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अमेरिका में चमकी भारत की बेटी : कृषि शोध के लिए अमीना नाजरीन ने जीता 500 डॉलर का अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Mohammad Aamil Updated Fri, 23 Oct 2026 01:50 PM IST
सार

अमेरिका में आयोजित ग्लोबल यूथ इंस्टीट्यूट 2026 में भारतीय छात्रा अमीना नाजरीन एएस ने 500 डॉलर का पुरस्कार जीता। जानें भारतीय छात्रों की उपलब्धि और NAAS-CAST समझौते की पूरी जानकारी।

भारतीय छात्रा अमीना नाजरीन एएस ने ग्लोबल यूथ इंस्टीट्यूट में 500 डॉलर का नकद पुरस्कार जीता।
भारतीय छात्रा अमीना नाजरीन एएस ने ग्लोबल यूथ इंस्टीट्यूट में 500 डॉलर का नकद पुरस्कार जीता। - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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भारत की कृषि अनुसंधान क्षमता और युवा प्रतिभा को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है। भारतीय कृषि विज्ञान अकादमी (NAAS) की ओर से चुनी गई छात्रा अमीना नाजरीन एएस ने अमेरिका में आयोजित ग्लोबल यूथ इंस्टीट्यूट (GYI) में 500 डॉलर का पुरस्कार जीता है। यह कार्यक्रम विश्व खाद्य पुरस्कार फाउंडेशन (WFPF) के अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के तहत आयोजित किया गया था। इसमें भारत के सात स्कूली छात्रों ने हिस्सा लिया और खाद्य सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियों पर अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए।

अमेरिका के आयोवा राज्य के डेस मोइनेस शहर में 20 से 22 अक्टूबर 2026 तक आयोजित इस कार्यक्रम का विषय ‘भूख के जीतने से पहले’ (Before Hunger Wins) था। इसमें दुनिया भर के विशेषज्ञों, शोधकर्ताओं और कृषि क्षेत्र से जुड़े लोगों ने खाद्य सुरक्षा और टिकाऊ कृषि व्यवस्था पर चर्चा की।

सात भारतीय छात्रों ने पेश किए शोध पत्र
भारतीय कृषि विज्ञान अकादमी (NAAS) ने अपने चयन कार्यक्रम NAAS-YUVA के माध्यम से देश के अलग-अलग हिस्सों से सात स्कूली छात्रों को चुना था। इन छात्रों ने ग्लोबल यूथ इंस्टीट्यूट में खाद्य सुरक्षा से जुड़ी समस्याओं पर अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए।

कार्यक्रम में छात्रों को दूसरे देशों के युवाओं और विशेषज्ञों से बातचीत करने तथा खाद्य सुरक्षा और टिकाऊ कृषि व्यवस्था से जुड़े विचार साझा करने का अवसर मिला। अमीना नाजरीन एएस को 500 अमेरिकी डॉलर का नकद पुरस्कार मिला। इस उपलब्धि से भारतीय कृषि क्षेत्र में युवा प्रतिभाओं की क्षमता को वैश्विक मंच पर पहचान मिली।

भारतीय कृषि अनुसंधान का प्रदर्शन
कार्यक्रम में NAAS ने एक विशेष प्रदर्शनी भी लगाई। इसमें भारतीय कृषि विज्ञान अकादमी और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के प्रमुख प्रकाशनों को प्रदर्शित किया गया। इसके जरिए दूसरे देशों के शोधकर्ताओं, शिक्षाविदों, नीति निर्माताओं और कृषि क्षेत्र से जुड़े लोगों को भारत के कृषि अनुसंधान, वैज्ञानिक ज्ञान और नीतिगत प्रयासों की जानकारी दी गई।

कृषि शिक्षा में अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर जोर
सम्मेलन के दौरान कृषि उच्च शिक्षा को लेकर एक विशेष गोलमेज चर्चा भी आयोजित की गई। इसमें भारतीय कृषि क्षेत्र से जुड़े विदेशों में रह रहे विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया। चर्चा का मुख्य उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय सहयोग के जरिए कृषि शिक्षा को बेहतर बनाना था।

इस बैठक को ऑनलाइन संबोधित करते हुए NAAS के अध्यक्ष, कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग (DARE) के सचिव और ICAR के महानिदेशक डॉ. एमएल जाट ने कहा कि कृषि शिक्षा को भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप तैयार करने की जरूरत है।

उन्होंने जलवायु परिवर्तन, प्राकृतिक संसाधनों के क्षरण, जैव विविधता में कमी और पौष्टिक भोजन की बढ़ती मांग जैसी चुनौतियों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इन समस्याओं से निपटने के लिए कृषि शिक्षा और अनुसंधान में अंतरराष्ट्रीय साझेदारी को मजबूत करना जरूरी है।

खेती के साथ पूरी खाद्य व्यवस्था पर ध्यान देने की जरूरत
डॉ. जाट ने कहा कि कृषि को केवल फसल उत्पादन तक सीमित रखने के बजाय पूरी कृषि-खाद्य व्यवस्था और मूल्य शृंखला पर ध्यान देना चाहिए। इसमें उत्पादन के साथ प्रसंस्करण, भंडारण, वितरण और बाजार तक पहुंच जैसे पहलू भी शामिल हैं।

उन्होंने कृषि संस्थानों और उद्योगों के बीच सहयोग बढ़ाने, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ज्ञान साझा करने और भारतीय कृषि विशेषज्ञों की भागीदारी मजबूत करने पर जोर दिया। इससे ऐसे प्रशिक्षित युवाओं को तैयार करने में मदद मिलेगी, जो कृषि उद्योग की जरूरतों के अनुसार काम कर सकें।

उन्होंने कृषि अनुसंधान, शिक्षा और विकास से जुड़ी चुनौतियों पर चर्चा के लिए वैज्ञानिकों, नीति निर्माताओं, शिक्षण संस्थानों और उद्योग जगत को एक मंच पर लाने में NAAS की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया।

NAAS और अमेरिकी संस्था CAST के बीच समझौता
कार्यक्रम के दौरान भारतीय कृषि विज्ञान अकादमी (NAAS) और अमेरिका की काउंसिल फॉर एग्रीकल्चरल साइंस एंड टेक्नोलॉजी (CAST) के बीच समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। इस समझौते का उद्देश्य कृषि अनुसंधान, क्षमता विकास और वैज्ञानिक ज्ञान के आदान-प्रदान में सहयोग बढ़ाना है। इससे दोनों संस्थानों के बीच संपर्क मजबूत होने और अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक सहयोग के नए अवसर बनने की उम्मीद है।

टिकाऊ खेती और खाद्य सुरक्षा को बढ़ावा देने की पहल
डॉ. जाट ने युवा प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने और अंतरराष्ट्रीय साझेदारी मजबूत करने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि टिकाऊ खेती और वैश्विक खाद्य सुरक्षा की चुनौतियों से निपटने के लिए नए विचारों और साझा प्रयासों की आवश्यकता है।

NAAS के अनुसार, इस तरह के कार्यक्रमों से कृषि अनुसंधान, शिक्षा और किसानों तक नई तकनीक पहुंचाने की व्यवस्था को मजबूत करने में मदद मिल सकती है। साथ ही, विकासशील देशों के बीच वैज्ञानिक सहयोग बढ़ाकर टिकाऊ कृषि और खाद्य सुरक्षा के लिए नए समाधान तैयार किए जा सकते हैं।
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