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National Workshop: पंचायतों की जमीन से होगी कमाई, गांवों में लगेंगे ईवी चार्जिंग और बैटरी स्वैपिंग स्टेशन

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Mohammad Aamil Updated Sat, 31 Oct 2026 06:49 PM IST
सार

केंद्र सरकार देशभर में पंचायतों की जमीन पर ईवी चार्जिंग और बैटरी स्वैपिंग स्टेशन लगाएगी। इससे ग्राम पंचायतों को नियमित आमदनी होगी और गांवों में इलेक्ट्रिक वाहनों की सुविधा बढ़ेगी।

केंद्रीय पंचायती राज, मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह
केंद्रीय पंचायती राज, मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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गांवों को आर्थिक रूप से मजबूत और आत्मनिर्भर बनाने के लिए केंद्र सरकार पंचायतों की जमीन का इस्तेमाल कमाई के नए साधन के रूप में करेगी। इसके तहत देशभर में पंचायतों की जमीन पर इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) के चार्जिंग और बैटरी बदलने के स्टेशन लगाए जाएंगे। इससे पंचायतों को नियमित आमदनी होगी और ग्रामीण इलाकों में इलेक्ट्रिक वाहनों के इस्तेमाल को भी बढ़ावा मिलेगा।

केंद्रीय पंचायती राज, मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने 30 अक्टूबर को नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला में यह बात कही। पंचायती राज मंत्रालय की ओर से आयोजित इस कार्यशाला में देशभर से 400 से अधिक लोगों ने हिस्सा लिया। इस दौरान जन योजना अभियान (पीपुल्स प्लान कैंपेन) 2026-27 की पुस्तिका भी जारी की गई।

कार्यशाला में पंचायती राज मंत्रालय और कन्वर्जेंस एनर्जी सर्विसेज लिमिटेड (CESL) के बीच समझौता हुआ। CESL, ऊर्जा दक्षता सेवा लिमिटेड (EESL) की पूर्ण स्वामित्व वाली कंपनी है। समझौते के तहत देशभर में पंचायतों की जमीन पर ईवी चार्जिंग और बैटरी बदलने के स्टेशन स्थापित किए जाएंगे।

पंचायतों को अपनी कमाई बढ़ाने की जरूरत
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि विकसित भारत 2047 का लक्ष्य हासिल करने के लिए पंचायतों का मजबूत और आत्मनिर्भर होना जरूरी है। इसके लिए ग्राम सभाओं को विकास योजनाएं बनाने में सक्रिय भूमिका निभानी होगी। पंचायतों को सरकारी अनुदान पर निर्भर रहने के बजाय अपनी आमदनी के साधन भी विकसित करने चाहिए।

उन्होंने बताया कि केंद्रीय मंत्रिमंडल ने प्रधानमंत्री विकसित ग्राम स्वराज योजना (PM VGSY) को मंजूरी दी है। इस योजना का उद्देश्य गांवों में बेहतर प्रशासन और विकास व्यवस्था तैयार करना है। इसके तहत लोगों को सरकारी योजनाओं की जानकारी देना, ग्राम स्तर पर चर्चा और भागीदारी बढ़ाना, केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं को जोड़ना तथा पंचायत प्रतिनिधियों को प्रशिक्षण देना शामिल है। मंत्री ने कहा कि पंचायतों को अपनी कमाई बढ़ानी होगी। इससे वे प्रदर्शन के आधार पर मिलने वाले अनुदान की पात्र बन सकेंगी। उन्होंने सभी संबंधित पक्षों से मिलकर पंचायतों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने की अपील की।

पंचायत विकास योजनाओं में शामिल होंगी स्थानीय जरूरतें
पंचायती राज मंत्रालय के सचिव डॉ. विनीत जोशी ने कहा कि वर्ष 2018 से चल रहा जन योजना अभियान 'सबकी योजना, सबका विकास' पंचायतों की विकास योजनाएं तैयार करने का एक मजबूत माध्यम बन गया है। इसके जरिए ग्राम, ब्लॉक और जिला पंचायतों की विकास योजनाएं तैयार की जाती हैं। साथ ही सतत विकास लक्ष्यों को स्थानीय स्तर पर लागू करने और अलग-अलग सरकारी योजनाओं को एक साथ जोड़ने पर काम किया जाता है।

उन्होंने बताया कि 16वें वित्त आयोग ने वर्ष 2026 से 2031 की अवधि के लिए देश के 28 राज्यों की पंचायतों और ग्रामीण स्थानीय निकायों को कुल 4.35 लाख करोड़ रुपये के अनुदान की सिफारिश की है। ऐसे में पंचायतों की जिम्मेदारी बढ़ गई है कि वे इस राशि का सही इस्तेमाल करें।

उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायत विकास योजना (GPDP) केवल सरकारी योजनाओं या उपलब्ध बजट तक सीमित नहीं होनी चाहिए। इसमें गांव के लोगों की जरूरतों और उनकी प्राथमिकताओं को जगह मिलनी चाहिए। पंचायतों की अपनी आमदनी बढ़ाने से जुड़े उपाय भी इन योजनाओं का हिस्सा होने चाहिए।

पानी और कचरा प्रबंधन पर भी पंचायतों की जिम्मेदारी
पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के सचिव अशोक केके मीणा ने कहा कि गांवों में साफ पानी और स्वच्छता की सुविधाएं बनाए रखने में पंचायतों की अहम भूमिका है। उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायत विकास योजनाओं में पानी के स्रोत, उसकी गुणवत्ता, नियमित आपूर्ति, रखरखाव और कचरा प्रबंधन जैसे मुद्दों को शामिल किया जाना चाहिए।

उन्होंने पानी और स्वच्छता सेवाओं को लंबे समय तक बनाए रखने के लिए उचित उपयोग शुल्क वसूलने पर भी जोर दिया। इससे पंचायतों की अपनी आमदनी बढ़ेगी और वे आर्थिक रूप से मजबूत बन सकेंगी।

पंचायत की जमीन बनेगी कमाई का जरिया
पंचायतों की जमीन पर ईवी चार्जिंग और बैटरी बदलने के स्टेशन लगाने की पहल से गांवों में कमाई का नया रास्ता खुलेगा। इसके लिए पंचायतों को उपयुक्त जगहों की पहचान करने में मदद दी जाएगी। CESL जगह का आकलन करने, मांग के अनुसार उपकरण उपलब्ध कराने, स्टेशन लगाने, जांच, संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी संभालेगी। ये स्टेशन दोपहिया, तिपहिया और चारपहिया वाहनों के साथ मध्यम और भारी वाहनों के लिए भी लगाए जा सकेंगे। राज्य और राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे उपयुक्त पंचायत भूमि पर भी ऐसे स्टेशन विकसित करने की योजना है।

इससे पंचायतों को नियमित आमदनी मिलेगी। इस पैसे का इस्तेमाल गांव की सड़क, पानी, सफाई, बुनियादी सुविधाओं और सामुदायिक विकास के कामों में किया जा सकेगा। साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए चार्जिंग की सुविधा बढ़ेगी और प्रदूषण कम करने में मदद मिलेगी।

मंत्रालय ने हाल ही में पंचायतों की अपनी आमदनी बढ़ाने के लिए मॉडल पंचायत कर, दर और शुल्क नियम भी जारी किए हैं। इन नियमों का उद्देश्य पंचायतों को स्थानीय स्तर पर पारदर्शी तरीके से आय जुटाने का अवसर देना है। कार्यशाला के बाद राज्यों, जिलों और ब्लॉक स्तर पर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इनके जरिए पंचायतों को वित्त वर्ष 2027-28 के लिए बेहतर और लोगों की भागीदारी वाली विकास योजनाएं तैयार करने की जानकारी दी जाएगी।
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