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Home› Khabar Junction› Rabi Season Choose The Right Variety Of Wheat Now These Three Varieties Are Amazing You Will Get Bumper Yie

Rabi Season: अभी से गेहूं की सही किस्म का करें चुनाव, ये तीन किस्म हैं कमाल, कम समय में मिलेगी बंपर उपज...

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Devesh Saraswat Updated Mon, 28 Sep 2026 06:04 PM IST
सार

  • HD 2967 और HD 3086 यानी पूसा गौतमी को 2014 में उत्तर-पश्चिमी मैदानी क्षेत्रों के लिए जारी किया गया था।
  • दोनों किस्में सिंचित क्षेत्रों में समय पर गेहूं की बुवाई के लिए उपयुक्त बताई गई हैं।
  • HD 2967 और पूसा गौतमी की औसत उपज 5.456 टन प्रति हेक्टेयर बताई गई है।
  • HD 3090 यानी पूसा अमूल्य को प्रायद्वीपीय क्षेत्रों में सिंचित और देर से बुवाई के लिए तैयार किया गया था।
  • पूसा अमूल्य करीब 101 दिन में तैयार होती है और इसकी औसत उपज 4.21 टन प्रति हेक्टेयर बताई गई है।

 

रबी सीजन के लिए इन तीन गेहूं की किस्मों पर किसान नजर डालें।
रबी सीजन के लिए इन तीन गेहूं की किस्मों पर किसान नजर डालें। - फोटो : गांव जंक्शन
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विस्तार
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रबी सीजन में गेहूं की खेती करने वाले किसानों के लिए काम की खबर है। हम आपकों गेहूं की 3 खास किस्मों के बारे में बताने जा रहे हैं, जो बंपर उपज का वादा करती हैं। हालांकि ये किस्म एक दूसरे से कई मोर्चों पर काफी अलग हैं। बता दें कि इन तीनों किस्मों को साल 2014 में जारी किया गया था।

उत्तर-पश्चिमी मैदानी क्षेत्रों के लिए एचडी 2967 और पूसा गौतमी (एचडी 3086)
इन किस्मों की खेती पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, जम्मू-कश्मीर के कठुआ जिले, हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले और पांवटा घाटी समेत उत्तराखंड के तराई क्षेत्रों में की जा सकती है। इसके अलावा, राजस्थान में कोटा व उदयपुर संभाग को छोड़कर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में झांसी संभाग को छोड़कर बाकी सभी क्षेत्रों में किसान इनकी खेती कर सकते हैं।

सिंचाई की सुविधा वाले इलाकों में समय पर बुवाई के लिए ये दोनों किस्में उपयुक्त हैं। बुवाई के 143 दिनों में फसल पककर तैयार होती है। पैदावार की बात करें तो किसान इन दोनों किस्मों से औसतन 5.456 टन प्रति हेक्टेयर की उपज हासित कर सकते हैं।

देर से बुवाई के लिए बेहतरीन है पूसा अमूल्य (एचडी 3090)
एचडी 3090 किस्म को पूसा अमूल्य के नाम से भी जाना जाता है। यह किस्म महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, गोवा और तमिलनाडु के मैदानी इलाकों के लिए जारी की गई है। यह किस्म उन किसानों के लिए अच्छी है जो सिंचित परिस्थितियों में गेहूं की देर से बुवाई करते हैं।

पूसा अमूल्य एक जल्दी पकने वाली और अधिक तापमान को आसानी से सहने वाली किस्म है। 101 दिन में पककर तैयार होने वाली यह किस्म 4.21 टन प्रति हेक्टेयर की औसत उपज दे सकती है, लेकिन इसकी क्षमता 6.31 टन प्रति हेक्टेयर तक बताई जाती है। जानकारों के अनुसार, यह किस्म पत्ती रतुआ और तना रतुआ जैसी बीमारियों से लड़ने की उच्च क्षमता होती है। गुणवत्ता के मामले में भी यह काफी अच्छी है। इसमें 13.3 प्रतिशत प्रोटीन पाया जाता है, जिसके कारण यह किस्म ब्रेड और चपाती (रोटी) बनाने के लिए बहुत उपयुक्त मानी जाती है।


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