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Bihar: लाल सड़न रोग से निपटेगी सीओ-238 किस्म, बीज तैयार करने के लिए गन्ना किसानों को मिलेंगे पौधे, जानें...

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Devesh Saraswat Updated Thu, 22 Oct 2026 07:02 PM IST
सार

  • पश्चिम चंपारण में गन्ने की लोकप्रिय सीओ-238 किस्म को टिश्यू कल्चर तकनीक से रोगमुक्त बनाकर दोबारा खेती में लाने की तैयारी है।
  • न्यू स्वदेशी शुगर मिल्स की प्रयोगशाला में हर साल 3.5 लाख गन्ने के पौधे तैयार किए जा रहे हैं।
  • मिल प्रशासन किसानों को करीब 3 लाख रोगमुक्त पौधे बांटेगा, ताकि वे खुद बीज तैयार कर इस किस्म का रकबा बढ़ा सकें।

पश्चिम चंपारण के गन्ना किसानों को मिलेंगे सीओ-238 किस्म के तीन लाख पौधे।
पश्चिम चंपारण के गन्ना किसानों को मिलेंगे सीओ-238 किस्म के तीन लाख पौधे। - फोटो : गांव जंक्शन
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विस्तार
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पश्चिम चंपारण में गन्ने की कभी सबसे लोकप्रिय रही सीओ-238 किस्म अब रोगमुक्त होकर फिर से खेतों में लौटने वाली है। नरकटियागंज की न्यू स्वदेशी शुगर मिल्स अपनी प्रयोगशाला में टिश्यू कल्चर तकनीक का उपयोग कर इस किस्म के रोगमुक्त पौधे तैयार कर रही है। पिछले पांच वर्षों के दौरान इस किस्म में गन्ने का कैंसर कहे जाने वाले लाल सड़न रोग का भारी प्रकोप हुआ था, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा।

किसानों को बांटे जाएंगे 3 लाख पौधे
गन्ना अनुसंधान एवं विकास विभाग की प्रयोगशाला में हर वर्ष 3.5 लाख पौधे तैयार किए जा रहे हैं। मिल प्रशासन किसानों के बीच लगभग 3 लाख स्वस्थ पौधों का वितरण करने जा रहा है। योजना के तहत हर किसान को बीज तैयार करने के लिए 500 पौधे दिए जाएंगे, ताकि वे अगले एक-दो वर्षों में पर्याप्त बीज तैयार कर इस किस्म का रकबा बढ़ा सकें।

उत्पादन में होगी 20 से 25 प्रतिशत की वृद्धि
अधिकारियों के अनुसार, जिले में करीब 70 प्रतिशत किसान पहले सीओ-238 किस्म की खेती करते थे। टिश्यू कल्चर से तैयार इन पौधों में रोग प्रतिरोधक क्षमता अधिक होगी, बढ़वार तेजी से होगी और कल्लों की संख्या भी अधिक निकलेगी। इस तकनीक से खेतों में उत्पादन 20 से 25 प्रतिशत तक बढ़ जाएगा। चीनी मिल के कार्यपालक अध्यक्ष रवींद्र कुमार तिवारी के अनुसार, मिल किसानों की आर्थिक समृद्धि के लिए पूरी निष्ठा से कार्य कर रही है।

चार अन्य किस्मों का भी हो रहा संवर्धन
संस्थान के गन्ना उप महाप्रबंधक प्रेम सिंह ने बताया कि प्रयोगशाला में सीओ-238 के अलावा चार अन्य उच्च प्रभेद वाले गन्ने के पौधों का भी टिश्यू कल्चर विधि से संवर्धन हो रहा है। इससे किसानों को बेहतर उत्पादन क्षमता और अधिक चीनी रिकवरी वाली उन्नत किस्में दोबारा अपनाने का अवसर मिलेगा।


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