बीते खरीफ सीजन में सूखे की मार झेलने वाले किसानों के लिए एनसीपी नेता सुप्रिया सुले ने एक लाख रुपये प्रति हेक्टेयर की दर से आर्थिक मदद की मांग की है। गुरुवार को उन्होंने महाराष्ट्र सरकार से आग्रह किया कि वह अपनी कल्याणकारी योजनाओं के तहत किसानों की रुकी हुई सहायता राशि तुरंत जारी करे। बता दें कि प्रदेश की कुल 358 में से 305 तहसीलें इस समय सूखे की चपेट में हैं।
राजनीति का नहीं, इंसानियत और सहयोग का समय
सुप्रिया सुले ने बताया कि पार्टी प्रमुख शरद पवार ने भी सरकार को पत्र लिखकर सूखा प्रभावित किसानों के लिए राहत की मांग की है। उन्होंने साफ किया, हमारा इरादा खोखली राजनीति करने का नहीं है। हमने सहयोग का रवैया अपनाया है क्योंकि यह वह समय है जब इंसानियत सबसे ज्यादा मायने रखती है। सुले ने कहा कि सूखे और लगातार बढ़ती महंगाई के कारण किसान भारी परेशानियों का सामना कर रहे हैं।
बैंकों से किसानों को परेशान न करने की अपील
अपनी मांगों को रखते हुए सुले ने बैंकों से आग्रह किया है कि वे इस मुश्किल समय में किसानों को प्रताड़ित न करें। इसके साथ ही, उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार गारंटी वाले काम तुरंत शुरू करने की मांग की। 'नमो किसान योजना' और राज्य की अन्य किसान सहायता योजनाओं का जिक्र करते हुए सुले ने आरोप लगाया कि राज्य के हिस्से की सहायता राशि का एक हिस्सा अभी तक नहीं दिया गया है, जबकि किसान केंद्र और राज्य दोनों से सालाना मदद पाने के हकदार हैं।
सरकार ने दी 5,000 रुपये की शुरुआती राहत
राज्य में सूखे के गंभीर हालात को देखते हुए, हाल ही में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सूखा प्रभावित किसानों के बैंक खातों में सीधे 5,000 रुपये की शुरुआती आर्थिक सहायता भेजने का एलान किया था। यह कदम किसानों को दिवाली से पहले राहत देने के उद्देश्य से उठाया गया है।
सरकार का क्या कहना है?
सहायता राशि को लेकर सरकार के अनुसार, फसल के नुकसान का पूरा आकलन करने और केंद्र सरकार से सहायता राशि मिलने की प्रक्रिया में काफी समय लगता है। इसलिए किसानों को तत्काल राहत पहुंचाने के लिए यह 5,000 रुपये की घोषणा की गई है। सरकार का कहना है कि यह केवल शुरुआती मदद है, जबकि आगे की वित्तीय सहायता नुकसान के पूर्ण आकलन और संबंधित प्रक्रियाओं के पूरी होने के बाद तय की जाएगी।