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Red Rot Threatens Sugarcane Cultivation In Up Older Varieties Crisis Sugar Production Down 29 In 6 Years
लाल सड़न की मार से संकट में यूपी की गन्ना खेती : पुरानी किस्म पर संकट, 6 साल में 29% घटा चीनी उत्पादन
गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली
Published by: Mohammad Aamil
Updated Mon, 28 Sep 2026 06:49 PM IST
सार
उत्तर प्रदेश में Co-0238 गन्ना किस्म पर लाल सड़न रोग का असर बढ़ने से चीनी उत्पादन 2019-20 के 126.37 लाख टन से घटकर 2025-26 में 89.52 लाख टन रह गया। अब Co-20016 जैसी नई किस्मों से उत्पादन और चीनी रिकवरी सुधारने की उम्मीद है।
उत्तर प्रदेश में गन्ने की प्रमुख किस्म Co-0238 (करण-4) पर लाल सड़न रोग का असर बढ़ने से गन्ने की पैदावार और चीनी उत्पादन प्रभावित हो रहा है। कभी राज्य के गन्ना क्षेत्र में सबसे ज्यादा बोई जाने वाली इस किस्म की जगह अब नई रोगरोधी किस्मों को बढ़ावा देने की तैयारी है। चीनी उद्योग को Co-20016 (करण-20) से काफी उम्मीदें हैं।
उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा गन्ना उत्पादक राज्य है। आंकड़ों के अनुसार, राज्य में चीनी उत्पादन 2019-20 में 126.37 लाख टन था, जो 2025-26 में घटकर 89.52 लाख टन रह गया। यानी छह साल में उत्पादन करीब 29 फीसदी कम हुआ है। इसी अवधि में चीनी मिलों में गन्ने की पेराई भी 1,118.02 लाख टन से घटकर 878.12 लाख टन रह गई। वहीं, चीनी की रिकवरी 11.73 फीसदी से घटकर 10.83 फीसदी हो गई।
नई किस्म से बढ़ी उम्मीद
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, गन्ने की पुरानी प्रमुख किस्म Co-0238 का विकल्प तैयार करने के लिए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के गन्ना प्रजनन संस्थान (ICAR-SBI) की विकसित किस्म Co-20016 को आगे बढ़ाया जा रहा है। 27 मई को हुई गन्ने पर अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना (AICRP) की वैरायटी आइडेंटिफिकेशन कमेटी की बैठक में Co-20016 को Co-0238 के संभावित विकल्प के रूप में चुना गया।
अब इस किस्म को अक्टूबर में केंद्रीय किस्म विमोचन समिति के सामने रखा जाना है। मंजूरी और आधिकारिक तौर पर किस्म जारी होने के बाद किसान इसे बसंत, गर्मी या शरद ऋतु में होने वाली बुआई में लगा सकेंगे।
तीन साल के परीक्षण में ज्यादा पैदावार
इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ISMA) ने अगस्त 2023 में ICAR-SBI के साथ मिलकर देश के उष्ण और उपोष्ण गन्ना क्षेत्रों में नई किस्मों का परीक्षण शुरू किया था। उपोष्ण क्षेत्र में Co-20016 और Co-21012 का तीन साल तक परीक्षण किया गया। इसमें दो बार मुख्य फसल और एक बार पेड़ी फसल का परीक्षण शामिल था। उत्तर प्रदेश की 11 चीनी मिलों समेत कुल 16 चीनी मिलों ने इन परीक्षणों में हिस्सा लिया।
ISMA के महानिदेशक दीपक बल्लानी के अनुसार, दोनों किस्मों के परीक्षण पूरे हो चुके हैं। Co-20016 के AICRP परीक्षण भी पूरे हो गए हैं, जबकि Co-21012 के परीक्षण अभी जारी हैं। तीन साल के परीक्षण में Co-20016 की औसत गन्ना पैदावार 144.6 टन प्रति हेक्टेयर रही। वहीं, Co-0238 की औसत पैदावार 116.4 टन प्रति हेक्टेयर रही। 10 महीने की फसल में Co-20016 में औसत सुक्रोज की मात्रा 18.7 फीसदी रही, जबकि Co-0238 में यह 18.3 फीसदी थी।
लाल सड़न रोग के खिलाफ भी बेहतर
Co-20016 की सबसे बड़ी खासियत इसका लाल सड़न रोग के CF13 पैथोटाइप के खिलाफ प्रतिरोध है। CF13 लाल सड़न फैलाने वाले फंगस Colletotrichum falcatum का बेहद प्रभावी प्रकार माना जाता है। गन्ने की फसल में लाल सड़न होने पर पौधे कमजोर पड़ जाते हैं और गन्ने की पैदावार व चीनी की रिकवरी दोनों प्रभावित होती हैं।
Co-0238 ने बदली थी यूपी की गन्ने की खेती
Co-0238 को वर्ष 2009 में जारी किया गया था। इसके बाद इस किस्म ने उत्तर प्रदेश में गन्ने की खेती में तेजी से जगह बनाई। 2019-20 तक राज्य के गन्ना क्षेत्र में इसका हिस्सा 82.2 फीसदी हो गया था। 2020-21 में यह बढ़कर 86.7 फीसदी तक पहुंच गया। मोटी डंडी, ज्यादा पैदावार और जल्दी तैयार होने जैसी खूबियों के कारण यह किस्म किसानों और चीनी मिलों के लिए काफी फायदेमंद रही। इसके आने के बाद गन्ने की औसत उत्पादकता 60 टन प्रति हेक्टेयर से कम से बढ़कर 80 टन से ज्यादा हो गई। इसमें सुक्रोज की मात्रा भी अच्छी थी, जिससे पूरे पेराई सत्र में चीनी की बेहतर रिकवरी मिली।
एक ही किस्म पर ज्यादा निर्भरता बनी समस्या
हालांकि, लंबे समय तक बड़े क्षेत्र में सिर्फ Co-0238 की खेती होने से रोग का खतरा बढ़ गया। ICAR-SBI के पूर्व निदेशक और Co-0238 के ब्रीडर बख्शी राम के अनुसार, लंबे समय तक एक ही किस्म की खेती होने से इस किस्म की रोग प्रतिरोधक क्षमता पर असर पड़ा और लाल सड़न का अधिक आक्रामक CF13 पैथोटाइप सामने आया।
उन्होंने पहले भी उत्तर प्रदेश के मध्य, पूर्वी और तराई क्षेत्रों में Co-0238 की अत्यधिक खेती को लेकर सावधानी बरतने की सलाह दी थी। इन क्षेत्रों में खेतों में जलभराव होने से लाल सड़न का खतरा बढ़ जाता है और फंगस तेजी से फैल सकता है। उनके अनुसार, गन्ने की खेती में किस्मों में विविधता रखना जरूरी है। किसी एक किस्म का हिस्सा किसी भी क्षेत्र में कुल गन्ना क्षेत्र के 40-50 फीसदी से ज्यादा नहीं होना चाहिए।
Co-21012 भी विकल्प के तौर पर सामने
Co-20016 के साथ Co-21012 को भी Co-0238 के विकल्प के रूप में देखा जा रहा है। ISMA के परीक्षण में Co-21012 की औसत पैदावार 129.4 टन प्रति हेक्टेयर रही, जबकि Co-0238 की 119.7 टन रही। Co-21012 में सुक्रोज की मात्रा भी 18 फीसदी रही, जबकि Co-0238 में यह 17.8 फीसदी थी। हालांकि, लाल सड़न के CF13 पैथोटाइप के खिलाफ Co-21012 की प्रतिरोधक क्षमता का आकलन AICRP के परीक्षण पूरे होने के बाद किया जाएगा। ये परीक्षण 2027 के मध्य तक पूरे होने की उम्मीद है।
खेत में प्रदर्शन से तय होगी नई किस्मों की सफलता
विशेषज्ञों के अनुसार, नई किस्मों के परीक्षण में अच्छे नतीजे आने के बाद भी उनकी असली सफलता किसानों के खेतों में प्रदर्शन पर निर्भर करेगी। अलग-अलग मिट्टी, मौसम, सिंचाई और खेती की परिस्थितियों में इनका प्रदर्शन देखना जरूरी होगा।
लाल सड़न से किसान भी घटा रहे गन्ने का रकबा
लाल सड़न का असर किसानों के गन्ने के रकबे पर भी दिखाई दे रहा है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के शामली जिले के खेड़ी बैरागी गांव के किसान जितेंद्र सिंह हुड्डा ने बताया कि उन्होंने 2025 में गन्ने का रकबा 8 एकड़ से घटाकर 6 एकड़ किया। 2026 में इसे और घटाकर 4 एकड़ कर दिया। बाकी जमीन पर उन्होंने मक्का, उड़द और कम अवधि वाली पूसा-1509 बासमती धान की खेती शुरू की है।
हुड्डा के मुताबिक, पहले उनके खेत में गन्ने की पैदावार 38-39 टन प्रति एकड़ तक थी, जो घटकर अब सिर्फ 22-23 टन प्रति एकड़ रह गई है। उनके अनुसार, लाल सड़न रोग से गन्ने की पैदावार में गिरावट आने के कारण किसानों का इस फसल पर भरोसा भी कम हो रहा है।
अब किस्मों में विविधता पर जोर
उत्तर प्रदेश में गन्ने की खेती और चीनी उत्पादन को बनाए रखने के लिए नई और रोगरोधी किस्मों को बढ़ावा देना अहम माना जा रहा है। Co-20016 और Co-21012 के नतीजे आने वाले समय में यह तय करने में महत्वपूर्ण होंगे कि किसान Co-0238 पर अपनी निर्भरता किस हद तक कम कर पाते हैं। इसके साथ ही, अलग-अलग क्षेत्रों की मिट्टी और मौसम के हिसाब से कई किस्मों की खेती करना लाल सड़न जैसे रोगों के जोखिम को कम करने में मदद कर सकता है।
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