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मन की बात में छाया प्रतापगढ़ का आंवला : पीएम मोदी बोले- ODOP से किसानों और महिलाओं को मिला बाजार

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Mohammad Aamil Updated Sun, 27 Sep 2026 03:25 PM IST
सार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ में प्रतापगढ़ के आंवला उत्पादों का जिक्र किया। ODOP के तहत आंवला प्रसंस्करण से जुड़ी करीब 100 इकाइयां काम कर रही हैं। स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं कैंडी, मुरब्बा, जूस, अचार और पाचन चूर्ण जैसे उत्पाद बनाकर नए बाजारों तक पहुंच बना रही हैं।

मन की बात में छाया प्रतापगढ़ का आंवला
मन की बात में छाया प्रतापगढ़ का आंवला - फोटो : गांव जंक्शन
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विस्तार
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जिस आंवले की खेती प्रतापगढ़ के किसान पीढ़ियों से करते आ रहे हैं, वही अब किसानों और ग्रामीण महिलाओं की आमदनी बढ़ाने का जरिया बन रहा है। आंवले से कैंडी, मुरब्बा, जूस, अचार और पाचन चूर्ण जैसे उत्पाद तैयार कर उन्हें बाजार तक पहुंचाया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ में प्रतापगढ़ के इस मॉडल का जिक्र करते हुए बताया कि एक जिला एक उत्पाद (ODOP) के जरिए स्थानीय फसल को प्रसंस्करण और कारोबार से जोड़कर रोजगार और कमाई के नए अवसर बनाए जा रहे हैं।

प्रतापगढ़ में आंवला प्रसंस्करण से जुड़ी करीब 100 इकाइयां काम कर रही हैं। इनमें स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं भी बड़ी भूमिका निभा रही हैं। इससे आंवले की खेती और उससे जुड़े उत्पादों को स्थानीय बाजार से आगे पहुंचाने में मदद मिल रही है।

आंवले से तैयार हो रहे कई उत्पाद
प्रधानमंत्री ने देवगढ़ कमासी गांव के सावित्री फुले स्वयं सहायता समूह का उदाहरण दिया। समूह से जुड़ी महिलाएं आंवले से कैंडी, मुरब्बा और जूस बना रही हैं। ODOP के माध्यम से उन्हें नए बाजारों तक पहुंच बनाने का अवसर मिला है।

इसी तरह विंध्यवासिनी स्वयं सहायता समूह की महिलाएं आंवले का अचार, पाचन चूर्ण और अन्य उत्पाद तैयार कर रही हैं। समूह को प्रसंस्करण के लिए मशीनरी, ऋण की सुविधा और स्थानीय व्यापार मेलों में शामिल होने के अवसर मिले हैं। इससे महिलाओं के कारोबार और आय को बढ़ावा मिला।

स्थानीय फसल को बड़े बाजार तक पहुंचाने पर जोर
प्रधानमंत्री ने कहा कि देश के हर क्षेत्र की अपनी खास पहचान है। कहीं विशेष फल और फसलें हैं तो कहीं पारंपरिक कला और हुनर। ODOP का उद्देश्य इन स्थानीय विशेषताओं को बाजार से जोड़ना है।उन्होंने कहा कि गांवों और छोटे शहरों के उत्पादों को केवल स्थानीय बाजार तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उन्हें देश के दूसरे हिस्सों और वैश्विक बाजारों तक पहुंचना चाहिए। इससे ‘वोकल फॉर लोकल’ को भी बढ़ावा मिलेगा और आत्मनिर्भरता की दिशा में मदद मिलेगी।

पोषण के लिए स्थानीय खाद्य पदार्थों को बढ़ावा
प्रधानमंत्री ने सितंबर के पोषण माह का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि अलग-अलग राज्यों में स्थानीय और पौष्टिक खाद्य पदार्थों को बढ़ावा देने के लिए कई पहल की जा रही हैं। छत्तीसगढ़ में ‘हर घर मुनगा-घर-घर मुनगा’ अभियान चलाया जा रहा है। गुजरात में मिलेट्स से बने व्यंजनों की प्रतियोगिता आयोजित की गई, जिसमें दो लाख से ज्यादा लोग हिस्सा ले चुके हैं। महाराष्ट्र में शिक्षक, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और बच्चों के माता-पिता पोषण जागरूकता अभियान से जुड़ रहे हैं। मिजोरम में भी लोगों ने पोषण वाटिकाओं की देखभाल के लिए अभियान शुरू किया है।

9 करोड़ लाभार्थी पोषण ट्रैकर से जुड़े
पीएम मोदी ने बताया कि आंगनवाड़ी केंद्रों को डिजिटल पोषण ट्रैकर से जोड़ा गया है। करीब 9 करोड़ लाभार्थी इसमें पंजीकृत हो चुके हैं। इससे बच्चों, गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं की देखभाल को बेहतर बनाने में मदद मिल रही है।

पर्यावरण संरक्षण के उदाहरण भी गिनाए
‘मन की बात’ में प्रधानमंत्री ने असम के सोनाई रुपाई वन्यजीव अभयारण्य का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि अतिक्रमण हटाए जाने के बाद यहां हाथियों की वापसी हुई है। असम में पिग्मी हॉग के संरक्षण कार्यक्रम का भी उदाहरण दिया गया। छह पिग्मी हॉग से शुरू हुए संरक्षण प्रयास के बाद इनकी संख्या 190 से अधिक हो गई है।

सुंदरबन की महिलाएं लगा रहीं मैंग्रोव
पश्चिम बंगाल के सुंदरबन में महिलाओं द्वारा मैंग्रोव के जंगल तैयार करने के प्रयास का भी प्रधानमंत्री ने उल्लेख किया। इनमें कई महिलाएं ऐसी हैं, जिन्होंने बाघ के हमले में अपने पति को खो दिया। मैंग्रोव के पेड़ गांवों के लिए प्राकृतिक सुरक्षा कवच का काम कर रहे हैं और इन महिलाओं को आजीविका का साधन भी मिल रहा है।

प्रधानमंत्री ने लोगों से पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि प्रकृति को बचाने का हर प्रयास आने वाली पीढ़ियों के प्रति जिम्मेदारी है।
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