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Explained: ग्रामीण ऋण में असमानता, बैंकिंग पहुंच बढ़ी, लेकिन आज भी साहूकारों पर निर्भरता बरकरार

गांव जंक्शन डेस्क, नोएडा Published by: Himanshu Mishra Updated Tue, 30 Sep 2025 12:47 PM IST
सार

ग्रामीण ऋण व्यवस्था ने प्रगति की है, लेकिन अनौपचारिक ऋणों की लागत और साहूकारों पर निर्भरता यह दिखाती है कि अभी काम पूरा नहीं हुआ।

ग्रामीणों में लोन का चलन
ग्रामीणों में लोन का चलन - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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ग्रामीण भारत में ऋण वितरण में सुधार हुआ है, लेकिन कई परिवार अब भी साहूकारों और अनौपचारिक स्रोतों पर निर्भर हैं। नाबार्ड के हालिया सर्वेक्षण (सितंबर 2025) से पता चला कि औपचारिक ऋण लेने वाले परिवारों की संख्या बढ़ी है, लेकिन 22% परिवार अभी भी ऊंची ब्याज दर पर ऋण लेते हैं। इस असमानता के कारण ग्रामीण क्षेत्र में आर्थिक सुरक्षा अभी भी कमजोर है।

ऋण असमानता के कारण
  • आय की अस्थिरता और मौसमी जोखिम
  • सरकारी हस्तांतरण घटकर मासिक आय का 9.27%
  • दस्तावेज़, गारंटी और अन्य शर्तें बाधा
लेकिन सकारात्मक पहलू ये भी है...
  • 54.5% परिवार केवल बैंक या सहकारी से ऋण लेते हैं, यह सर्वेक्षण की अब तक की सबसे ऊंची संख्या है
  • लगभग 30% परिवार interest-free ऋण अपने परिजनों और दोस्तों से लेते हैं
समाधान और सुधार की राह क्या है?
  • प्राथमिकता क्षेत्र ऋण ढांचे को मजबूत बनाना, छोटे और कम अवधि के ऋण योजनाएं। 
  • डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल करना चाहिए। 
  • आधार आधारित माइक्रोक्रेडिट, मोबाइल शिकायत निवारण, डिजिटल वॉलेट
  • फिनटेक कंपनियों के माध्यम से वैकल्पिक क्रेडिट स्कोरिंग
ग्रामीण वित्तीय शिक्षा बढ़ाना, ताकि साहूकारों पर निर्भरता कम हो
ग्रामीण ऋण व्यवस्था ने प्रगति की है, लेकिन अनौपचारिक ऋणों की लागत और साहूकारों पर निर्भरता यह दिखाती है कि अभी काम पूरा नहीं हुआ। समावेशी विकास के लिए ग्रामीण ऋण असमानता दूर करना बेहद जरूरी है। रिपोर्ट के अनुसार, 54.5% ग्रामीण परिवार अब केवल औपचारिक स्रोतों (बैंक, सहकारी) से ऋण लेते हैं।  22% परिवार पूरी तरह अनौपचारिक ऋणों (साहूकार, दोस्तों, परिवार) पर निर्भर हैं। औसत ब्याज दर 17–18%, एक तिहाई कर्जधारक 20% से अधिक भुगतान करते हैं।  बैंक शाखाओं की संख्या मार्च 2010 में 33,378 से बढ़कर दिसंबर 2024 में 56,579 हो गई है। ग्रामीण परिवारों की मासिक आय का केवल 9.27% आता है। 
 
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