इन तीन जिलों में सबसे ज्यादा मामले और एफआईआर
प्रशासन की रिपोर्ट के अनुसार, तरनतारन, अमृतसर और फिरोजपुर जिलों में अकेले 672 मामले सामने आए हैं। इनमें सबसे अधिक 397 मामले तरनतारन में, 171 अमृतसर में और 104 मामले फिरोजपुर में दर्ज किए गए हैं। इन घटनाओं को रोकने के लिए अधिकारियों ने 349 मामलों में पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने के एवज में 17 लाख रुपये से अधिक का जुर्माना लगाया है, जिसमें से अब तक 13 लाख रुपये से ज्यादा की वसूली कर ली गई है। इसके साथ ही, सरकारी आदेशों का उल्लंघन करने पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 223 के तहत कुल 246 एफआईआर भी दर्ज की गई हैं। इनमें से 165 मामले तरनतारन और 24 मामले अमृतसर में दर्ज हुए हैं।
रोकथाम के लिए उच्च स्तरीय बैठक और निर्देश
हर साल 1 अक्टूबर से धान की सरकारी खरीद शुरू होती है, लेकिन पराली जलाने की निगरानी इसके दो हफ्ते पहले 15 सितंबर से ही शुरू कर दी जाती है। स्थिति को देखते हुए, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) के अध्यक्ष राजेश वर्मा की अगुवाई में एक उच्च स्तरीय टीम ने पिछले हफ्ते तरनतारन और अमृतसर के अधिकारियों के साथ बैठक की। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य पराली जलाने की घटनाओं को कम करना और पूरी तरह से खत्म करना था।
आयोग ने स्पष्ट किया है कि जहां भी संभव हो, थर्मल पावर प्लांट, ईंट भट्ठों और उद्योगों में पराली का इस्तेमाल ईंधन के रूप में किया जाना चाहिए। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे नियमित रूप से गांवों का दौरा करें और किसानों को पराली प्रबंधन के लिए उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी दें। साथ ही, यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि किसानों तक मशीनरी और जरूरी संसाधन समय पर पहुंचें। तरनतारन में सबसे ज्यादा मामले सामने आने के कारण वहां के उपायुक्त (डीसी) को विशेष निर्देश दिया गया है कि वे इस मुद्दे को अपनी प्राथमिकता में रखें और रोकथाम के काम को तुरंत मजबूत करें।