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रबी की खेती की तैयारी पर बड़ा मंथन: 28 सितंबर से राष्ट्रीय सम्मेलन में खाद-बीज, मौसम और फसल बीमा पर चर्चा

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Mohammad Aamil Updated Sun, 27 Sep 2026 04:01 PM IST
सार

रबी अभियान 2026 के लिए 28-29 सितंबर को नई दिल्ली में राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन होगा। इसमें खाद-बीज की उपलब्धता, मौसम का पूर्वानुमान, दलहन-तिलहन, फसल बीमा, किसान रजिस्ट्री, डिजिटल कृषि और कृषि योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन पर चर्चा होगी।

सांकेतिक तस्वीर
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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रबी सीजन की फसलों की बेहतर तैयारी और किसानों से जुड़ी योजनाओं को जमीन पर प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए दो दिवसीय राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन 28 सितंबर से नई दिल्ली में शुरू होगा। सम्मेलन में रबी फसलों के उत्पादन, खाद-बीज की उपलब्धता, मौसम, सिंचाई, फसल बीमा, डिजिटल कृषि और किसानों को मिलने वाली सुविधाओं जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी।

कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय की ओर से 28 और 29 सितंबर 2026 को भारत रत्न सी. सुब्रमण्यम सभागार, एनएएससी परिसर, पूसा, नई दिल्ली में रबी अभियान 2026 के लिए राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान सम्मेलन का उद्घाटन करेंगे। इसमें राज्यों के कृषि मंत्री, केंद्र और राज्य सरकारों के वरिष्ठ अधिकारी, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) और कृषि क्षेत्र से जुड़े अन्य विशेषज्ञ शामिल होंगे।

केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर तालमेल पर जोर
सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य केंद्र और राज्य सरकारों के बीच बेहतर तालमेल बनाकर रबी सीजन के लिए ऐसी रणनीति तैयार करना है, जिसका असर किसानों तक सीधे दिखाई दे। इसमें कृषि उत्पादन और उत्पादकता बढ़ाने, खेती को टिकाऊ बनाने और किसानों की आय बढ़ाने से जुड़े उपायों पर चर्चा होगी। हाल ही में हुए कृषि क्षेत्रीय सम्मेलनों में सामने आए सुझावों और नतीजों को भी इस सम्मेलन में चर्चा का आधार बनाया जाएगा।

दलहन-तिलहन से लेकर प्राकृतिक खेती तक पर चर्चा
सम्मेलन के पहले दिन तीन अलग-अलग विषयों पर समूह चर्चा के तीन दौर होंगे। इनमें आत्मनिर्भरता, फसल विविधीकरण और उत्पादन बढ़ाना; जलवायु के अनुकूल खेती; तथा डिजिटल कृषि, बुनियादी ढांचा, वित्त और जोखिम प्रबंधन जैसे विषय शामिल हैं।

इन चर्चाओं में दलहन, तिलहन और ऑयल पाम में आत्मनिर्भरता, बागवानी, कपास, बीजों की उपलब्धता, प्राकृतिक खेती, मिट्टी की सेहत और कृषि मशीनरी जैसे मुद्दों पर विचार किया जाएगा। इसके अलावा किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) के लिए वित्त और सुविधाएं, कृषि उपज की बेहतर बिक्री, पीएम धन-धान्य कृषि योजना, किसान क्रेडिट कार्ड, डिजिटल कृषि, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, फसल सुरक्षा और कृषि आंकड़ों से जुड़े विषयों पर भी चर्चा होगी।

राज्यवार समस्याओं के समाधान पर बनेगी योजना
सम्मेलन में रबी सीजन के दौरान राज्यों के सामने आने वाली प्रमुख समस्याओं और उनकी स्थानीय जरूरतों की पहचान की जाएगी। इसके आधार पर ऐसी कार्ययोजना तैयार करने पर जोर रहेगा, जिसे राज्य स्तर से लेकर गांव तक प्रभावी तरीके से लागू किया जा सके। योजनाओं के बीच बेहतर तालमेल, किसानों तक सुविधाएं पहुंचाने की व्यवस्था मजबूत करने और सरकारी योजनाओं का जमीन पर बेहतर असर सुनिश्चित करने पर भी चर्चा होगी।

मौसम, खाद और बीज की उपलब्धता भी एजेंडे में
सम्मेलन के दूसरे दिन क्षेत्रीय सम्मेलनों और पहले दिन की चर्चाओं के निष्कर्षों पर विचार किया जाएगा। इसमें रबी सीजन के लिए मौसम का पूर्वानुमान, उर्वरकों की उपलब्धता और संतुलित उपयोग जैसे किसानों से सीधे जुड़े मुद्दे प्रमुख रहेंगे। इसके साथ डिजिटल कृषि मिशन, किसान रजिस्ट्री, डिजिटल फसल सर्वे और एग्रीस्टैक पर भी चर्चा होगी। दलहन में आत्मनिर्भरता, खाद्य तेलों का उत्पादन बढ़ाने, फसल और बीज की स्थिति, नई किस्मों को अपनाने और कृषि उपज के बेहतर विपणन पर भी विचार किया जाएगा।

राज्यों के कृषि मंत्री रखेंगे अपने सुझाव
सम्मेलन में राज्यों के कृषि मंत्रियों को अपने राज्यों की कृषि प्राथमिकताओं, रबी सीजन की तैयारियों और किसानों से जुड़ी समस्याओं को सामने रखने का अवसर मिलेगा। राज्यों से मिले सुझावों और समूह चर्चाओं के आधार पर रबी अभियान 2026 के लिए साझा रणनीति तैयार की जाएगी। समापन सत्र में रबी फसलों का उत्पादन बढ़ाने, किसानों को बेहतर सुविधाएं देने और खाद्य एवं पोषण सुरक्षा मजबूत करने के लिए कार्ययोजना तैयार करने पर जोर रहेगा।
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