुड़ी जरूरी जानकारी दी जाती है। इसका मकसद उपभोक्ताओं को यह आसानी से बताना है कि किसी खाद्य उत्पाद में कितनी मात्रा में नमक, चीनी, वसा या अन्य पोषक तत्व हैं। इससे ग्राहक सामान खरीदते समय उसके पोषण संबंधी गुणों को आसानी से समझ सकेंगे और अपनी जरूरत के हिसाब से अधिक जानकारीपूर्ण फैसला ले सकेंगे।
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