धान की बुवाई का क्षेत्र घटने और बारिश की कमी के कारण देश भर में प्रीमियम गैर-बासमती चावल, जैसे सोना मसूरी, पोन्नी और स्वर्णा की कीमतों में पिछले साल के मुकाबले 10 से 25 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसका सबसे ज्यादा असर दक्षिण भारत में देखने को मिल रहा है, जहां मानसूनी बारिश की भारी कमी रही है।
कीमतों में उछाल के मुख्य कारण
व्यापारिक सूत्रों के अनुसार, दक्षिण भारत में बड़े पैमाने पर खाए जाने वाले 'सोना मसूरी' चावल की औसत बाजार कीमत पिछले साल के 44 रुपये प्रति किलो से 25 प्रतिशत बढ़कर 58 रुपये प्रति किलो हो गई है। वहीं, पूर्वी भारत में इस्तेमाल होने वाले 'स्वर्णा' (उबले) चावल की कीमत लगभग 10 प्रतिशत बढ़कर 35 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है।
राइस विला के सह-संस्थापक और सीईओ सूरज अग्रवाल के मुताबिक, कीमतों में इस उछाल का मुख्य कारण मौसम से जुड़ी दिक्कतें हैं। दक्षिण भारत में कमजोर मानसून से बांधों में पानी का स्तर गिरा है, जबकि बिहार के कुछ हिस्सों में बाढ़ और उत्तर भारत में कम बारिश ने भी आपूर्ति को प्रभावित किया है। उन्होंने बताया कि आने वाले महीनों में कीमतों का रुख रबी की फसल की संभावनाओं पर निर्भर करेगा।
रकबे में गिरावट और दक्षिण भारत का हाल
उपभोक्ता मामलों के विभाग के आंकड़ों के अनुसार, खुदरा बाजार में चावल की कुल औसत कीमत साल-दर-साल 7 प्रतिशत बढ़कर 46.44 रुपये प्रति किलो हो गई है। व्यापारियों और निर्यातकों का कहना है कि दक्षिण भारत में गैर-बासमती किस्मों की कीमतों में यह वृद्धि काफी ज्यादा है। मौजूदा खरीफ सीजन में धान का कुल रकबा पिछले सीजन की तुलना में 3.7 प्रतिशत घटकर 42.92 मिलियन हेक्टेयर रह गया है। दक्षिण भारत में इस सीजन मानसून की बारिश में लगभग 26 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। प्रमुख राज्यों में धान के रकबे में बड़ी कमी आई है, जिनमें कर्नाटक (0.46 मिलियन हेक्टेयर), तेलंगाना (0.43 मिलियन हेक्टेयर), आंध्र प्रदेश (0.18 मिलियन हेक्टेयर) और तमिलनाडु (0.15 मिलियन हेक्टेयर) शामिल हैं।
जानकारों के अनुसार, तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में कम बारिश ने सोना मसूरी, सांबा मसूरी, आरएनआर और पोन्नी जैसी प्रीमियम किस्मों के रकबे को प्रभावित किया है। कम उत्पादन की आशंका के चलते कीमतें तेजी से बढ़ी हैं।
बासमती की आवक और सरकारी भंडार की स्थिति
मंडियों में बासमती धान की आवक शुरू हो चुकी है। फिलहाल बासमती की कीमतें 4,000 रुपये प्रति क्विंटल चल रही हैं, जो पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में 30 प्रतिशत अधिक है। पंजाब के प्रमुख बासमती निर्यातक और जोसन ग्रेन्स के सीएमडी रंजीत सिंह जोसन के अनुसार, अक्टूबर के पहले सप्ताह में उत्तर प्रदेश, पंजाब और हरियाणा की मंडियों में बड़ी मात्रा में आवक होने के बाद बासमती की कीमतों में गिरावट की उम्मीद है। तब तक उत्पादन और निर्यात की स्थिति अधिक स्पष्ट हो जाएगी
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आंकड़ों की बात करें तो 2025-26 सीजन (जुलाई-जून) के लिए चावल का रिकॉर्ड उत्पादन 154.02 करोड़ टन आंका गया था, जिसमें से खरीफ उत्पादन 124.5 करोड़ टन था। वर्तमान में भारतीय खाद्य निगम (FCI) के पास 39 करोड़ टन चावल का रणनीतिक और बफर स्टॉक मौजूद है, जबकि 1 अक्टूबर के लिए बफर स्टॉक का मानक 10.25 करोड़ टन ही है। सरकार के अनुसार, इस स्टॉक में मिल मालिकों से मिलने वाला 20.6 करोड़ टन चावल अलग से शामिल है।