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Punjab Ban On Sugarcane Ethanol Procurement Setback For Farmers Sugar Mills Industries Also Likely Affected
पंजाब : गन्ने से इथेनॉल की खरीद पर रोक से किसानों को झटका? चीनी मिलों और उद्योगों पर भी असर की आशंका
गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली
Published by: Mohammad Aamil
Updated Thu, 22 Oct 2026 05:28 PM IST
सार
केंद्र की E20 नीति के तहत गन्ने से बने इथेनॉल की खरीद पर रोक को लेकर पंजाब फोरम ने चिंता जताई है। जानें किसानों, चीनी मिलों, मक्का उद्योग और भूजल पर संभावित असर और सात प्रमुख सुझाव।
केंद्र सरकार के वर्ष 2026-27 के इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम (E20) के तहत गन्ने के रस, चीनी की चाशनी और बी-हैवी शीरे से बने इथेनॉल की खरीद नहीं करने के फैसले का पंजाब के गन्ना किसानों और सहकारी चीनी मिलों पर असर पड़ सकता है। इससे पोल्ट्री और डेयरी उद्योगों की लागत बढ़ने के साथ भूजल संसाधनों पर भी दबाव बढ़ने की आशंका है। यह बात स्वतंत्र थिंक टैंक शिरोमणि पंजाब फोरम ने अपने एक चर्चा-पत्र में कही है।
बाबुशाही में प्रकाशित खबर के अनुसार, फोरम ने बुधवार को 11 पन्नों का एक चर्चा-पत्र जारी किया। इसका शीर्षक ‘स्वीट आर द यूजेज ऑफ एडवर्सिटी - एंड डाइवर्सिटी’ है। इसे फोरम के संस्थापक और संयोजक तथा पंजाब के पूर्व विशेष मुख्य सचिव केबीएस सिद्धू ने तैयार किया है। फोरम ने संबंधित पक्षों से इसमें दिए गए सुझावों की समीक्षा करने और अपनी राय साझा करने की अपील की है।
गन्ने से बने इथेनॉल की खरीद पर रोक
केंद्र सरकार के फैसले के अनुसार, सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियां वर्ष 2026-27 के E20 कार्यक्रम के लिए गन्ने के रस, चीनी की चाशनी और बी-हैवी शीरे से बने इथेनॉल की खरीद नहीं करेंगी। हालांकि, शराब बनाने में इस्तेमाल होने वाले अल्कोहल पर यह रोक लागू नहीं होगी, क्योंकि इसका नियमन राज्य सरकारें करती हैं।
फोरम का कहना है कि इस फैसले से गन्ना किसानों को भुगतान मिलने में देरी हो सकती है। उन सहकारी चीनी मिलों को भी नुकसान हो सकता है, जिन्होंने इथेनॉल बनाने के लिए डिस्टिलरी स्थापित करने में निवेश किया है।
इसके अलावा, इथेनॉल बनाने वाली इकाइयों की मक्के की मांग बढ़ सकती है। इससे पोल्ट्री, डेयरी और स्टार्च उद्योगों को मक्का खरीदने के लिए ज्यादा कीमत चुकानी पड़ सकती है। इससे इन उद्योगों की उत्पादन लागत बढ़ने की आशंका है।
चावल से इथेनॉल बनाने में पानी की खपत ज्यादा
फोरम ने अपने चर्चा-पत्र में अलग-अलग फसलों से एथेनॉल बनाने के लिए जरूरी पानी की मात्रा की तुलना की है। दस्तावेज में दिए गए आंकड़ों के अनुसार, एक लीटर इथेनॉल बनाने के लिए चावल से करीब 10,790 लीटर, मक्के से 4,670 लीटर और गन्ने से 3,630 लीटर पानी की जरूरत होती है।
चर्चा-पत्र में भारतीय खाद्य निगम (FCI) के चावल से इथेनॉल बनाने के लिए 325 करोड़ लीटर की निविदा प्रक्रिया का भी जिक्र है। दस्तावेज के मुताबिक, FCI यह चावल डिस्टिलरी इकाइयों को 2,390 रुपये प्रति क्विंटल की दर से बेच रहा है, जबकि इसकी आर्थिक लागत करीब 4,100 रुपये प्रति क्विंटल बताई गई है।
फोरम ने इस अंतर और चावल की खेती में इस्तेमाल होने वाले भूजल को लेकर चिंता जताई है। उसका मानना है कि इथेनॉल उत्पादन के लिए कच्चे माल का चयन करते समय पानी की खपत और उसकी आर्थिक लागत को भी ध्यान में रखना चाहिए।
इथेनॉल उत्पादन की कीमत पंजाब को तीन स्तरों पर चुकानी पड़ती है- सिद्धू
केबीएस सिद्धू के अनुसार, ईंधन बनाने के लिए चावल का इस्तेमाल करने से पंजाब को तीन स्तरों पर लागत उठानी पड़ती है। पहली, धान की खेती के लिए भूजल निकालने में; दूसरी, पानी निकालने के लिए दी जाने वाली मुफ्त बिजली में; और तीसरी, FCI की आर्थिक लागत और चावल के बिक्री मूल्य के बीच के अंतर में।
सिद्धू का कहना है कि मौजूदा स्थिति पंजाब में फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने का अवसर भी बन सकती है। इसके तहत पानी की ज्यादा खपत वाली वसंतकालीन मक्के की खेती के विकल्प के रूप में खरीफ मक्का उत्पादन को प्रोत्साहित किया जा सकता है।
गन्ने से बने इथेनॉल पर स्थायी रोक के बजाय वैकल्पिक व्यवस्था का सुझाव
शिरोमणि पंजाब फोरम ने गन्ने से बने इथेनॉल पर स्थायी रोक लगाने के बजाय एक पारदर्शी व्यवस्था बनाने का सुझाव दिया है। इसके तहत चीनी के उपलब्ध अंतिम भंडार को ध्यान में रखते हुए तय किया जाए कि कितनी चीनी को इथेनॉल बनाने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।
चर्चा-पत्र में सात प्रमुख सुझाव दिए गए हैं। इनमें कच्चे माल की कीमत तय करते समय उसकी पानी की खपत को भी शामिल करना और पंजाब में खरीफ मक्का उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए विशेष व्यवस्था बनाना शामिल है। फोरम ने खरीफ मक्के की सुनिश्चित खरीद और मंडियों में अनाज सुखाने वाली मशीनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने का भी सुझाव दिया है।
इसके अलावा, भूजल संकट वाले क्षेत्रों में वसंत और गर्मियों के दौरान मक्के की बुवाई के लिए तय समय-सीमा निर्धारित करने की सिफारिश की गई है। फोरम ने E20 कार्यक्रम की आपूर्ति शृंखला से आनुवंशिक रूप से संशोधित (GM) मक्के को बाहर रखने और इथेनॉल कार्यक्रम के लिए देशभर में पानी के इस्तेमाल का ऑडिट कराने का सुझाव भी दिया है।
अन्य सिफारिशों में पंजाब की सहकारी चीनी मिलों को बी-हैवी शीरे से इथेनॉल बनाने का विकल्प उपलब्ध रखना और डिस्टिलरी लगाने तथा अपशिष्ट जल के निस्तारण से जुड़े नियम सख्त करना शामिल है। फोरम का मानना है कि एथेनॉल नीति बनाते समय किसानों की आय, चीनी मिलों के निवेश, उद्योगों की लागत और भूजल संरक्षण के बीच संतुलन बनाना जरूरी है।
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