वैश्विक और घरेलू बाजार में भारतीय चावल की मांग में तेजी आने के कारण धान की कीमतों में भारी उछाल देखने को मिला है। इस तेजी का फायदा धान किसानों को भी मिल रहा है। अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, कैथल जिले के किसानों ने इस बार लगभग 34 हजार एकड़ जमीन पर बासमती धान की अलग-अलग किस्मों की खेती की है, जिसका उन्हें अब अच्छा मोल मिल रहा है।
धान की इन प्रीमियम किस्मों का भाव बढ़ा
बाजार में आई इस तेजी का असर मंडियों में साफ नजर आ रहा है। कैथल जिले की मंडियों में धान की मच्छल किस्म का भाव 4800 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गया है, जो कि पिछले साल की तुलना में करीब 700 रुपये अधिक है। इसी तरह, बासमती की 1718 किस्म भी 4500 रुपये प्रति क्विंटल तक के अच्छे भाव पर बिक रही है। वहीं, इस सीजन में धान की 1509 किस्म के भाव भी उछलकर 4800 रुपये प्रति क्विंटल तक जा पहुंचे हैं, जबकि पिछले साल इसके भाव महज 3800 रुपये प्रति क्विंटल के आसपास थे।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय चावल की मांग बढ़ी, पुराना स्टॉक कम
चावल निर्यातकों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय चावल की मांग लगातार बढ़ रही है। इसके साथ ही घरेलू बाजार में चावल के पुराने स्टॉक की उपलब्धता भी घट गई है, जिससे धान की कीमतों को मजबूती मिली है। निर्यातकों का कहना है कि यदि बाजार में मांग का यही रुख आगे भी बना रहता है, तो आने वाले दिनों में धान के भाव में और भी अधिक तेजी देखने को मिल सकती है।
चावल निर्यात में हरियाणा का बड़ा योगदान
ऑल इंडिया राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल 2025 से जुलाई 2026 तक की अवधि के दौरान भारत से कुल 85 लाख मीट्रिक टन चावल का निर्यात किया गया। इस कुल निर्यात में अकेले हरियाणा राज्य की हिस्सेदारी लगभग 30 प्रतिशत रही है। आंकड़ों के मुताबिक, हरियाणा के प्रमुख बासमती उत्पादक जिलों जैसे करनाल, कैथल, कुरुक्षेत्र और पानीपत से बहुत बड़ी मात्रा में विदेशों को चावल भेजा गया है।